राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर, निगरानी समिति गठित
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 7 जुलाई 2025 को अयोध्या में बुलाई गई करीब तीन घंटे लंबी आपात बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए — यह कदम रामलला मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के प्रकरण के बाद उठाया गया। ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तीन सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया है।
आपात बैठक और इस्तीफों की स्वीकृति
यह विशेष बैठक निर्धारित तिथि से पहले बुलाई गई और करीब तीन घंटे तक चली। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बैठक के बाद बताया कि चंपत राय ने स्वयं पद छोड़ने का निर्णय लेते हुए कहा कि जब तक चोरी के आरोपी गिरफ्तार होकर दंडित नहीं हो जाते, तब तक उनके लिए पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। वरिष्ठ ट्रस्टी के. पाराशरण ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार किसी पदाधिकारी का त्यागपत्र मिलते ही उसे स्वीकार किया जाना अनिवार्य है — इसी प्रावधान के तहत दोनों के इस्तीफे स्वीकार किए गए।
कार्यवाहक महासचिव और अगली समीक्षा बैठक
ट्रस्ट ने नए सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया है। गोविंद देव गिरी ने कहा कि चंपत राय ने मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के गठन से लेकर अब तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मामले की समीक्षा के लिए अगली बैठक 22 जुलाई को निर्धारित की गई है।
निगरानी समिति का गठन
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश जी हवारे शामिल हैं — जिन्होंने 10 वर्षों तक शिरडी संस्थान का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया था। गोविंद देव गिरी ने बताया कि यह समिति अलग-अलग उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेकर नाम सौंपेगी, जिनमें से ट्रस्ट अंतिम चयन करेगा।
धार्मिक धरोहरों पर भ्रामक दावों का खंडन
गोविंद देव गिरी ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को भ्रामक बताया जिनमें कहा जा रहा था कि मंदिर से दानपात्र के अलावा बहुमूल्य धार्मिक धरोहरें भी गायब हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के पास रामायण, चरण पादुका समेत करीब 2,800 धार्मिक एवं ऐतिहासिक वस्तुओं का विधिवत पंजीकृत रिकॉर्ड मौजूद है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक रूप से दिखाया जाएगा।
एसआईटी जांच और आगे की कार्रवाई
ट्रस्ट विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर निर्णय लिया जाएगा। गोविंद देव गिरी ने दोहराया कि 'चोरी, चोरी होती है' और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और जिन्हें संरक्षित वस्तुओं को लेकर संदेह है, वे नियमानुसार ट्रस्ट से संपर्क कर रिकॉर्ड देख सकते हैं।