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राम मंदिर दान चोरी मामला: एसआईटी गठित, 7 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट तलब

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राम मंदिर दान चोरी मामला: एसआईटी गठित, 7 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट तलब

सारांश

अयोध्या राम मंदिर के दान पात्रों से चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने एसआईटी गठित की है। तीन वरिष्ठ अधिकारियों की यह टीम 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देगी। विपक्ष के तीखे सवालों और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बीच ट्रस्ट ने खुद जांच की माँग की थी।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश शासन ने 13 जून 2026 को राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी गठित की।
एसआईटी में मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत , आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।
एसआईटी 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोशल मीडिया अफवाहों पर विराम लगाने के लिए खुद जांच की माँग की थी।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले को 'चढ़ावा चोरी कांड' कहते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों की पहचान की माँग की।

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्रों से धनराशि चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने 13 जून 2026 को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।

एसआईटी की संरचना

गठित एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को शामिल किया गया है। तीनों वरिष्ठ अधिकारियों की यह टीम मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच करेगी।

ट्रस्ट ने क्यों माँगी थी जांच

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक प्रवक्ता के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस प्रकरण को लेकर भ्रामक सूचनाएँ और अफवाहें तेज़ी से फैल रही थीं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँग की थी कि तथ्यों को जनता के सामने लाने और अफवाहों पर विराम लगाने के लिए एसआईटी गठित की जाए।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले को 'चढ़ावा चोरी कांड' करार देते हुए कहा कि इससे जुड़े कई सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा, 'ट्रस्टी क्या कहना चाहते हैं, यह किसी को समझ नहीं आ रहा है। हेराफेरी में संलिप्त लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें अखबारों, टीवी चैनलों, मीडिया पोर्टलों और यूट्यूब चैनलों के माध्यम से प्रसारित की जा रही हैं।'

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पहले पुलिस इस संबंध में कुछ नहीं कहती, लेकिन बाद में कथित तौर पर किसी दबाव में आकर खंडन जारी करती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता जनता के आक्रोश को देखकर असहज हो गए हैं और इस मामले से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सनातन आस्था पर उठे सवाल

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़ी हर घटना देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित करती है। अखिलेश यादव के अनुसार, इस मामले की अस्पष्ट परिस्थितियों के कारण देश और विदेश में सनातन धर्मावलंबियों के बीच आशंकाएँ और बढ़ गई हैं। उन्होंने माँग की कि यह सामने आना चाहिए कि चढ़ावे में कथित चोरी के पीछे कौन लोग हैं और उन्हें कौन संरक्षण दे रहा है।

आगे क्या होगा

एसआईटी अब अपनी जांच शुरू करेगी और सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट तथा 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। जांच के नतीजे न केवल इस मामले की सच्चाई उजागर करेंगे, बल्कि मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी महत्त्वपूर्ण सवाल खड़े करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि स्वतःस्फूर्त जवाबदेही से। गौरतलब है कि ट्रस्ट को खुद जांच माँगनी पड़ी — यह मंदिर प्रबंधन की आंतरिक पारदर्शिता तंत्र की सीमाओं को उजागर करता है। विपक्ष के सवाल चाहे राजनीति-प्रेरित हों, लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थान में वित्तीय जवाबदेही का सवाल वैध है। असली कसौटी यह होगी कि एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है या केवल प्रशासनिक फाइलों में दब जाती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी क्यों गठित की गई?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एसआईटी जांच की माँग की थी, क्योंकि सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएँ और अफवाहें फैल रही थीं जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम उत्पन्न हो रहा था। शासन ने 13 जून 2026 को एसआईटी गठित कर दी।
एसआईटी में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को शामिल किया गया है। ये तीनों वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मिलकर मामले की जांच करेंगे।
एसआईटी कब तक रिपोर्ट देगी?
एसआईटी को 7 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
अखिलेश यादव ने इस मामले पर क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे 'चढ़ावा चोरी कांड' बताते हुए कहा कि मामले से जुड़े कई सवाल अनुत्तरित हैं और यह सामने आना चाहिए कि कथित चोरी के पीछे कौन लोग हैं और उन्हें कौन बचा रहा है। उन्होंने BJP नेताओं पर मामले से दूरी बनाने का आरोप भी लगाया।
इस मामले का श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ा है?
ट्रस्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारियों के कारण देश और विदेश में सनातन धर्मावलंबियों के बीच आशंकाएँ बढ़ी हैं। अखिलेश यादव ने भी कहा कि इन अस्पष्ट परिस्थितियों से श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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