राम जन्मभूमि ट्रस्ट बैठक पर संत समाज का सवाल: पारदर्शिता और CEO नियुक्ति पर गहरी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई है। 6 जुलाई 2026 को संत समाज ने बैठक की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जाँच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और ट्रस्ट के संभावित फैसलों को लेकर खुलकर चिंता जताई है। संतों का स्पष्ट कहना है कि आस्था से जुड़े हर निर्णय में अयोध्या के संत समाज और स्थानीय निवासियों को विश्वास में लिया जाना चाहिए।
बैठक की तारीख बदलने पर उठे सवाल
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने बैठक की तारीख बदले जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक, जो पहले 11 तारीख को होनी थी, उसे कथित तौर पर गोविंद देव गिरी के दबाव में 6 तारीख को कर दिया गया है। आशंका है कि यह बैठक गड़बड़ी करने के इरादे से बुलाई गई है। जब तक ट्रस्ट के अध्यक्ष मौजूद नहीं हैं, तब तक ऐसी बैठक कैसे हो सकती है? संत समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह पूरे देश और दुनिया भर के भक्तों के लिए आस्था का विषय है और इसमें किसी भी प्रकार की अपारदर्शिता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
आचार्य वरुण दास महाराज ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना हुआ है, यह बैठक केवल अयोध्या ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। वरुण दास महाराज ने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ट्रस्ट के कई सदस्य इस बैठक में अनुपस्थित रहेंगे, जो उनके अनुसार चिंताजनक है।
CEO नियुक्ति और सरकारीकरण की आशंका
वरुण दास महाराज ने CEO व्यवस्था को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि किसी बाहरी व्यक्ति को लाकर ट्रस्ट में पदों का बदलाव करना या प्रशासनिक ढाँचे में बड़े परिवर्तन करना अयोध्या के संत समाज को स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे निर्णय लिए जाते हैं तो संत समाज और स्थानीय लोग इसका विरोध करेंगे और आंदोलन होगा। उनके अनुसार, CEO व्यवस्था से परियोजना के 'सरकारीकरण' की आशंका पैदा होती है, जो राम जन्मभूमि आंदोलन की मूल भावना के विरुद्ध है।
संत समाज की मुख्य माँगें
वरुण दास महाराज ने ज़ोर देकर कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन संतों और स्थानीय लोगों के सहयोग से चला था, इसलिए इस परियोजना से जुड़े हर निर्णय में उनकी राय महत्वपूर्ण होनी चाहिए। ट्रस्ट को केवल आंतरिक बैठकों तक सीमित न रहकर संत समाज और अयोध्या वासियों के साथ पारदर्शी तरीके से संवाद करना चाहिए। महंत सीताराम दास ने भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ट्रस्ट को 'बदनाम करने या उस पर कब्ज़ा करने' की कोशिश करता है तो संत समाज इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
ट्रस्ट कोषाध्यक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की राह
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बैठक से पहले मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा, 'मैं बैठक के बाद आपसे बात करूंगा। मैं अगले तीन दिनों तक यहीं रहूंगा और आप सभी से मिलकर हर चीज पर विस्तार से चर्चा करूंगा।' गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ट्रस्ट के आंतरिक प्रशासन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में ट्रस्ट के फैसले और संत समाज की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि अयोध्या में यह विवाद किस दिशा में जाता है।