केरल: चुनावी हार के बाद सीपीआई-एम में दरारें, सेंट्रल कमेटी की बैठक में होगा बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सीपीआई-एम की सेंट्रल कमेटी शनिवार, 12 जुलाई 2026 को तिरुवनंतपुरम में बैठक कर रही है — केरल विधानसभा चुनाव में मिली उस करारी हार के बाद, जिसने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का करीब एक दशक का शासन समाप्त कर दिया। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी के भीतर असहमति का सार्वजनिक प्रदर्शन — जो इस अनुशासित वाम दल के लिए असामान्य है — तेज़ होता जा रहा है।
कन्नूर विवाद ने खोली दरारें
ताज़ा विवाद कन्नूर से आया है — जो सीपीआई-एम का पारंपरिक वैचारिक गढ़ माना जाता है। एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का नेतृत्व करने वाली आईएएस अधिकारी दिव्या एस. अय्यर के तबादले को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं। नेतृत्व के एक धड़े ने उनके ट्रांसफर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए, जबकि वरिष्ठ नेताओं ई.पी. जयराजन, पी.के. श्रीमती और के.के. शैलजा ने इस विवाद को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए कहा कि नई सरकार के गठन के बाद इस तरह के तबादले सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
गौरतलब है कि इन वरिष्ठ नेताओं का इस तरह खुलकर अलग-अलग रुख अपनाना उस पार्टी के लिए असाधारण है, जो दशकों से 'बंद दरवाज़ों के पीछे' मतभेद सुलझाने की परंपरा पर चलती रही है।
राजधानी ज़िले में भी बेचैनी
तिरुवनंतपुरम ज़िला सचिव एवं विधायक वी. जॉय ने शुक्रवार को पार्टी की कैपिटल डिस्ट्रिक्ट यूनिट में मतभेदों की खबरों को कम करने की कोशिश करते हुए कहा कि नेतृत्व में कोई असहमति नहीं है। हालाँकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार उनके इस स्पष्टीकरण से अटकलों पर कोई खास असर नहीं पड़ा — नाराज़गी उससे कहीं अधिक गहरी मानी जा रही है।
संगठनात्मक समीक्षा में उठे तीखे सवाल
चुनावी हार के तुरंत बाद सीपीआई-एम के महासचिव एम.ए. बेबी ने पार्टी सदस्यों से आग्रह किया था कि वे संगठनात्मक समीक्षा बैठकों में बिना किसी डर या झिझक के नेतृत्व की आलोचना सामने रखें। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार उन बैठकों में हाल के वर्षों की सबसे तीखी आलोचना हुई — कई नेताओं ने खुलकर पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के कामकाज पर सवाल उठाए।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में पार्टी को दशकों में सबसे बुरे चुनावी झटके का सामना करना पड़ा है। फिर भी, इस तीखी आलोचना के बावजूद, केंद्रीय नेतृत्व ने विजयन और गोविंदन दोनों पर अपना भरोसा बनाए रखा है।
सेंट्रल कमेटी की बैठक से क्या उम्मीदें
शनिवार से शुरू होने वाली सेंट्रल कमेटी की बातचीत में मुख्य रूप से चुनावी हार के कारणों और केरल में पार्टी के पुनरुद्धार की रूपरेखा पर फोकस रहने की उम्मीद है। नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है — एक ओर संगठनात्मक एकजुटता बहाल करना, दूसरी ओर राजनीतिक पुनर्निर्माण की ठोस योजना तैयार करना।
कन्नूर से उठे ताज़ा विवाद ने यह सवाल और पुख्ता कर दिया है कि क्या चुनावी हार से संगठन को लगे घाव वाकई भर रहे हैं, या सतह के नीचे तनाव अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में सेंट्रल कमेटी के फैसले यह तय करेंगे कि सीपीआई-एम केरल में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने की दिशा में कितनी गंभीरता से आगे बढ़ती है।