10 जुलाई 2026
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जेपी नड्डा ने ABDM की तीसरी MSG बैठक की अध्यक्षता की, 93.95 करोड़ ABHA नंबर और डिजिटल हेल्थ विस्तार की समीक्षा

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जेपी नड्डा ने ABDM की तीसरी MSG बैठक की अध्यक्षता की, 93.95 करोड़ ABHA नंबर और डिजिटल हेल्थ विस्तार की समीक्षा

सारांश

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की तीसरी MSG बैठक में 93.95 करोड़ ABHA नंबर और 105 करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की उपलब्धि सामने आई। नड्डा ने AI और इंटरऑपरेबिलिटी को मिशन के अगले चरण की धुरी बताया — यह 'विकसित भारत 2047' की स्वास्थ्य नींव है।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा ने 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में ABDM की तीसरी MSG बैठक की अध्यक्षता की।
देशभर में 93.95 करोड़ ABHA नंबर तैयार और 105 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटली लिंक।
राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री में 5.33 लाख संस्थान और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत।
2.72 लाख संस्थानों ने ABDM-समर्थित सॉफ्टवेयर अपनाया; लगभग 24 करोड़ 'स्कैन एंड रजिस्टर' टोकन जारी।
भविष्य की रणनीति में AI , डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स और राज्यों के साथ समन्वय पर विशेष ज़ोर।
नड्डा ने ABDM को 'विकसित भारत 2047' के स्वास्थ्य लक्ष्य का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की तीसरी मिशन संचालन समूह (MSG) बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देशभर के डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचे की प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई और मिशन के अगले चरण की रणनीति तय की गई। अब तक देशभर में 93.95 करोड़ से अधिक ABHA नंबर तैयार हो चुके हैं और 105 करोड़ से ज़्यादा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए जा चुके हैं।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, अनुप्रिया पटेल और जितिन प्रसाद ने भाग लिया। इसके अलावा नीति आयोग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), आयुष मंत्रालय तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

ABDM की प्रमुख उपलब्धियाँ

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अब दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक बन चुका है। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री में 5.33 लाख स्वास्थ्य संस्थान और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हो चुके हैं। 2.72 लाख स्वास्थ्य संस्थानों ने ABDM-समर्थित सॉफ्टवेयर अपना लिया है। अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण को तेज़ और सुगम बनाने के लिए लगभग 24 करोड़ 'स्कैन एंड रजिस्टर' टोकन जारी किए गए हैं।

नड्डा का ज़ोर — समावेशी और नागरिक-केंद्रित तकनीक

बैठक को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर अब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक नागरिक को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुँच उपलब्ध कराना ABDM का प्रमुख उद्देश्य है।' नड्डा के अनुसार, तकनीक 'यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज' के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बशर्ते वह समावेशी, सुलभ और उपयोग में आसान हो।

एकीकरण और भविष्य की रणनीति

MSG ने आयुष्मान भारत PM-JAY, CGHS, ESIC और निक्षय जैसी प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के साथ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के बेहतर एकीकरण पर संतोष व्यक्त किया। 'मॉडल डिस्ट्रिक्ट', 'मॉडल फैसिलिटी' और 'आरोग्य सेतु 2.0' जैसी पहलों की सराहना की गई। भविष्य की रणनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग, डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स को बढ़ावा देना, इंटरऑपरेबिलिटी को सुदृढ़ करना और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाना शामिल रहा।

आगे की राह — 'विकसित भारत 2047' का स्वास्थ्य स्तंभ

समापन संबोधन में नड्डा ने कहा कि ABDM के तहत मज़बूत डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचा तैयार हो चुका है, लेकिन अब इसका व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की आधारशिला बताते हुए केंद्र, राज्यों और सभी संबंधित पक्षों से मिलकर प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित, सरल और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने का आह्वान किया। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को डिजिटल रूप से एकीकृत करने की दिशा में वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये रिकॉर्ड वास्तविक नैदानिक निर्णयों में कितने उपयोगी साबित हो रहे हैं। पंजीकरण और सक्रिय उपयोग के बीच की खाई — जो भारत की कई डिजिटल योजनाओं में देखी गई है — अभी स्पष्ट नहीं है। निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की भागीदारी बढ़ाने और AI एकीकरण की बात तो हुई, पर इसके लिए कोई समयसीमा या जवाबदेही ढाँचा सामने नहीं आया। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य से जोड़ना राजनीतिक दृष्टि से प्रभावी है, पर डिजिटल साक्षरता और ग्रामीण कनेक्टिविटी की बाधाओं को दूर किए बिना यह मिशन शहरी-केंद्रित ही रह सकता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की तीसरी MSG बैठक में क्या हुआ?
10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ABDM की प्रगति की समीक्षा की और मिशन के अगले चरण की रणनीति तय की। बैठक में 93.95 करोड़ ABHA नंबर और 105 करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की उपलब्धि सामने आई।
ABHA नंबर क्या है और इसका क्या महत्व है?
ABHA (Ayushman Bharat Health Account) नंबर एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या है, जो प्रत्येक नागरिक को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुँच देती है। अब तक देशभर में 93.95 करोड़ से अधिक ABHA नंबर बनाए जा चुके हैं।
ABDM के तहत कितने स्वास्थ्य संस्थान और पेशेवर पंजीकृत हैं?
राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री में 5.33 लाख स्वास्थ्य संस्थान और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा 2.72 लाख संस्थानों ने ABDM-समर्थित सॉफ्टवेयर अपनाया है।
ABDM के अगले चरण में क्या प्राथमिकताएँ हैं?
अगले चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स को बढ़ावा, इंटरऑपरेबिलिटी को मज़बूत करना और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं। नड्डा ने मिशन के व्यापक उपयोग को सबसे बड़ी ज़रूरत बताया।
ABDM किन प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा है?
ABDM अब आयुष्मान भारत PM-JAY, CGHS, ESIC और निक्षय जैसी प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक तेज़, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित बन रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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