11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी का स्वीकारोक्ति — केरल हार 'गंभीर झटका', 1977 के बाद पहली बार वाम सत्ता से बाहर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी का स्वीकारोक्ति — केरल हार 'गंभीर झटका', 1977 के बाद पहली बार वाम सत्ता से बाहर

सारांश

1977 के बाद पहली बार वाम दल किसी भारतीय राज्य में सत्ता बचाने में विफल रहे — और अब सीपीआई-एम के भीतर ही पिनाराई विजयन व एमवी गोविंदन के खिलाफ इस्तीफे की माँग उठ रही है। महासचिव एमए बेबी की 'गंभीर झटका' वाली स्वीकारोक्ति बताती है कि संकट केवल चुनावी नहीं, संगठनात्मक भी है।

मुख्य बातें

सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी ने 25 मई को केरल चुनाव हार को 'गंभीर झटका' बताया।
1977 के बाद पहली बार वामपंथी दल किसी भी भारतीय राज्य में सत्ता बरकरार रखने में विफल रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य सचिव एमवी गोविंदन पर पार्टी के भीतर से इस्तीफे की माँग उठ रही है।
केंद्रीय समिति ने निकट भविष्य में विशेष बैठक बुलाने से इनकार के संकेत दिए, जिससे दोनों नेताओं को अस्थायी राहत मिली।
राष्ट्रीय नेतृत्व शीर्ष बदलाव से इसलिए हिचकिचा रहा है क्योंकि उसे गुटीय विभाजन गहराने की आशंका है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सिस्ट (सीपीआई-एम) के महासचिव एमए बेबी ने 25 मई को स्वीकार किया कि पार्टी दशकों में अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही है और केरल विधानसभा चुनाव में मिली हार एक 'गंभीर झटका' है। नई दिल्ली में सीपीआई-एम केंद्रीय समिति की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बेबी ने कहा कि पार्टी और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) हार के कारणों की गहन आंतरिक समीक्षा कर रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बेबी ने यह ऐतिहासिक तथ्य स्वीकार किया कि 1977 के बाद यह पहली बार है जब वामपंथी दल किसी भी भारतीय राज्य में सत्ता बरकरार रखने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर 'निडर और स्वतंत्र चर्चाएं' हो रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि आंतरिक असंतोष अब सार्वजनिक रूप से उभर रहा है।

बेबी ने यह भी माना कि केरल में दक्षिणपंथी दलों की मजबूत उपस्थिति ने एक 'गंभीर राजनीतिक स्थिति' पैदा कर दी है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हार का सामना करना पड़ा और केरल में भी भाजपा की बढ़त कुछ हद तक रुकी है।

नेतृत्व पर बढ़ता दबाव

ये टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य सचिव एमवी गोविंदन लगातार चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर से ही तीव्र आलोचना का सामना कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तीन दशकों से भी अधिक समय में पहली बार विजयन को इस स्तर के आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

विभिन्न संगठनात्मक स्तरों के नेता खुलेआम जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। कुछ हलकों में तो विजयन और गोविंदन दोनों से — जो विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं — अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने की माँग उठ रही है।

विशेष बैठक की माँग और केंद्रीय नेतृत्व का रुख

पार्टी के कई वर्गों ने सुधारात्मक उपाय तय करने और बार-बार आई चुनावी चेतावनियों पर नेतृत्व की निष्क्रियता पर चर्चा के लिए एक विशेष बैठक बुलाने की माँग की थी। केंद्रीय समिति के संकेतों के अनुसार, निकट भविष्य में ऐसी कोई बैठक होने की संभावना नहीं है, जिससे विजयन और गोविंदन को फिलहाल अस्थायी राहत मिली है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व केरल में शीर्ष स्तर पर अचानक बदलाव करने से इसलिए हिचकिचा रहा है क्योंकि उसे आशंका है कि इससे गुटीय विभाजन और गहरा हो सकता है।

आम जनता और वाम राजनीति पर असर

गौरतलब है कि केरल वह राज्य रहा है जहाँ वाम दलों ने दशकों तक वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल की नींव रखी। इस हार को महज एक चुनावी नतीजे के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वाम राजनीति की प्रासंगिकता पर एक बड़े सवाल के रूप में देखा जा रहा है।

क्या होगा आगे

सीपीआई-एम के वरिष्ठ नेता निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि वर्तमान नेतृत्व के प्रति असंतोष पहले से कहीं अधिक गहरा हो गया है। पार्टी की अगली बड़ी परीक्षा यह होगी कि वह आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व स्थिरता के बीच संतुलन कैसे साधती है — और क्या आत्ममंथन की यह प्रक्रिया वास्तविक संगठनात्मक सुधार में बदलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी केंद्रीय नेतृत्व विशेष बैठक से बच रहा है — यह विरोधाभास बताता है कि पार्टी जवाबदेही और स्थिरता के बीच फँसी है। केरल की हार सिर्फ एक राज्य का नुकसान नहीं, बल्कि भारत में वाम राजनीति की प्रासंगिकता पर एक अस्तित्वगत प्रश्नचिह्न है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई-एम महासचिव एमए बेबी ने केरल हार पर क्या कहा?
एमए बेबी ने 25 मई को स्वीकार किया कि केरल चुनाव में मिली हार पार्टी के लिए एक 'गंभीर झटका' है और पार्टी दशकों में अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा हार के कारणों की गहन आंतरिक समीक्षा कर रहा है।
1977 के बाद वाम दलों के लिए यह हार क्यों ऐतिहासिक है?
बेबी ने स्वयं स्वीकार किया कि 1977 के बाद यह पहली बार है जब वामपंथी दल किसी भी भारतीय राज्य में सत्ता बरकरार रखने में विफल रहे हैं। केरल वह आखिरी गढ़ था जहाँ वाम दल नियमित रूप से सत्ता में आते थे।
पिनाराई विजयन और एमवी गोविंदन पर क्या दबाव है?
पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक स्तरों पर नेता खुलेआम जवाबदेही की माँग कर रहे हैं और कुछ हलकों में दोनों से इस्तीफे की माँग उठ रही है। तीन दशकों से भी अधिक समय में पहली बार विजयन को इतने तीव्र आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
क्या सीपीआई-एम में नेतृत्व परिवर्तन होगा?
केंद्रीय समिति के संकेतों के अनुसार निकट भविष्य में कोई विशेष बैठक होने की संभावना नहीं है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व शीर्ष स्तर पर अचानक बदलाव से इसलिए बच रहा है क्योंकि उसे गुटीय विभाजन और गहराने की आशंका है।
केरल में भाजपा की स्थिति पर सीपीआई-एम का क्या आकलन है?
बेबी ने माना कि केरल में भाजपा की बढ़त कुछ हद तक रुकी है और तमिलनाडु में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केरल में दक्षिणपंथी दलों की मजबूत उपस्थिति ने एक 'गंभीर राजनीतिक स्थिति' पैदा कर दी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले