10 अगस्त 2026
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केरल चुनाव हार: 99 से 35 सीटों पर सिमटे एलडीएफ की आत्ममंथन बैठक अगले महीने

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केरल चुनाव हार: 99 से 35 सीटों पर सिमटे एलडीएफ की आत्ममंथन बैठक अगले महीने

सारांश

99 सीटों से 35 पर आना महज हार नहीं — यह केरल में वाम राजनीति के एक युग के अंत का संकेत है। अब सीपीआई(एम) की राज्य समिति बैठक में असली सवाल यह नहीं कि हार क्यों हुई, बल्कि यह है कि क्या पार्टी विजयन की भूमिका पर बेबाकी से सवाल उठाने की हिम्मत दिखा पाएगी।

मुख्य बातें

एलडीएफ की सीटें केरल विधानसभा में 99 से घटकर 35 रह गईं; यूडीएफ ने सत्ता हासिल की।
पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ लगातार तीसरे कार्यकाल की उम्मीद से चुनाव में उतरा था।
सीपीआई(एम) के तीन वरिष्ठ नेता केवल इसलिए जीते क्योंकि यूडीएफ ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारे; इनमें से दो जीतें कन्नूर से रहीं।
BJP तीन सीटें जीतकर विधानसभा में वापस लौटी, जबकि 2021 में उसका सफाया हो गया था।
अगले महीने सीपीआई(एम) राज्य समिति की तीन दिवसीय बैठक में हार की समीक्षा होगी; विजयन के नेतृत्व पर भी चर्चा संभव।
विजयन खेमा सोशल मीडिया के जरिए वीडी सतीशन सरकार की आलोचना में सक्रिय।

केरल विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की करारी हार के तीन महीने बाद भी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यह समझने में जुटी है कि आखिर कहाँ चूक हो गई। 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में एलडीएफ की सीटें 99 से घटकर महज 35 रह गईं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने सत्ता पर कब्जा किया। अगले महीने होने वाली सीपीआई(एम) की तीन दिवसीय राज्य समिति बैठक में इस हार की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ इस विश्वास के साथ चुनावी मैदान में उतरा था कि इतिहास फिर से लिखा जाएगा और पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में आएगी। लेकिन मतदाताओं ने कहानी पलट दी। उल्लेखनीय है कि 2021 में पूरी तरह सफाया झेलने के बाद इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीन सीटों के साथ विधानसभा में वापसी करने में सफल रही।

अपनों से मिली चोट

सीपीआई(एम) को सबसे गहरी चोट अपने ही राजनीतिक परिदृश्य में मिली। पार्टी के तीन वरिष्ठ नेता अपनी सीटें इसलिए बचा सके क्योंकि यूडीएफ ने उनके खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का रणनीतिक फैसला किया था। इनमें से दो जीतें कन्नूर जिले से आईं — जो विजयन का अपना राजनीतिक गढ़ माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह संकेत देता है कि पार्टी का परंपरागत किला भी अब उतना अभेद्य नहीं रहा।

विजयन की भूमिका पर सवाल

पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट किया है कि आगामी समीक्षा बैठक में विजयन के नेतृत्व को भी दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा। वर्षों तक पार्टी के भीतर विजयन की आलोचना को लगभग वर्जित माना जाता था। आलोचकों का कहना है कि अब पहली बार उनके कार्यकाल और फैसलों पर खुलकर चर्चा की संभावना बन रही है।

विजयन खेमे की रणनीति

हार के बावजूद विजयन का खेमा निष्क्रिय नहीं बैठा है। उनका सोशल मीडिया तंत्र सक्रिय रूप से नई वीडी सतीशन सरकार के हर कदम की आलोचना कर रहा है। बाढ़ राहत, प्रशासनिक चूक और अन्य मुद्दों पर यह भावना फैलाई जा रही है कि 'काश विजयन अभी भी सत्ता में होते।' यह रणनीति पार्टी के भीतर विजयन की प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

क्या होगा आगे

अगले महीने होने वाली सीपीआई(एम) राज्य समिति की तीन दिवसीय बैठक में चुनावी पराजय के हर पहलू की पड़ताल होगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस समीक्षा में विजयन के नेतृत्व का भी निष्पक्ष मूल्यांकन होगा, या पार्टी की आंतरिक राजनीति इसे सीमित कर देगी। इस बैठक के नतीजे केरल में वाम राजनीति की अगली दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे विपक्षी दया के कारण जीते, न कि पार्टी की ताकत से। राज्य समिति बैठक असली परीक्षा होगी — क्या सीपीआई(एम) संगठनात्मक जवाबदेही को व्यक्तिगत वफादारी से ऊपर रख पाएगी? इतिहास बताता है कि वाम दलों में ऐसी आत्मालोचना अक्सर दस्तावेजों तक सीमित रह जाती है और असली सत्ता-संतुलन अछूता रहता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल चुनाव में एलडीएफ को कितनी सीटें मिलीं?
केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में एलडीएफ की सीटें 99 से घटकर 35 रह गईं। यूडीएफ ने यह चुनाव जीतकर सत्ता हासिल की।
सीपीआई(एम) की हार की समीक्षा बैठक कब होगी?
अगले महीने सीपीआई(एम) की तीन दिवसीय राज्य समिति बैठक में चुनावी हार की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में पिनाराई विजयन के नेतृत्व पर भी चर्चा होने की संभावना है।
पिनाराई विजयन की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ को अपेक्षित तीसरा कार्यकाल नहीं मिला और पार्टी ऐतिहासिक हार झेल गई। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने संकेत दिया है कि समीक्षा बैठक में उनके नेतृत्व को भी दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा।
केरल चुनाव में BJP का प्रदर्शन कैसा रहा?
2021 में पूरी तरह सफाया होने के बाद BJP इस बार तीन सीटें जीतकर केरल विधानसभा में वापस लौटी है। यह पार्टी के लिए राज्य में छोटी लेकिन उल्लेखनीय वापसी मानी जा रही है।
एलडीएफ के तीन वरिष्ठ नेता कैसे जीते?
सीपीआई(एम) के तीन वरिष्ठ नेता इसलिए जीत सके क्योंकि यूडीएफ ने उनके खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया था। इनमें से दो जीतें कन्नूर जिले से रहीं, जो पिनाराई विजयन का राजनीतिक गढ़ माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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