हूतियों की सऊदी बंदरगाहों पर नाकेबंदी: अंतरराष्ट्रीय जहाजों को हमले की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
यमन के हूती विद्रोहियों ने 21 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को कड़ी चेतावनी जारी की है कि सऊदी अरब के बंदरगाहों पर माल लादने या उतारने वाले किसी भी जहाज को सैन्य कार्रवाई का निशाना बनाया जा सकता है। यह चेतावनी हूतियों द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ औपचारिक समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आई, जिसने लाल सागर क्षेत्र में समुद्री व्यापार को लेकर नई आशंकाएँ पैदा कर दी हैं।
चेतावनी का स्वरूप और दायरा
सना स्थित हूती समूह के 'ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस कोऑर्डिनेशन सेंटर' की ओर से शिपिंग कंपनियों को भेजे गए एक ईमेल में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध केवल सऊदी झंडे वाले जहाजों तक सीमित नहीं है। इटली की समाचार एजेंसी एडनक्रोनोस की रिपोर्टों के अनुसार, ईमेल में कहा गया है कि सऊदी बंदरगाहों से जुड़े किसी भी व्यापारिक अभियान में शामिल जहाज — चाहे उनका झंडा किसी भी देश का हो — हूतियों की मारक क्षमता के दायरे में आने पर हमले का सामना कर सकते हैं। शिपिंग कंपनियों से ऐसे किसी भी सफर की योजना बनाते समय पूरी सावधानी बरतने को कहा गया है।
तनाव की जड़: सना हवाई अड्डे का विवाद
यह घटनाक्रम हूतियों और सऊदी अरब के बीच हाल ही में फिर से भड़के तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। 13 जुलाई को सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने दावा किया था कि उसने सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर हमला किया, ताकि ईरान से लौट रहा एक विमान वहाँ उतर न सके। बताया गया कि उस विमान में हूती नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल था, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन पर आयोजित अंतिम संस्कार से वापस आ रहा था। हूतियों ने इस हमले की जिम्मेदारी सऊदी अरब पर डाली और जवाब में मिसाइलों तथा ड्रोन से सऊदी ठिकानों पर हमले किए।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
कुवैत और कतर समेत कई क्षेत्रीय देशों ने हूतियों की इस नाकेबंदी की घोषणा को खारिज करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता का समर्थन दोहराया है। फिलहाल इन नए ऐलानों के बाद किसी भी व्यापारिक जहाज पर हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
लाल सागर पर व्यापक असर
गौरतलब है कि हूती इससे पहले भी गाजा युद्ध के दौरान इजराइल और अमेरिका से संबद्ध होने का आरोप लगाकर दर्जनों जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हथियारों से हमले कर चुके हैं। इन हमलों की वजह से कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों को लाल सागर का मार्ग छोड़कर लंबे वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़े — जबकि लाल सागर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक है। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव बना हुआ है।
यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन 2014 के अंत से गृहयुद्ध की चपेट में है, जब हूतियों ने राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्से के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से शुरू हुई तनाव कम करने की कोशिशें अब इन ताजा घटनाओं के मद्देनजर खतरे में पड़ती दिख रही हैं। आने वाले दिनों में शिपिंग उद्योग और क्षेत्रीय कूटनीति दोनों पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।