केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) का आत्मचिंतन: पूर्व मंत्री पी. राजीव ने माना — 'एलडीएफ के अलावा और कौन है' नारा बैकफायर हुआ
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की करारी हार के बाद, पूर्व उद्योग मंत्री और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पी. राजीव ने स्वीकार किया है कि पार्टी के कई राजनीतिक आकलन गलत साबित हुए — जिनमें चुनावी नारा 'एलडीएफ के अलावा और कौन है?' भी शामिल है। राजीव के अनुसार, यह नारा मतदाताओं के बीच वह प्रभाव नहीं छोड़ पाया जिसकी पार्टी को उम्मीद थी।
नारे की रणनीतिक विफलता
राजीव ने माना कि 'एलडीएफ के अलावा और कौन है?' नारे ने मतदाताओं के बीच एक उलटी धारणा बनाई। उनके अनुसार, इस नारे ने एलडीएफ की अपील को मजबूत करने के बजाय यह संदेश दिया कि गठबंधन खुद को एकमात्र विकल्प के रूप में थोप रहा है — जो जनता को रास नहीं आया। यह स्वीकारोक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हार के बाद पार्टी के भीतर आत्मचिंतन की शुरुआत को दर्शाती है।
मंत्रियों की हार और संगठनात्मक झटका
दूसरी पिनाराई विजयन सरकार में उद्योग मंत्री रहे राजीव उन 13 मंत्रियों में शामिल थे जो विधानसभा चुनाव में हार गए। यह हार हाल के वर्षों में केरल में वामपंथी खेमे के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक मानी जा रही है। पार्टी को उम्मीद थी कि पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर इतिहास रचेंगे, लेकिन चुनावी नतीजों ने पूरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
वेल्लापल्ली और सबरीमाला — दो और चूक
राजीव ने यह भी माना कि पार्टी एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन के खिलाफ समय रहते कड़ा रुख अपनाने में नाकाम रही और इस मामले को संभालने में चूक हुई। इसी तरह, सबरीमाला में सोने की चोरी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पार्टी को संगठनात्मक तकनीकी बारीकियों में उलझने के बजाय त्वरित कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था।
पुरानी आलोचना फिर सुर्खियों में
राजीव के इन बयानों ने केरल सीपीआई(एम) के खिलाफ पुरानी आलोचना को फिर से हवा दे दी है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी का तरीका यही रहा है — पहले ट्रैक्टर, कंप्यूटर और सेल्फ-फाइनेंसिंग प्रोफेशनल कॉलेजों जैसे मुद्दों का विरोध करो, और जब जमीनी हकीकत बदल जाए तो उन्हें न केवल स्वीकार करो, बल्कि उनके सबसे बड़े समर्थक बन जाओ। राजीव ने खुद इस प्रवृत्ति को स्वीकार करते हुए कहा, 'कंप्यूटर पर बटन दबाने की तरह चीजों को पहले जैसा करना संभव नहीं है।'
आगे की राह
पार्टी अब अपनी रणनीति, संदेश और संगठनात्मक कामकाज पर नए सिरे से विचार करने की प्रक्रिया में है। राजीव के अनुसार, इस चुनावी अनुभव ने पार्टी को भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने का सबक दिया है। यह देखना बाकी है कि क्या यह आत्मचिंतन महज बयानों तक सीमित रहेगा या संगठनात्मक बदलाव के रूप में सामने आएगा।