15 जुलाई 2026
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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: 90 करोड़ आभा अकाउंट का मील का पत्थर, उत्तर प्रदेश में 15.3 करोड़ के साथ शीर्ष पर

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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: 90 करोड़ आभा अकाउंट का मील का पत्थर, उत्तर प्रदेश में 15.3 करोड़ के साथ शीर्ष पर

सारांश

भारत की डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति ने एक नया मुकाम हासिल किया — 90 करोड़ आभा अकाउंट। उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ अकाउंट के साथ सबसे आगे है और लगभग आधे अकाउंट महिलाओं के नाम, जो ग्रामीण स्वास्थ्य पहुँच में बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने 30 मई 2026 तक देशभर में 90 करोड़ आभा अकाउंट बनाने का मील का पत्थर पार किया।
उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ अकाउंट के साथ देश में शीर्ष पर; राजस्थान और महाराष्ट्र प्रत्येक में 7.1 करोड़ ।
कुल आभा धारकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 49.75% , जो डिजिटल स्वास्थ्य में महिला भागीदारी का महत्त्वपूर्ण संकेत।
आभा की संख्या 2021 के 14.7 करोड़ से बढ़कर 2026 में 90 करोड़ से अधिक हो गई।
अंडमान और निकोबार , लद्दाख , लक्षद्वीप और दादरा-नगर हवेली ने अपने निर्धारित लक्ष्य पूरी तरह हासिल किए।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने देशभर में 90 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने का ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने 30 मई 2026 को यह जानकारी दी। यह उपलब्धि भारत की डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार में एक निर्णायक पड़ाव मानी जा रही है।

राज्यवार प्रदर्शन: उत्तर प्रदेश सबसे आगे

उत्तर प्रदेश ने 15.3 करोड़ से अधिक आभा अकाउंट बनाकर देश में पहला स्थान हासिल किया है। राजस्थान और महाराष्ट्र प्रत्येक में 7.1 करोड़ अकाउंट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। बिहार में 6.3 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 5.9 करोड़ अकाउंट दर्ज किए गए हैं।

मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख, लक्षद्वीप, तथा दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव ने अपने निर्धारित लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिए हैं।

वर्षवार वृद्धि का क्रम

स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, आभा अकाउंट बनाने की रफ्तार में लगातार तेजी आई है। 2021 में कुल 14.7 करोड़ अकाउंट बने थे, जो 2022 में दोगुने से अधिक होकर 30.4 करोड़ हो गए। 2023 में यह संख्या 50.6 करोड़, 2024 में 72.2 करोड़ और 2025 में 84.5 करोड़ तक पहुँची। 2026 में यह आँकड़ा 90 करोड़ के पार निकल गया।

गौरतलब है कि यह वृद्धि केवल तकनीकी पंजीकरण नहीं है — यह ऐसे समय में आई है जब भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर चुका है।

महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका

बनाए गए कुल आभा अकाउंट में से लगभग आधे महिलाओं के नाम पर हैं — सटीक आँकड़ा 49.75 प्रतिशत है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित डिजिटल पहुँच देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। आभा के माध्यम से मातृ एवं शिशु देखभाल, टीकाकरण और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की जा सकती है।

NHA प्रमुख की प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्णवाल ने कहा, '90 करोड़ से ज्यादा आभा का बनना, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में नागरिकों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और इकोसिस्टम से जुड़े साथियों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि आभा नागरिकों को उनकी स्वास्थ्य जानकारी तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुँच देकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

डॉ. बर्णवाल के अनुसार, जैसे-जैसे ABDM को अपनाने का चलन गहराएगा, आभा कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करेगा और एक अधिक पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को बढ़ावा देगा।

नागरिकों के लिए व्यावहारिक लाभ

आभा अलग-अलग स्वास्थ्य सुविधाओं और ऐप्लिकेशन में बने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटली एकीकृत करता है। इससे नागरिकों को बार-बार कागजी दस्तावेज साथ ले जाने की आवश्यकता कम होती है और वे अपनी सहमति से किसी भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ अपनी जानकारी सुरक्षित रूप से साझा कर सकते हैं। आगे चलकर यह प्रणाली इलाज की निरंतरता, बेहतर निदान और स्वास्थ्य सेवाओं के समान वितरण में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने सक्रिय रूप से उपयोग में हैं और कितने केवल पंजीकरण तक सीमित हैं। पंजीकरण और वास्तविक उपयोग के बीच की खाई — जो भारत की कई डिजिटल कल्याण योजनाओं में देखी गई है — यहाँ भी एक अनुत्तरित प्रश्न बनी हुई है। महिलाओं की 49.75% भागीदारी उत्साहजनक है, पर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच और डिजिटल साक्षरता की सीमाएँ इस उपलब्धि की गहराई को परखती हैं। जब तक आभा अकाउंट वास्तविक स्वास्थ्य सेवा परिणामों — जैसे समय पर निदान, इलाज की निरंतरता और बीमा दावों — से नहीं जुड़ते, यह मील का पत्थर संख्यात्मक उपलब्धि से आगे नहीं जा पाएगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) क्या है?
आभा एक 14-अंकीय विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान संख्या है जो नागरिकों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एकीकृत करती है। यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जारी की जाती है और नागरिक अपनी सहमति से किसी भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ अपने रिकॉर्ड साझा कर सकते हैं।
90 करोड़ आभा अकाउंट का मील का पत्थर कब पार हुआ?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 30 मई 2026 को यह जानकारी दी कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने देशभर में 90 करोड़ आभा अकाउंट बनाने का लक्ष्य पार कर लिया है। यह संख्या 2021 में 14.7 करोड़ से शुरू होकर पाँच वर्षों में इस स्तर तक पहुँची है।
कौन-सा राज्य सबसे अधिक आभा अकाउंट बनाने में आगे है?
उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ से अधिक आभा अकाउंट के साथ देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र प्रत्येक में 7.1 करोड़, बिहार में 6.3 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 5.9 करोड़ अकाउंट हैं।
आभा से महिलाओं को क्या फायदा होगा?
कुल आभा अकाउंट में से 49.75 प्रतिशत महिलाओं के नाम पर हैं। आभा के जरिए महिलाएँ — खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में — अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित डिजिटल पहुँच पा सकती हैं और मातृ-शिशु देखभाल व टीकाकरण जैसी सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित कर सकती हैं।
आभा अकाउंट से नागरिकों को रोजमर्रा में क्या सुविधा मिलती है?
आभा अलग-अलग अस्पतालों और स्वास्थ्य ऐप्लिकेशन में बने रिकॉर्ड को एक जगह डिजिटली जोड़ता है, जिससे बार-बार कागजी दस्तावेज साथ ले जाने की जरूरत खत्म होती है। नागरिक अपनी सहमति से डॉक्टर या अस्पताल के साथ अपनी स्वास्थ्य जानकारी तुरंत और सुरक्षित रूप से साझा कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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