राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सपा और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की माँग एक बार फिर बुलंद की है। 9 जुलाई को लखनऊ में सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा कि मौजूदा एसआईटी जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती, क्योंकि जाँच अधिकारी उसी राज्य सरकार के कर्मचारी हैं जिस पर आरोप हैं।
सपा का रुख: एसआईटी भंग करो, सीबीआई लाओ
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने स्पष्ट किया कि अयोध्या के सांसद समाजवादी पार्टी से हैं और उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते यह उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा, 'जब मामले की जांच करने वाले अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी हैं, जबकि आरोप भी राज्य सरकार के खिलाफ हैं, तो वह निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है?' वर्मा ने माँग की कि एसआईटी को भंग कर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए।
उन्होंने इस मामले को केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। उनके अनुसार, 'यह उस बात की चोरी है जिस पर भाजपा की नींव रखी गई थी।'
कांग्रेस की सामूहिक आवाज़
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे पर पोस्ट किया है और चढ़ावे की चोरी को गंभीर मामला बताया है। सिन्हा ने कहा कि सवाल यह नहीं कि कौन पोस्ट कर रहा है, बल्कि यह है कि इस घटना को किस तरह दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट में कथित तौर पर 70 बार चोरी होने का उल्लेख है।
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा कि पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की माँग की है। वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्य समिति सदस्य शक्ति सिंह गोहिल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यही माँग दोहराई।
शिवसेना (यूबीटी) का आरोप: 'असली धोखेबाज़ बाहर हैं'
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि एसआईटी की रिपोर्ट में चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के नाम तक शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जांच में केवल 'छोटी मछलियाँ' पकड़ी गई हैं, जबकि असली जिम्मेदार अभी भी बाहर हैं। राउत ने दावा किया कि रिकॉर्ड पर यह मौजूद है कि चढ़ावे की राशि का उपयोग पुणे, दिल्ली, नोएडा और अयोध्या में संपत्तियाँ खरीदने में हुआ। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री के बयान पर असहमति
सपा प्रवक्ता वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान से असहमति जताते हुए एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के अधीन काम करने वाली एजेंसी उसी सरकार के खिलाफ आरोपों की जांच नहीं कर सकती।
आगे क्या
विपक्षी दलों की एकजुट माँग के बाद यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार इस पर क्या रुख अपनाती हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दायर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गूंजता रहेगा।