शशि थरूर और प्रो. राजकुमार का जापान की संसद में संबोधन, जेजीयू ने 27 जापानी संस्थानों से साझेदारी की पुष्टि की
सारांश
मुख्य बातें
सांसद डॉ. शशि थरूर और ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) के फाउंडिंग वाइस चांसलर प्रोफेसर सी. राजकुमार ने 2 जुलाई 2026 को टोक्यो स्थित नेशनल डाइट बिल्डिंग में जापान की संसद के सदस्यों की एक विशेष द्विदलीय बैठक को संबोधित किया। यह कार्यक्रम जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के भारत के आधिकारिक दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले आयोजित किया गया।
बैठक का स्वरूप और उपस्थिति
इस द्विदलीय बैठक की अध्यक्षता जापान के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 80वें स्पीकर फुकुशिरो नुकागा ने की। बैठक में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और हाउस ऑफ काउंसिलर्स — दोनों सदनों के सदस्य शामिल हुए। इनके अलावा वरिष्ठ संसदीय नेता, पूर्व मंत्री, सरकारी प्रतिनिधि, राजनयिक, नीति विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। उपस्थितजनों की विविधता इस बात का संकेत है कि जापान भारत के साथ संसदीय संवाद, शैक्षणिक सहयोग और संस्थागत साझेदारी को उच्च प्राथमिकता देता है।
प्रोफेसर राजकुमार का संबोधन: शिक्षा को रणनीतिक स्तंभ बनाने का आह्वान
प्रोफेसर राजकुमार ने कहा, "एशिया का बदलता भू-राजनीतिक माहौल दिखाता है कि सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी शिक्षा, शोध, तकनीक, ह्यूमन कैपिटल, संस्थागत सहयोग और इनोवेशन में लगातार निवेश के जरिए सब्र से बनाई जाती हैं।" उन्होंने भारत और जापान के पास उपलब्ध उस विशेष अवसर को रेखांकित किया, जिसमें विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक सहयोग, उद्यमिता और नॉलेज पार्टनरशिप के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा किया जा सकता है।
जेजीयू के जापान से जुड़े अकादमिक सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की 27 प्रमुख जापानी संस्थानों के साथ साझेदारी है और जापान में विभिन्न स्टडी अब्रॉड कार्यक्रमों में लगभग 200 छात्र भाग ले चुके हैं। उनके अनुसार उच्च शिक्षा भारत-जापान संबंधों के विशेष स्तंभों में से एक बन गई है, क्योंकि विश्वविद्यालय भरोसा, आपसी समझ, नेतृत्व और दीर्घकालिक मैत्री का आधार तैयार करते हैं।
थरूर का संबोधन: संसदीय कूटनीति और सभ्यतागत संबंध
डॉ. थरूर ने संसदीय कूटनीति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि "कूटनीति सिर्फ हितों पर बातचीत करने या मुश्किलों का सामना करने के बारे में नहीं है — सबसे अच्छे रूप में, यह यादों को सँजोती है, आपसी सम्मान प्रकट करती है, और देशों को एक साथ बेहतर भविष्य की कल्पना करने और उसे गढ़ने के लिए प्रेरित करती है।"
भारत-जापान के सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों का उल्लेख करते हुए थरूर ने कहा, "दोनों देशों के बीच दोस्ती बौद्ध धर्म, सांस्कृतिक लेनदेन, लोकतांत्रिक मूल्य और गहरी सभ्यता के सम्मान से बढ़ी है। यह साझा इतिहास न सिर्फ गर्व का कारण है, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-जापान संबंधों का भविष्य केवल सरकारी समझौतों पर नहीं, बल्कि छात्रों, शोधकर्ताओं, संसदसदस्यों, उद्यमियों, कलाकारों और वैज्ञानिकों के बीच बने मानवीय संबंधों पर भी टिका है।
जापानी संसद सदस्यों की प्रतिक्रिया
नेशनल डाइट के सदस्यों ने भारत की सभ्यता विरासत, लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक संस्थाओं, आर्थिक परिवर्तन और बढ़ती वैश्विक भूमिका की सराहना की। उन्होंने दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय आदान-प्रदान, शैक्षणिक भागीदारी, वैज्ञानिक शोध, इनोवेशन और जन-संपर्क को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
व्यापक संदर्भ: शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले का संदेश
यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई जब भारत और जापान अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर आकार दे रहे हैं। टोक्यो की इस चर्चा ने यह रेखांकित किया कि दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों, संसदों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज की संस्थागत नींव पर भी खड़े होते हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच शैक्षणिक गतिशीलता और संयुक्त शोध के नए आयाम खुलने की उम्मीद है।