यमन में हूती-सेना संघर्ष: ताइज और लहज में 24 घंटे में 44 की मौत, मोखा पर कब्जे के बाद लड़ाई तेज
सारांश
मुख्य बातें
यमन के ताइज और लहज प्रांतों में सरकारी सेना और हूती विद्रोही समूह के बीच जारी भीषण संघर्ष में 19 सितंबर 2026 तक के पिछले 24 घंटों में कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई। दोनों पक्षों के सैन्य सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह हिंसा तब और तेज हुई है जब हूती समूह ने इसी महीने लाल सागर तट पर अपनी पकड़ मजबूत की है।
मुख्य घटनाक्रम
ताइज प्रांत के अल-कधा और अल-वाजियाह क्षेत्रों में हूती विद्रोहियों ने पिछले 24 घंटों में सरकारी ठिकानों पर कई बार हमले किए, जिन्हें सेना ने विफल करने का दावा किया। सरकारी सेना के एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इन झड़पों में सरकारी सेना के 6 जवान और हूती समूह के 11 लड़ाके मारे गए।
सूत्र के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने बड़ी संख्या में अतिरिक्त लड़ाके उतारकर कई जगहों पर रक्षा पंक्ति तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
लहज मोर्चे पर भारी नुकसान
लहज प्रांत के कहबूब पर्वतीय क्षेत्र में भी भीषण लड़ाई जारी रही। यह इलाका बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक रणनीतिक ऊँचाई वाला क्षेत्र है। एक सरकारी सैन्य अधिकारी के अनुसार, कहबूब मोर्चे पर सरकारी सेना के 12 जवान मारे गए।
वहीं हूती समूह के एक सैन्य सूत्र ने दावा किया कि इसी अवधि में कहबूब में हुई लड़ाई में 15 हूती लड़ाके मारे गए, जिनमें एक कमांडर भी शामिल है।
मोखा और पेरिम द्वीप पर हूती कब्जे के बाद बढ़ा तनाव
यह ताज़ा संघर्ष ऐसे समय में और उग्र हुआ है जब हूती समूह ने इसी महीने दक्षिण-पश्चिमी लाल सागर तट पर अहम बढ़त हासिल की। समूह ने 10 सितंबर 2026 को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किया और अगले ही दिन 11 सितंबर को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मध्य स्थित मय्यून (पेरिम) द्वीप पर भी नियंत्रण कर लिया। यह जलमार्ग वैश्विक शिपिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि दोनों पक्ष रणनीतिक इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिक और हथियार भेज रहे हैं, जो संघर्ष के और लंबे खिंचने का संकेत देता है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में यह गृहयुद्ध वर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया था। इसके बाद मार्च 2015 में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अरब गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था। एक दशक से अधिक समय से जारी इस संघर्ष को संयुक्त राष्ट्र दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक बताता रहा है।
आगे क्या होगा
मोखा और पेरिम द्वीप पर हूती नियंत्रण ने बाब-अल-मंदेब के रणनीतिक संतुलन को बदल दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए एक अहम जलडमरूमध्य है। यदि यह पकड़ बनी रहती है, तो यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की प्रतिक्रिया को और जटिल बना सकता है। फिलहाल ज़मीनी लड़ाई के रुकने के कोई संकेत नहीं हैं।