राम मंदिर चंदा विवाद: 6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक से पहले संतों ने कहा — जांच के बाद होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 6 जुलाई को होने वाली अहम बैठक से एक दिन पहले, अयोध्या के संतों ने रविवार, 5 जुलाई को स्पष्ट किया कि राम मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं की जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जांच रिपोर्ट पर विचार के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। यह बैठक मणि रामदास छावनी (छोटी छावनी) में दोपहर 3 बजे निर्धारित है, जिसमें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट और वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों पर चर्चा होनी है।
बैठक का एजेंडा और प्रमुख मुद्दे
सूत्रों के अनुसार, पाँच-बिंदुओं वाले एजेंडे में सबसे पहला और सबसे संवेदनशील मुद्दा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा है। दान प्रबंधन में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद से ये दोनों, ट्रस्ट प्रशासक गोपाल राव के साथ, विवाद के केंद्र में बने हुए हैं। बैठक में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट की समीक्षा के साथ-साथ मंदिर प्रशासन की देखरेख के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
संतों की प्रतिक्रिया
महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने कहा कि जांच में कुछ तथ्य उजागर हुए हैं और बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा, "हां, जांच में कुछ बातें सामने आई हैं। इस मामले पर संतों की बैठक में क्या कहा जाता है, यह बाद में साफ होगा... लोगों का भरोसा वापस आएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और कमेटी तय करेगी कि क्या करना है, जिसमें यह भी शामिल है कि कौन बना रहेगा और किसे हटाया जाएगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के नाम पर हुए कार्यों से अयोध्या में व्यापक आर्थिक जागरूकता आई है, जिसका लाभ दुकानदारों, कैब चालकों और होटल मालिकों तक पहुँचा है।
बैठक की तैयारियाँ पूरी
महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने पुष्टि की कि सोमवार की बैठक की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और सभी सदस्यों को सूचित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "चल रही जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है। जो भी फैसला लिया जाएगा, वह सही होगा। इससे भगवान श्री राम में लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।"
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से एकत्रित दान की राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद उभरा। एसआईटी का गठन इन्हीं आरोपों की जांच के लिए किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएँ भी इससे जुड़ी हैं, जिससे पारदर्शिता की माँग और तीव्र हो गई है।
आगे क्या होगा
6 जुलाई की बैठक के नतीजे तय करेंगे कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों का भविष्य क्या होगा और मंदिर प्रशासन में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएँगे। एसआईटी की पूर्ण रिपोर्ट और सीईओ नियुक्ति पर निर्णय इस बैठक के सबसे अहम परिणाम हो सकते हैं।