दिल्ली रिज में औषधीय वन बनाने का सुझाव, प्रतापराव जाधव ने सीएम रेखा गुप्ता को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 10 जुलाई 2026 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर दिल्ली रिज संरक्षण योजना में औषधीय पौधों को शामिल करने का आग्रह किया। जाधव ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक चिकित्सा को एक साथ आगे बढ़ाने का दुर्लभ अवसर बताया।
क्या है दिल्ली रिज संरक्षण योजना
दिल्ली सरकार की इस योजना में 70 लाख से अधिक देसी और जलवायु-अनुकूल पेड़ लगाने, 70 से अधिक जल निकायों को विकसित करने और लगभग 6,000 हेक्टेयर भूमि को वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव है। जाधव ने इन उपायों की सराहना करते हुए इन्हें दिल्ली की पारिस्थितिक सुरक्षा और वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में अहम कदम बताया।
योजना में विलायती कीकर और बबूल जैसी बाहरी प्रजातियों की जगह पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन और जामुन जैसे देसी पेड़ लगाने का प्रस्ताव है। जाधव के अनुसार इससे रिज क्षेत्र सही मायनों में 'दिल्ली के फेफड़े' के रूप में विकसित होगा।
औषधीय वन का सुझाव
जाधव ने पत्र में सुझाया कि प्रस्तावित आठ जंगलों में से कम-से-कम 20 प्रतिशत पेड़ औषधीय प्रजातियों के होने चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो कम-से-कम दो जंगलों को विशेष रूप से औषधि वन के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल औषधीय प्रजातियों की एक संभावित सूची भी साझा की। इसमें अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, ब्राह्मी, शतावरी, आंवला, अर्जुन, अशोक, नीम, बेल और जामुन जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं।
आयुष क्षेत्र और पारिस्थितिकी को जोड़ने की पहल
जाधव ने तर्क दिया कि इस तरह के औषधि वन आयुष क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल का टिकाऊ स्रोत बन सकते हैं। साथ ही ये जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देंगे, पारिस्थितिक बहाली को मज़बूत करेंगे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इको-टूरिज्म के नए अवसर खोलेंगे।
गौरतलब है कि देश भर में आयुष उत्पादों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण औषधीय कच्चे माल की आपूर्ति सीमित बनी हुई है। ऐसे में शहरी वनों में औषधीय पौधों को शामिल करना एक नवाचारी समाधान हो सकता है।
आगे की राह
जाधव ने आयुष मंत्रालय की ओर से इस पहल में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। उनका मानना है कि यह मॉडल शहरी वनीकरण को भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से जोड़ने में देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। दिल्ली सरकार की ओर से इस सुझाव पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।