सुनीता विलियम्स: भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष यात्री, 608 दिन अंतरिक्ष में
सारांश
मुख्य बातें
सुनीता लिन विलियम्स नासा (अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी) की सर्वाधिक अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं और भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरी। अब तक वे 3 मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं और 9 स्पेसवॉक कर चुकी हैं, जिनका कुल समय 62 घंटे 6 मिनट है।
जन्म और शैक्षिक पृष्ठभूमि
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या गुजरात मूल के भारतीय हैं, जबकि माँ उर्सुलिन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी हैं। उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से फिजिकल साइंस में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की।
नासा में चयन से पूर्व वे अमेरिकी नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट रहीं और 30 से अधिक प्रकार के विमानों में 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव अर्जित किया। 1998 में नासा ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना।
कल्पना चावला की विरासत
भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी। कल्पना चावला के बाद सुनीता विलियम्स ने इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाया और अंतरिक्ष अन्वेषण में भारतीय मूल की महिलाओं की उपस्थिति को और सुदृढ़ किया।
तीन ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन
सुनीता विलियम्स ने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को डिस्कवरी स्पेस शटल से उड़ान भरी और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर एक्सपीडिशन 14 और 15 मिशन का हिस्सा रहीं। इस मिशन के दौरान उन्होंने 195 दिन अंतरिक्ष में बिताए — जो उस समय किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था। इस दौरान उन्होंने 4 स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 29 घंटे 17 मिनट रही।
दूसरी बार 14 जुलाई 2012 को सुनीता रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान से ISS के लिए रवाना हुईं और एक्सपीडिशन 32/33 मिशन की कमांडर बनीं। इस मिशन में वे 127 दिन अंतरिक्ष में रहीं।
तीसरा मिशन सुनीता के करियर का सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण रहा। 5 जून 2024 को वे बैरी विल्मोर के साथ बोइंग स्टारलाइनर के क्रू फ्लाइट टेस्ट के अंतर्गत ISS पर गईं। यह मिशन मूलतः केवल 8 दिन का था, किंतु तकनीकी खराबी के कारण उन्हें नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में ही रहना पड़ा।
धरती पर वापसी और भारत से जुड़ाव
आखिरकार 18 मार्च 2025 को सुनीता विलियम्स स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से सकुशल पृथ्वी पर लौटीं। यह वापसी कड़ी चुनौतियों के बाद संभव हुई और पूरी दुनिया ने राहत की साँस ली। भारत सरकार ने भी सुनीता को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया है।
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में भगवद्गीता और गणेशजी की मूर्ति ले जाकर और अंतरिक्ष में समोसे का ज़िक्र कर भारत से अपना गहरा भावनात्मक जुड़ाव प्रकट किया है। यह जुड़ाव करोड़ों भारतीयों के दिलों में उनके प्रति अपार स्नेह का कारण है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सुनीता विलियम्स की यात्रा केवल अंतरिक्ष की सीमाओं को नहीं, बल्कि संभावनाओं की हर सीमा को पार करने की प्रेरणा बनती रहेगी।