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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सपा और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग दोहराई

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सपा और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग दोहराई

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विपक्ष एकजुट है — सपा, कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) सभी एसआईटी को अपर्याप्त मान रहे हैं। सपा ने एसआईटी भंग कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग की है। संजय राउत ने बड़े नामों पर सवाल उठाए, जो अभी तक एसआईटी रिपोर्ट से बाहर हैं।

मुख्य बातें

सपा नेता आशुतोष वर्मा ने 9 जुलाई को एसआईटी भंग कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग की।
एसआईटी रिपोर्ट में कथित तौर पर 70 बार चोरी का उल्लेख है — कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा के अनुसार।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग की।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि चंपत राय , गोपाल राव और अनिल मिश्रा के नाम एसआईटी रिपोर्ट में शामिल नहीं।
राउत ने दावा किया कि चढ़ावे की राशि पुणे, दिल्ली, नोएडा और अयोध्या में संपत्तियों में लगाई गई — आरोप स्वतंत्र रूप से असत्यापित।

समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग एक बार फिर बुलंद की है। 9 जुलाई को लखनऊ में सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा कि मौजूदा एसआईटी जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती, क्योंकि जाँच अधिकारी उसी राज्य सरकार के कर्मचारी हैं जिस पर आरोप हैं।

सपा का रुख: एसआईटी भंग करो, सीबीआई लाओ

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने स्पष्ट किया कि अयोध्या के सांसद समाजवादी पार्टी से हैं और उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते यह उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा, 'जब मामले की जांच करने वाले अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी हैं, जबकि आरोप भी राज्य सरकार के खिलाफ हैं, तो वह निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है?' वर्मा ने माँग की कि एसआईटी को भंग कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए।

उन्होंने इस मामले को केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। उनके अनुसार, 'यह उस बात की चोरी है जिस पर भाजपा की नींव रखी गई थी।'

कांग्रेस की सामूहिक आवाज़

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे पर पोस्ट किया है और चढ़ावे की चोरी को गंभीर मामला बताया है। सिन्हा ने कहा कि सवाल यह नहीं कि कौन पोस्ट कर रहा है, बल्कि यह है कि इस घटना को किस तरह दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट में कथित तौर पर 70 बार चोरी होने का उल्लेख है।

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा कि पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग की है। वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्य समिति सदस्य शक्ति सिंह गोहिल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यही माँग दोहराई।

शिवसेना (यूबीटी) का आरोप: 'असली धोखेबाज़ बाहर हैं'

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि एसआईटी की रिपोर्ट में चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के नाम तक शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जांच में केवल 'छोटी मछलियाँ' पकड़ी गई हैं, जबकि असली जिम्मेदार अभी भी बाहर हैं। राउत ने दावा किया कि रिकॉर्ड पर यह मौजूद है कि चढ़ावे की राशि का उपयोग पुणे, दिल्ली, नोएडा और अयोध्या में संपत्तियाँ खरीदने में हुआ। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री के बयान पर असहमति

सपा प्रवक्ता वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान से असहमति जताते हुए एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के अधीन काम करने वाली एजेंसी उसी सरकार के खिलाफ आरोपों की जांच नहीं कर सकती।

आगे क्या

विपक्षी दलों की एकजुट माँग के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार इस पर क्या रुख अपनाती हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दायर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गूंजता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की लड़ाई बन चुका है। एसआईटी की निष्पक्षता पर उठे सवाल वैध हैं: जब जाँच एजेंसी और आरोपी दोनों एक ही सरकार की छत्रछाया में हों, तो स्वतंत्र जांच की माँग स्वाभाविक है। हालाँकि, विपक्ष के कुछ आरोप — जैसे संपत्तियों में पैसे लगाने के दावे — अभी तक न्यायिक या स्वतंत्र जांच से सिद्ध नहीं हुए हैं, जो उनकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है। असली परीक्षा यह है कि क्या सत्तापक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की अनुमति देता है — या यह मामला राजनीतिक बयानबाज़ी में ही दफन हो जाता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी से जुड़ा है। एसआईटी की रिपोर्ट में कथित तौर पर 70 बार चोरी का उल्लेख है, और इस मामले में कुछ गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं।
विपक्ष एसआईटी जांच पर सवाल क्यों उठा रहा है?
सपा का तर्क है कि एसआईटी के अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी हैं, जबकि आरोप उसी सरकार पर हैं — इसलिए निष्पक्ष जांच संभव नहीं। विपक्ष का मानना है कि केवल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच ही इस मामले में न्याय दिला सकती है।
कांग्रेस ने इस मामले पर क्या कदम उठाए हैं?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग की है। वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यही माँग दोहराई, और राहुल गांधी ने भी एक्स पर इस मुद्दे पर पोस्ट किया है।
संजय राउत ने किन नामों पर सवाल उठाए हैं?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के नाम एसआईटी रिपोर्ट में शामिल नहीं हैं। उनके अनुसार जांच में केवल छोटे कर्मचारी पकड़े गए हैं, जबकि बड़े जिम्मेदार बाहर हैं — हालाँकि ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
विपक्षी दलों की एकजुट माँग के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने की संभावना बनी हुई है। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं है, और यह मामला संसद सत्र में भी गूँजने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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