PM ताकाइची की भारत यात्रा: सुजुकी-इटोचू समेत जापानी दिग्गज, गुवाहाटी शिखर सम्मेलन जुलाई में
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची जुलाई के पहले सप्ताह में असम के गुवाहाटी में होने वाले भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगी। उनके साथ सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष तोशीहिरो सुजुकी और प्रमुख ट्रेडिंग कंपनी इटोचू कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी होगा। यह अक्टूबर 2025 में पद संभालने के बाद ताकाइची की भारत की पहली यात्रा होगी।
शिखर सम्मेलन का एजेंडा
निक्केई एशिया की रिपोर्टों के अनुसार, जापानी कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का मुख्य ध्यान भारत में निवेश के अवसरों, उद्योगों के बीच सहयोग और सप्लाई चेन को मज़बूत करने पर केंद्रित रहेगा। दोनों देशों के बीच टेलीकॉम, दवा उद्योग, ज़रूरी खनिज, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने की संयुक्त पहलों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
13 जून को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि राज्य अगले महीने एक 'शक्तिशाली वैश्विक नेता' के स्वागत की तैयारी कर रहा है।
सेमीकंडक्टर और रणनीतिक साझेदारी
गुवाहाटी में होने वाली यह बैठक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को नई गति दे सकती है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब असम खुद एक उभरते सेमीकंडक्टर उत्पादन केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नई तकनीक और इन्फॉर्मेशन एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) भी प्रमुख स्थान रखती हैं।
जापान की 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' योजना के तहत बंगाल की खाड़ी को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाले औद्योगिक गलियारे के निर्माण को भी दोनों सरकारें तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं। साथ ही, दोनों देशों ने सभी सैन्य क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास बढ़ाने और नौसैनिक तकनीक में सहयोग करने पर भी सहमति जताई है।
पिछले शिखर सम्मेलन की विरासत
पिछले वर्ष 29-30 अगस्त को टोक्यो में हुए 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने दोनों देशों की 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप' को और गहरा किया था। उस बैठक में अगले 10 वर्षों के लिए अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीक का रोडमैप तैयार किया गया था।
जापानी निवेश के आँकड़े
जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के 2024 के सर्वे के अनुसार, भारत अगले तीन वर्षों के लिए जापानी कंपनियों का सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बना हुआ है — 58.7% वोट के साथ, जो 2023 के 48.6% से अधिक है। लगातार 15वीं बार भारत को अगले दशक के लिए सर्वाधिक संभावनाओं वाले देश का पहला स्थान मिला है।
जापान से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 2022-23 में 1.79 अरब डॉलर और 2023-24 में 3.1 अरब डॉलर रहा। 2024-25 में दिसंबर तक यह 1.36 अरब डॉलर रहा। 2000 से दिसंबर 2024 तक जापान का भारत में कुल संचयी निवेश लगभग 43.2 अरब डॉलर पहुँच गया है, जिससे जापान निवेशक देशों में पाँचवें स्थान पर है।
भारत में पंजीकृत जापानी कंपनियों की संख्या लगभग 1,400 है, जिनमें से करीब आधी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के भारत में लगभग 5,000 कारोबारी प्रतिष्ठान — कार्यालय, शाखाएँ और स्थानीय कंपनियाँ — हैं। वहीं, 100 से अधिक भारतीय कंपनियाँ जापान में भी सक्रिय हैं।
गौरतलब है कि जापानी निवेश मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल उपकरण, टेलीकॉम, केमिकल, वित्तीय सेवाएँ (बीमा) और दवा उद्योग में केंद्रित रहा है। गुवाहाटी शिखर सम्मेलन इस साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का अवसर प्रदान करेगा।