एलेकॉन इंजीनियरिंग का Q1 FY27 मुनाफा 60% गिरा, ₹70.4 करोड़ पर; मार्जिन दबाव से शेयर 6% फिसला
सारांश
मुख्य बातें
एलेकॉन इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 60 प्रतिशत गिरकर ₹70.4 करोड़ रह गया, जो एक वर्ष पूर्व की समान तिमाही में ₹175 करोड़ था। बढ़ती परिचालन लागत के कारण मार्जिन में तीखी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया और शेयर इंट्राडे में करीब 6 प्रतिशत तक लुढ़क गया।
तिमाही नतीजों का विवरण
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का शुद्ध लाभ 75.5 प्रतिशत की तीव्र गिरावट के साथ ₹58.57 करोड़ रह गया, जबकि एक साल पहले यह ₹238.92 करोड़ था। राजस्व के मोर्चे पर हालाँकि कुछ राहत रही — ऑपरेशंस से राजस्व 6.11 प्रतिशत बढ़कर ₹521 करोड़ पहुँचा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में ₹491 करोड़ था। कुल आय भी 4.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹542.47 करोड़ दर्ज हुई।
मार्जिन पर दबाव
परिचालन स्तर पर कंपनी का EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय) 16.3 प्रतिशत घटकर ₹109 करोड़ रह गया, जो एक वर्ष पूर्व ₹130 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी 26.6 प्रतिशत से घटकर 21 प्रतिशत पर आ गया। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि राजस्व वृद्धि के बावजूद बढ़ती परिचालन लागत ने मुनाफे को बुरी तरह प्रभावित किया।
शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया
तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद शुक्रवार के कारोबारी सत्र में एलेकॉन के शेयर करीब 6 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹482.30 के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुँच गए। हालाँकि बाज़ार बंद होने तक स्टॉक संभलकर 0.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹510 पर ट्रेड करता दिखा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आँकड़ों के अनुसार, शेयर पिछले 52 सप्ताह में ₹682.90 के उच्चतम और ₹352 के निचले स्तर के बीच रहा है।
दीर्घकालिक प्रदर्शन
चालू वर्ष में शेयर ने करीब 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है, परंतु पिछले 12 महीनों में इसमें 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। यह ऐसे समय में आया है जब औद्योगिक इंजीनियरिंग क्षेत्र में कच्चे माल की लागत और ऊर्जा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
डिविडेंड की घोषणा
कंपनी के निदेशक मंडल ने ₹1 अंकित मूल्य (फेस वैल्यू) वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹1.50 प्रति शेयर अंतिम डिविडेंड देने की सिफारिश की है। आगामी तिमाहियों में मार्जिन सुधार और लागत नियंत्रण के उपायों पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी।