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यमन में हूती-सेना संघर्ष: ताइज और लहज में 24 घंटे में 44 की मौत, मोखा पर कब्जे के बाद लड़ाई तेज

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यमन में हूती-सेना संघर्ष: ताइज और लहज में 24 घंटे में 44 की मौत, मोखा पर कब्जे के बाद लड़ाई तेज

सारांश

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच 24 घंटे में 44 मौतें — और यह तब हुआ जब हूती समूह ने 10 सितंबर को मोखा बंदरगाह और 11 सितंबर को बाब-अल-मंदेब के बीच पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया। रणनीतिक जलमार्ग पर यह बदलता नियंत्रण संघर्ष को नए मोड़ पर ले जा सकता है।

मुख्य बातें

यमन के ताइज और लहज प्रांतों में 24 घंटों के भीतर कम से कम 44 लोग मारे गए।
ताइज प्रांत में सरकारी सेना के 6 जवान और हूती समूह के 11 लड़ाके मारे गए।
कहबूब मोर्चे पर सरकारी सेना के 12 जवान और हूती पक्ष के 15 लड़ाके (एक कमांडर सहित) मारे गए।
हूती समूह ने 10 सितंबर को मोखा बंदरगाह और 11 सितंबर को मय्यून (पेरिम) द्वीप पर कब्जा किया।
यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत से जारी है; सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में हस्तक्षेप किया था।

यमन के ताइज और लहज प्रांतों में सरकारी सेना और हूती विद्रोही समूह के बीच जारी भीषण संघर्ष में 19 सितंबर 2026 तक के पिछले 24 घंटों में कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई। दोनों पक्षों के सैन्य सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह हिंसा तब और तेज हुई है जब हूती समूह ने इसी महीने लाल सागर तट पर अपनी पकड़ मजबूत की है।

मुख्य घटनाक्रम

ताइज प्रांत के अल-कधा और अल-वाजियाह क्षेत्रों में हूती विद्रोहियों ने पिछले 24 घंटों में सरकारी ठिकानों पर कई बार हमले किए, जिन्हें सेना ने विफल करने का दावा किया। सरकारी सेना के एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इन झड़पों में सरकारी सेना के 6 जवान और हूती समूह के 11 लड़ाके मारे गए।

सूत्र के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने बड़ी संख्या में अतिरिक्त लड़ाके उतारकर कई जगहों पर रक्षा पंक्ति तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।

लहज मोर्चे पर भारी नुकसान

लहज प्रांत के कहबूब पर्वतीय क्षेत्र में भी भीषण लड़ाई जारी रही। यह इलाका बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक रणनीतिक ऊँचाई वाला क्षेत्र है। एक सरकारी सैन्य अधिकारी के अनुसार, कहबूब मोर्चे पर सरकारी सेना के 12 जवान मारे गए।

वहीं हूती समूह के एक सैन्य सूत्र ने दावा किया कि इसी अवधि में कहबूब में हुई लड़ाई में 15 हूती लड़ाके मारे गए, जिनमें एक कमांडर भी शामिल है।

मोखा और पेरिम द्वीप पर हूती कब्जे के बाद बढ़ा तनाव

यह ताज़ा संघर्ष ऐसे समय में और उग्र हुआ है जब हूती समूह ने इसी महीने दक्षिण-पश्चिमी लाल सागर तट पर अहम बढ़त हासिल की। समूह ने 10 सितंबर 2026 को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किया और अगले ही दिन 11 सितंबर को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मध्य स्थित मय्यून (पेरिम) द्वीप पर भी नियंत्रण कर लिया। यह जलमार्ग वैश्विक शिपिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि दोनों पक्ष रणनीतिक इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिक और हथियार भेज रहे हैं, जो संघर्ष के और लंबे खिंचने का संकेत देता है।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

यमन में यह गृहयुद्ध वर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया था। इसके बाद मार्च 2015 में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अरब गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था। एक दशक से अधिक समय से जारी इस संघर्ष को संयुक्त राष्ट्र दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक बताता रहा है।

आगे क्या होगा

मोखा और पेरिम द्वीप पर हूती नियंत्रण ने बाब-अल-मंदेब के रणनीतिक संतुलन को बदल दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए एक अहम जलडमरूमध्य है। यदि यह पकड़ बनी रहती है, तो यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की प्रतिक्रिया को और जटिल बना सकता है। फिलहाल ज़मीनी लड़ाई के रुकने के कोई संकेत नहीं हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे वैश्विक शिपिंग मार्ग सीधे प्रभावित होते हैं। एक दशक से अधिक के इस संघर्ष में हर बार युद्धविराम की कोशिशें ज़मीनी लड़ाई में दम तोड़ती रही हैं। जब तक बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक नियंत्रण बिंदुओं पर समझौते की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं बनती, तब तक मानवीय संकट और गहराता जाएगा — और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया एकबार फिर बयानों तक सिमटने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमन में हालिया संघर्ष में कितने लोग मारे गए?
सैन्य सूत्रों के अनुसार, 19 सितंबर 2026 तक के 24 घंटों में यमन के ताइज और लहज प्रांतों में कम से कम 44 लोग मारे गए। इनमें दोनों पक्षों के सैनिक और लड़ाके शामिल हैं।
हूती विद्रोहियों ने मोखा पर कब कब्जा किया?
हूती समूह ने 10 सितंबर 2026 को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किया। अगले दिन 11 सितंबर को उन्होंने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीच स्थित मय्यून (पेरिम) द्वीप पर भी नियंत्रण कर लिया।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहाँ हूती नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए चिंता का विषय है।
यमन में यह संघर्ष कब से चल रहा है?
यमन में गृहयुद्ध 2014 के अंत में शुरू हुआ जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा किया। मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अरब गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
ताइज और लहज में कौन-से मोर्चों पर लड़ाई हो रही है?
ताइज प्रांत के अल-कधा और अल-वाजियाह क्षेत्रों में हूतियों ने सरकारी ठिकानों पर हमले किए। लहज प्रांत के कहबूब पर्वतीय क्षेत्र में भी भीषण लड़ाई जारी है, जो बाब-अल-मंदेब की ओर जाने वाले मार्ग पर एक रणनीतिक ऊँचाई वाला इलाका है।
राष्ट्र प्रेस
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