4 अगस्त 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच में साधु-संतों की कोई भूमिका नहीं — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच में साधु-संतों की कोई भूमिका नहीं — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया कि एसआईटी जांच में किसी साधु-संत की भूमिका नहीं मिली। उन्होंने सपा और कांग्रेस पर सनातन परंपरा की छवि धूमिल करने और भ्रामक प्रचार का आरोप लगाया। मंदिर परिसर में 1,100 से अधिक कर्मियों में से कुछ की संलिप्तता पर कार्रवाई जारी है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि एसआईटी जांच में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई।
राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ था, राज्य सरकार का उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है।
मंदिर परिसर में 1,100 से अधिक लोग कार्यरत हैं; सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर कुछ व्यक्तियों पर कार्रवाई जारी।
22 जनवरी 2024 के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विपक्षी नेताओं को निमंत्रण दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार किया।
योगी ने विधानसभा में मार्शलों के साथ कथित धक्का-मुक्की की निंदा की, इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अगस्त 2026 को लखनऊ में विधानसभा कार्यवाही समाप्त होने के बाद स्पष्ट किया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में किसी भी साधु या संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सनातन परंपरा और प्रदेश की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट और सरकार की भूमिका

विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन राज्य सरकार ने नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ट्रस्ट के कामकाज में राज्य सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। उनके अनुसार, इसके बावजूद विपक्ष लगातार निराधार आरोप लगाकर भ्रामक प्रचार कर रहा है।

एसआईटी जांच और कार्रवाई का ब्यौरा

मुख्यमंत्री ने बताया कि चढ़ावा चोरी की जानकारी मिलते ही सरकार ने तत्काल एसआईटी गठित की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों की भूमिका सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों में सामने आई है, उनके विरुद्ध कार्रवाई जारी है और न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में 1,100 से अधिक लोग विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं और कुछ व्यक्तियों की संलिप्तता के आधार पर पूरे मंदिर प्रशासन, साधु-संतों और कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा करना 'दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना' है।

विपक्ष पर राजनीतिक हमला

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस का रवैया हमेशा से राम मंदिर और सनातन परंपरा के प्रति विरोध का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दलों ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया, वही आज आस्था की राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विपक्षी नेताओं को निमंत्रण दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसमें शामिल होना उचित नहीं समझा।

संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आचरण पर चिंता

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वह विधानसभा, चुनाव आयोग (ECI) और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास करता है। उन्होंने विधानसभा में अध्यक्ष की पीठ के प्रति हुए व्यवहार और मार्शलों के साथ कथित धक्का-मुक्की की निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि सरकार कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। यह मामला उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है और आने वाले सत्रों में इस पर और बहस की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और एसआईटी का गठन त्वरित कदम था। असली सवाल यह है कि 1,100 से अधिक कर्मियों वाले परिसर में चढ़ावा चोरी की निगरानी प्रणाली इतनी कमज़ोर क्यों थी। विपक्ष का आरोप राजनीति से प्रेरित हो सकता है, लेकिन प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल सरकार की ओर से भी बिना उत्तर के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण क्या है?
यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़ा है, जिसके सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल एसआईटी गठित की। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कुछ व्यक्तियों की पहचान की गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है।
एसआईटी जांच में साधु-संतों की भूमिका क्यों नहीं मिली?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, एसआईटी की जांच में अब तक किसी भी साधु या संत की संलिप्तता के साक्ष्य सामने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में 1,100 से अधिक लोग कार्यरत हैं और कुछ व्यक्तियों की भूमिका के आधार पर पूरे समुदाय को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
राम मंदिर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार का क्या संबंध है?
राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ था, न कि राज्य सरकार द्वारा। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के कामकाज में राज्य सरकार का कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं है।
सपा और कांग्रेस ने इस मामले में क्या आरोप लगाए हैं?
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस प्रकरण को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री योगी ने इन आरोपों को 'निराधार' और 'भ्रामक' करार दिया है, और कहा है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए सनातन परंपरा की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि एसआईटी की जांच जारी है और न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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