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केरल चुनाव में एलडीएफ की ऐतिहासिक हार: सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन में चूक स्वीकारी

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केरल चुनाव में एलडीएफ की ऐतिहासिक हार: सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन में चूक स्वीकारी

सारांश

केरल में एलडीएफ के 35 सीटों पर सिमटने के बाद सीपीआई-एम ने पहली बार उम्मीदवार चयन में चूक स्वीकारी। यह वही पार्टी है जो पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा गँवा चुकी है — अब केरल में भी अस्तित्व की लड़ाई है। सितंबर की बैठक तय करेगी कि यह आत्ममंथन असली बदलाव लाएगा या महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

मुख्य बातें

सीपीआई-एम महासचिव एम.ए.
बेबी ने 14 जुलाई को केरल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चयन की चूक सार्वजनिक रूप से स्वीकार की।
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में एलडीएफ केवल 35 सीटों पर सिमटा — कई दशकों में सबसे खराब प्रदर्शन।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी वाम मोर्चा केरल की 20 में से केवल 1 सीट जीत पाया था।
एलडीएफ के पास 35 विधायक होने से राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक 36 के कोटे से एक कम — राज्यसभा प्रतिनिधित्व भी संकट में।
पार्टी सितंबर में विस्तारित राज्य समिति बैठक बुलाएगी, जिसमें सुधारात्मक कदम तय होंगे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई-एम] के राष्ट्रीय नेतृत्व ने केरल विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की करारी हार के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उम्मीदवारों के चयन में निर्णय संबंधी गंभीर चूक हुई। नई दिल्ली में तीन दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक के बाद मंगलवार, 14 जुलाई को पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी ने यह स्वीकारोक्ति की। 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में एलडीएफ महज 35 सीटों पर सिमट गया, जो कई दशकों में उसका सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है।

महासचिव की स्वीकारोक्ति

पार्टी महासचिव एम.ए. बेबी ने केंद्रीय समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि केरल चुनाव परिणामों की विस्तृत समीक्षा की गई और उम्मीदवारों के चयन में हुई चूक को खुलकर स्वीकार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यवहार में सुधार की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन स्पष्ट किया कि 'हर कॉमरेड का व्यवहार पार्टी पर असर डालता है।'

इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक इस संकेत के रूप में देख रहे हैं कि जवाबदेही केवल संगठनात्मक फैसलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी तय की जाएगी।

हार की पृष्ठभूमि

सीपीआई-एम के लिए यह पतन अचानक नहीं आया। 2024 के लोकसभा चुनाव में केरल की 20 लोकसभा सीटों में से वाम मोर्चा केवल एक सीट जीत पाया था। उस समय पार्टी ने व्यापक संगठनात्मक समीक्षा के बजाय यह दावा किया था कि वह जल्द ही जनता का विश्वास दोबारा हासिल कर लेगी।

इसके बाद पिछले दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी एलडीएफ को करारी हार का सामना करना पड़ा। तब पार्टी नेतृत्व ने नतीजों को अस्थायी बताते हुए विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक जनसंपर्क और छवि सुधार अभियान चलाया — जो रणनीति भी कारगर साबित नहीं हुई।

राज्यसभा पर असर

विधानसभा में एलडीएफ की घटी संख्या का असर अब राज्यसभा चुनाव पर भी पड़ रहा है। केरल से राज्यसभा का एक सदस्य चुनने के लिए कम से कम 36 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है, जबकि एलडीएफ के पास अब केवल 35 विधायक हैं — यानी पार्टी अब राज्यसभा सीट भी नहीं जीत सकती।

सितंबर की बैठक पर नज़र

एम.ए. बेबी ने बताया कि सितंबर में पार्टी की विस्तारित राज्य समिति की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें चुनावी हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा होगी और सुधारात्मक कदमों पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया, 'सितंबर की बैठक में क्या चर्चा होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।'

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह स्वीकारोक्ति सीपीआई-एम के पहले के रुख से स्पष्ट रूप से अलग है — अब तक पार्टी चुनावी हार को अस्थायी और बाहरी कारणों का परिणाम बताती रही थी। गौरतलब है कि यह वही पार्टी है जिसने पश्चिम बंगाल में तीन दशकों से अधिक का शासन खो दिया और त्रिपुरा में भी सत्ता से बाहर हो गई। केरल उसका अंतिम प्रमुख गढ़ था। अब सबकी नज़र सितंबर की राज्य समिति बैठक पर होगी — कि पार्टी केवल आत्ममंथन तक सीमित रहती है या संगठन में ठोस बदलाव भी लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नहीं बताना कि किसने गलत चुना और क्यों, जवाबदेही को खोखला बना देता है। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी पार्टी ने इसी तरह समीक्षा बैठकें कीं, पर संरचनात्मक बदलाव नहीं आए। केरल में 35 सीटें महज संख्या नहीं हैं — यह राज्यसभा प्रतिनिधित्व खोने की तात्कालिक कीमत है। असली सवाल यह है कि क्या सितंबर की बैठक में नाम लिए जाएंगे, नेतृत्व बदला जाएगा, या फिर एक और 'विस्तृत समीक्षा' की घोषणा होगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल विधानसभा चुनाव में एलडीएफ को कितनी सीटें मिलीं?
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में एलडीएफ केवल 35 सीटें जीत पाया, जो कई दशकों में उसका सबसे खराब चुनावी प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी वाम मोर्चे को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
सीपीआई-एम महासचिव एम.ए. बेबी ने क्या स्वीकार किया?
एम.ए. बेबी ने नई दिल्ली में तीन दिवसीय केंद्रीय समिति बैठक के बाद 14 जुलाई को कहा कि केरल चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में निर्णय संबंधी चूक हुई और पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के व्यवहार में सुधार की ज़रूरत है। उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया।
केरल हार का राज्यसभा पर क्या असर पड़ा है?
केरल से राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 36 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत होती है, जबकि एलडीएफ के पास अब केवल 35 विधायक हैं। इस कारण पार्टी अब केरल से राज्यसभा में अपना प्रतिनिधि भेजने में भी असमर्थ है।
सीपीआई-एम की सितंबर बैठक में क्या होगा?
पार्टी महासचिव एम.ए. बेबी के अनुसार सितंबर में विस्तारित राज्य समिति की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें चुनावी हार के कारणों पर विस्तृत चर्चा और सुधारात्मक कदमों पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि बैठक के एजेंडे के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
क्या सीपीआई-एम पहले भी केरल में इसी तरह की हार झेल चुकी है?
2024 के लोकसभा चुनाव में वाम मोर्चा केरल की 20 में से केवल 1 सीट जीत पाया था, जो आने वाले संकट का पहला संकेत था। इसके बाद दिसंबर 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में भी एलडीएफ को हार मिली, और अब विधानसभा चुनाव में 35 सीटों पर सिमटना पार्टी के लगातार तीन बड़े चुनावी झटकों की कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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