क्या अंतरिक्ष में भारतीय भोजन का पैकेट खोलना एक अनोखा अनुभव है? : सुनीता विलियम्स
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नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नासा की अंतरिक्ष यात्री एवं अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन सुनीता एल. विलियम्स ने अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने का अनुभव साझा किया है।
सुनीता विलियम्स ने आईआईटी दिल्ली में अपनी उपस्थिति के दौरान बताया कि अंतरिक्ष से देखने पर ‘ओवरव्यू इफेक्ट’ का अनुभव होता है, जहाँ यह अहसास होता है कि पूरी मानवता एक ही ग्रह पर निवास करती है, गहराई से एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और सीमाएँ बेमायने हो जाती हैं।
एक भावनात्मक स्मृति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में भारतीय भोजन से भरा पैकेट खोलना उनके लिए बेहद खास अनुभव था। वह अपने सह-यात्रियों के साथ उस भोजन को साझा करने को और भी विशेष मानती हैं, क्योंकि भोजन लोगों को जोड़ने का कार्य करता है चाहे वे पृथ्वी पर हों या कक्षा में। आईआईटी दिल्ली के डोगरा हॉल में उस समय उत्साह और सम्मान का माहौल था, जब अंतरिक्ष यात्री ने संस्थान का दौरा किया।
इस अवसर पर उन्होंने ‘द मेकिंग ऑफ एन एस्ट्रोनॉट: सुनीता विलियम्स स्टोरी’ विषय पर व्याख्यान दिया। सुनीता ने मानव अंतरिक्ष उड़ान के वर्तमान चरण को रोमांचक बताया और कहा, “मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए यह एक उत्साहजनक समय है। हर नया प्रोजेक्ट चुनौतियों के साथ आता है, लेकिन हर अनुभव हमें कुछ सिखाता है।”
अंतरिक्ष अभियानों की जटिलताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कभी-कभी अनेक प्रणालियों और बैकअप व्यवस्थाओं के बीच काम करना पड़ता है, लेकिन समाधान हमेशा जटिल नहीं होते। अगर ध्यानपूर्वक अवलोकन किया जाए, तो कई बार सरल उपाय ही सबसे प्रभावी होते हैं।
शून्य गुरुत्वाकर्षण की कल्पना करते हुए सुनीता ने कहा कि जब गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, तब सामग्री, चिकित्सा और मानव व्यवहार में बदलाव साफ दिखाई देता है। यह समझ हमें स्वयं और ब्रह्मांड के बारे में अधिक जानने में मदद करती है। व्याख्यान के बाद, प्रो. शिल्पी शर्मा द्वारा संचालित फायरसाइड चैट का आयोजन हुआ।
इस संवाद में आईआईटी दिल्ली समुदाय द्वारा पूछे गए प्रश्नों के माध्यम से सुनीता विलियम्स के व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा हुई। उन्होंने अपने बचपन, छात्र-खिलाड़ी और तैराक के रूप में अनुशासन, टीमवर्क और अंतरिक्ष अभियानों के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने जैसे विषयों पर खुलकर बात की।
उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में टीम के रूप में काम करने का अनुभव उन्हें यह सिखाता था कि व्यक्तिगत सफलता से अधिक महत्वपूर्ण सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए। अपने प्रभावशाली वक्तव्य के माध्यम से उन्होंने आईआईटी दिल्ली के छात्रों को अपने हालिया अंतरिक्ष मिशन के अनुभवों से अवगत कराया। उनके वर्णन ने अंतरिक्ष की विशालता को शोधकर्ताओं के लिए निकट और जीवंत बना दिया।
आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों, छात्रों और फैकल्टी के लिए यह अवसर न केवल गौरवपूर्ण था, बल्कि प्रेरणादायक भी रहा। इस अवसर पर सुनीता ने आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी एवं संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की। निदेशक ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आईआईटी दिल्ली के योगदान और इसरो के साथ चल रहे संयुक्त सहयोगों पर प्रकाश डाला।