राम मंदिर चढ़ावा विवाद: एसआईटी ने सौंपी शुरुआती रिपोर्ट, संत समाज ने की दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दानपात्रों से चढ़ावा चोरी के प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद देशभर के संत समाज और धार्मिक नेताओं ने जांच प्रक्रिया पर विश्वास जताते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित इस एसआईटी से संत समाज को पूरी उम्मीद है कि सच्चाई शीघ्र जनता के सामने आएगी।
संतों की प्रतिक्रिया: जांच पर भरोसा, पारदर्शिता की माँग
अयोध्या के महंत सीताराम दास ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट पूरी तरह पारदर्शी है। उनके अनुसार, संत समाज को पहले से ही विश्वास था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित जांच टीम निष्पक्ष तरीके से काम करेगी और पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाएगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट ने इस विश्वास को और मजबूत किया है।
आर्य संत वरुण दास ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने शुरुआत से ही जनता और संत समाज से धैर्य बनाए रखने की अपील की थी तथा भरोसा दिलाया था कि सच्चाई शीघ्र सामने लाई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद लोगों के मन में उठ रहे कई सवालों का समाधान हुआ है।
आचार्य सतीश महाराज: भ्रष्टाचार के विरुद्ध संत समाज एकजुट
नोएडा से सद्गुरु आचार्य सतीश महाराज ने चढ़ावा विवाद की एसआईटी जांच पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों और हिंदुओं की आस्था, समर्पण और 500 वर्षों के संघर्ष का प्रतीक है। देशभर के श्रद्धालुओं ने एक-एक पैसा जोड़कर मंदिर निर्माण में योगदान दिया है।
आचार्य सतीश महाराज ने स्पष्ट कहा कि यदि चंदे से जुड़े किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक है, और संत समाज ऐसे किसी भी कृत्य का पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए गए और एसआईटी का गठन किया गया।
विपक्षी दलों की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग अतीत में रामभक्तों के विरुद्ध खड़े रहे हैं, उन्हें इस विषय पर टिप्पणी करने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सदियों पुराने संघर्ष को राम मंदिर निर्माण के रूप में साकार किया है।
ईश्वर दास महाराज: राजनीतिक दुरुपयोग पर चेतावनी
ऋषिकेश से अखिल भारतीय संत समिति के महामंडलेश्वर एवं राष्ट्रीय सचिव ईश्वर दास महाराज ने लोगों से एसआईटी जांच पर भरोसा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं तथा सनातन समाज को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।
ईश्वर दास महाराज ने स्वीकार किया कि मंदिर के दानपात्रों में कथित चोरी की बात सामने आई है, लेकिन निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए कुछ राजनीतिक ताकतें हिंदू समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही हैं।
योगानंद गिरी महाराज: हाईकोर्ट तक पहुँचा मामला, संत समाज व्यथित
मिर्जापुर के श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अष्टकौशल महंत डॉ. योगानंद गिरी महाराज ने कहा कि श्रीराम मंदिर के दानपात्रों से धन और आभूषणों की कथित चोरी से भगवान में आस्था रखने वाले भक्तों में असंतोष व्याप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट तक पहुँच चुका है और अब फैसले का इंतजार है। उनके अनुसार, इस कथित डकैती को लेकर संत समाज अत्यंत व्यथित है और एफआईआर दर्ज कर जांच जारी रहनी चाहिए।
आगे क्या होगा
एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद अब आगे की जांच और संभावित गिरफ्तारियों पर सभी की नजरें टिकी हैं। मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है, जिससे न्यायिक निगरानी भी सुनिश्चित है। संत समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए — चाहे वह किसी भी पद या पृष्ठभूमि का हो।