10 अगस्त 2026
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यूएन दूत हैंस ग्रंडबर्ग की चेतावनी: मोचा पर हूती हमलों से यमन में बड़े संघर्ष का खतरा

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यूएन दूत हैंस ग्रंडबर्ग की चेतावनी: मोचा पर हूती हमलों से यमन में बड़े संघर्ष का खतरा

सारांश

यूएन के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने चेताया है कि मोचा बंदरगाह पर हूती हमलों में 8 लोगों की मौत और 32 घायल होने के बाद यमन 2022 के युद्धविराम के बाद से सबसे गंभीर सैन्य तनाव की कगार पर खड़ा है। बड़े पैमाने पर संघर्ष का खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

यूएन के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने 10 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि यमन बड़े पैमाने के संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।
हूती समूह ने मोचा बंदरगाह पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, जिसमें 8 लोग मारे गए और करीब 32 घायल हुए।
बंदरगाह निदेशक अब्दुल मलिक अल-शराबी के अनुसार लगभग 25 ड्रोन ने आर्थिक प्रतिष्ठानों और कस्टम हैंगर को निशाना बनाया।
यह सैन्य गतिविधि अप्रैल 2022 के संयुक्त राष्ट्र-मध्यस्थ युद्धविराम के बाद से सबसे तीव्र बताई जा रही है।
यमन 2014 से गृहयुद्ध में है; 2022 का युद्धविराम औपचारिक रूप से अक्टूबर 2022 में समाप्त हो चुका है।

यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने 10 अगस्त 2026 को गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि हूती समूह द्वारा लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा पर किए गए ताज़ा हमले यमन को एक बार फिर बड़े पैमाने के सशस्त्र संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सैन्य गतिविधि अप्रैल 2022 के संयुक्त राष्ट्र-मध्यस्थ युद्धविराम के बाद से अब तक की सबसे तीव्र है।

मोचा पर हमले: क्या हुआ

रविवार को हूती विद्रोहियों ने यमन सरकार के नियंत्रण वाले मोचा बंदरगाह और पश्चिमी तट के अन्य इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए। एक स्थानीय चिकित्सा सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत में इन हमलों में चार आम नागरिक और चार सरकारी सैनिक मारे गए, जबकि करीब 32 लोग घायल हो गए।

बंदरगाह के निदेशक अब्दुल मलिक अल-शराबी ने एक प्रेस बयान में बताया कि हूती विद्रोहियों ने इस सुविधा पर दर्जनों ड्रोन दागे, जिनमें से लगभग 25 ने आर्थिक प्रतिष्ठानों, कर्मचारी आवास और एक कस्टम हैंगर को सीधे निशाना बनाया।

बुनियादी ढाँचे को नुकसान

यमन के परिवहन मंत्रालय ने पुष्टि की कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे को गंभीर क्षति पहुँची है। मंत्रालय ने सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भूमि सीमा पारगमन बिंदुओं पर तैयारियाँ बढ़ा दी हैं और आपातकालीन उपायों को और मज़बूत किया है।

यूएन दूत की अपील

विशेष दूत ग्रंडबर्ग ने अपने बयान में कहा कि मोचा पर हुए हमलों में कथित तौर पर आम नागरिकों और सैन्यकर्मियों दोनों की जानें गई हैं और बंदरगाह समेत शहर के बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, 2022 के युद्धविराम के बाद कायम हुई सापेक्षिक शांति को बनाए रखने और तनाव घटाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के साथ मिलकर ठोस कदम उठाने की अपील की।

यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि

यमन 2014 के अंत से गृहयुद्ध की चपेट में है, जब हूती विद्रोहियों ने उत्तरी यमन के बड़े हिस्से — जिसमें राजधानी सना भी शामिल है — पर कब्ज़ा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।

संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से अप्रैल 2022 में युद्धविराम लागू हुआ, जो उसी साल अक्टूबर में बिना औपचारिक विस्तार के समाप्त हो गया। हालाँकि उसके बाद भी एक नाज़ुक संघर्षविराम काफी हद तक बना रहा और बड़े पैमाने की शत्रुता में उल्लेखनीय कमी आई थी — जो हाल के ताज़ा तनाव बढ़ने तक जारी रही।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में व्यापक क्षेत्रीय तनाव पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि मोचा बंदरगाह यमन की अर्थव्यवस्था और मानवीय सहायता आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र के दूत की चेतावनी के बाद अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि क्या दोनों पक्ष संवाद की राह चुनते हैं या टकराव और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब संयुक्त राष्ट्र ने यमन में तनाव बढ़ने पर अलार्म बजाया हो — और हर बार बड़े पैमाने की वापसी टल गई। असली सवाल यह है कि क्या इस बार मोचा पर हमला किसी व्यापक रणनीतिक बदलाव का संकेत है या सिर्फ दबाव की रणनीति। 2022 के युद्धविराम की नाज़ुक प्रकृति यह भी उजागर करती है कि बिना औपचारिक समझौते के टिकाऊ शांति कितनी कमज़ोर होती है। मोचा जैसे आर्थिक और मानवीय आपूर्ति के केंद्रों पर हमले दर्शाते हैं कि संघर्ष का अगला चरण केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक गला घोंटने की रणनीति पर भी टिका हो सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने यमन को लेकर क्या चेतावनी दी है?
हैंस ग्रंडबर्ग ने चेताया है कि मोचा बंदरगाह पर हूती हमलों के बाद सैन्य गतिविधि अप्रैल 2022 के युद्धविराम के बाद से सबसे तेज़ हो गई है और यमन बड़े पैमाने के संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव घटाने की अपील की है।
मोचा पर हूती हमले में कितने लोग मारे गए?
स्थानीय चिकित्सा सूत्रों के अनुसार मोचा और आसपास के इलाकों में हूती हमलों में कम से कम 8 लोग मारे गए — जिनमें चार आम नागरिक और चार सरकारी सैनिक शामिल हैं — और करीब 32 लोग घायल हुए।
यमन में 2022 का युद्धविराम क्या था और अब उसकी स्थिति क्या है?
अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से यमन में युद्धविराम लागू हुआ था, जो अक्टूबर 2022 में बिना औपचारिक विस्तार के समाप्त हो गया। इसके बावजूद एक नाज़ुक संघर्षविराम काफी हद तक बना रहा, लेकिन हाल के हमलों ने इसे गंभीर खतरे में डाल दिया है।
मोचा बंदरगाह पर हमले का क्या असर पड़ा?
यमन के परिवहन मंत्रालय के अनुसार बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे को गंभीर नुकसान पहुँचा है। बंदरगाह निदेशक के मुताबिक लगभग 25 ड्रोन ने आर्थिक प्रतिष्ठानों, कर्मचारी आवास और एक कस्टम हैंगर को निशाना बनाया।
यमन में संघर्ष की शुरुआत कब और कैसे हुई?
यमन 2014 के अंत से गृहयुद्ध में है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।
राष्ट्र प्रेस
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