हूती का दावा: यमन के मारिब में सऊदी हथियारबंद टोही ड्रोन और दो F-15 जेट किए ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
हूती विद्रोहियों ने कथित तौर पर यमन के उत्तर-पूर्वी मारिब प्रांत में सऊदी अरब के एक हथियारबंद टोही ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। 17 सितंबर 2026 को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने हूती-संचालित अल-मसीराह टीवी पर बुधवार शाम (स्थानीय समय) एक आधिकारिक बयान जारी किया। यह घटना यमन में सऊदी-हूती संघर्ष के फिर से भड़कने के बीच सामने आई है।
मुख्य घटनाक्रम
सरी ने अपने बयान में कहा, मारिब प्रांत के आकाश में उड़ रहे सऊदी के एक 'हथियारबंद टोही ड्रोन' को 'सही हथियार का इस्तेमाल करके' मार गिराया गया। उनके अनुसार, इस कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर निर्मित सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों का उपयोग किया गया।
इससे पहले, उसी दिन हूती की ओर से यह भी दावा किया गया कि दो सऊदी F-15 फाइटर जेट को भी इंटरसेप्ट किया गया। सरी के मुताबिक, ये दोनों लड़ाकू विमान दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत एयर बेस से उड़े थे और यमन के पश्चिमी ताइज में मोचा के ऊपर हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए थे। हूती के अनुसार इन्हें मिसाइलों से निशाना बनाने के बाद वे वापस लौट गए।
हूती के व्यापक दावे
हूती की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि पिछले कुछ दिनों में सऊदी गठबंधन ने उनके विभिन्न जिलों पर 450 से अधिक हमले किए हैं। गौरतलब है कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और सऊदी अरब की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
लाल सागर तट पर हूती का विस्तार
हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में यमन के लाल सागर तट पर अपनी पकड़ और मजबूत की है। उन्होंने 10 सितंबर को रणनीतिक बंदरगाह नगर मोचा पर कब्जा किया और ठीक अगले दिन, 11 सितंबर को, बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के केंद्र में स्थित मायून द्वीप को भी अपने नियंत्रण में ले लिया। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत में तब शुरू हुआ जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े भूभाग पर कब्जा जमा लिया। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के पक्ष में सैन्य हस्तक्षेप किया। एक दशक से अधिक समय बाद भी यह संघर्ष जारी है और हूती अब लाल सागर व्यापारिक मार्गों पर दबाव बनाए हुए हैं।
क्या होगा आगे
मोचा बंदरगाह और मायून द्वीप पर हूती के नियंत्रण से बाब अल-मंदाब मार्ग पर उनकी पकड़ और गहरी हो गई है, जो वैश्विक शिपिंग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन सकती है। आलोचकों का कहना है कि यदि हूती इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखते हैं, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है।