क्या अंतरिक्ष यात्रा अद्भुत और कल्पना से परे है? शुभांशु शुक्ला का अनुभव

सारांश
Key Takeaways
- अंतरिक्ष यात्रा अद्भुत और चुनौतीपूर्ण होती है।
- टीम वर्क का महत्व हर मिशन में होता है।
- माइक्रोग्रैविटी नए अवसरों का द्वार खोलती है।
- भारत का भविष्य अंतरिक्ष विज्ञान में छिपा है।
- अन्वेषण से समाधान खोजने का अवसर मिलता है।
लखनऊ, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अंतरिक्ष यात्रा से लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सोमवार को अपने गृह जनपद पहुंचे हैं। इस अवसर पर उन्होंने पत्रकारों के साथ अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि हमारी यात्रा बेहद अद्भुत थी, जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। इस दौरान उनके शरीर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अंतरिक्ष में बिताए गए समय के बारे में उन्होंने कहा कि यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। शुरुआत में कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन फिर आपका शरीर वहाँ के माहौल के अनुकूल ढल जाता है।
शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष यान से भारत को देखना एक भावुक पल होता है, यह सोचकर कि आप कहाँ से आए हैं और अब आप कितनी दूर हैं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव बहुत खास है और वहां से भारत बहुत सुंदर नजर आता है। उन्होंने कहा कि इस रोमांचक यात्रा का अनुभव अकेले उनका नहीं है, बल्कि इसमें पूरी टीम का योगदान होता है।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने व्यक्त किया, "मुझे लगता है कि हमने पहली बार भारतीय अनुभव अंतरिक्ष में किए हैं। बदलते भारत और विकसित भारत का जो 2047 का सपना है, वह एक ही चीज़ से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए विभिन्न पहलुओं से रोड मैप तैयार करना होगा।"
उन्होंने कहा कि इस यात्रा को सफल बनाने में उनकी टीम पर विश्वास और टीम का उन पर विश्वास महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रोग्रैविटी भारत के लिए नए अवसर खोलती है। यह केवल अंतरिक्ष विज्ञान में ही नहीं, बल्कि चिकित्सा, सामग्री अनुसंधान और प्रौद्योगिकी में भी बड़ा योगदान दे सकती है। जब हम यह समझते हैं कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में मानव शरीर और वस्तुएं कैसे व्यवहार करती हैं, तो हमें ऐसे नवाचार मिलते हैं जो धरती पर जीवन को बदल सकते हैं। यह केवल अन्वेषण नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए समाधान खोजने का अवसर है।
जब मीडिया से बात कर रहे थे, तब शुभांशु ने कहा कि अंतरिक्ष में जाने का मिशन स्वयं में एक चुनौती है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि एस्ट्रोनॉट्स केवल आगे देखते हैं, लेकिन उनके पीछे एक बड़ी टीम होती है। यह प्रक्रिया बहुत चुनौती भरी होती है जिसमें आपको कई समस्याओं का समाधान करना होता है।
उन्होंने कहा कि मैं कुछ समय पहले दिल्ली आया था, जहाँ मैंने कई लोगों से मुलाकात की और सम्मान प्राप्त किया। जब से मैं लखनऊ लौटा हूँ, मुझे जिस तरह का समर्थन मिल रहा है, मैंने इसकी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य में जो कार्य करना है, उसके लिए मुझे आज काफी साहस मिला है।