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केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने CM रेखा गुप्ता को पत्र लिखा, दिल्ली के 8 वनों में 20% क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए माँगा

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केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने CM रेखा गुप्ता को पत्र लिखा, दिल्ली के 8 वनों में 20% क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए माँगा

सारांश

केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने दिल्ली CM रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर वन-रोपण अभियान में औषधीय पौधों को जोड़ने का आग्रह किया — 8 वनों में 20% क्षेत्र या 2 समर्पित औषधीय वन। अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी समेत 11 प्रजातियों की सूची साझा की।

मुख्य बातें

केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने 10 जुलाई 2025 को दिल्ली CM रेखा गुप्ता को पत्र लिखा।
दिल्ली के प्रस्तावित 8 वनों में कम से कम 20% क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए आरक्षित करने का सुझाव; विकल्प के रूप में कम से कम 2 वन पूरी तरह औषधीय वन के रूप में विकसित करने का आग्रह।
दिल्ली की योजना में 70 लाख से अधिक पेड़, 70 से अधिक जल निकाय और लगभग 6,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य।
अनुशंसित औषधीय प्रजातियों में अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, ब्राह्मी, शतावरी, आंवला, अर्जुन, अशोक, नीम, बेल और जामुन शामिल।
दिल्ली रिज से विलायती किकर व बाबूल हटाकर पीपल, बरगद, नीम जैसी देशी प्रजातियाँ लगाने के निर्णय का स्वागत।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 10 जुलाई 2025 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर राजधानी के वन-रोपण अभियान में औषधीय पौधों को शामिल करने का आग्रह किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रस्तावित आठ वनों में कम से कम 20 प्रतिशत क्षेत्र औषधीय प्रजातियों के लिए आरक्षित किया जाए, या वैकल्पिक रूप से कम से कम दो वनों को पूरी तरह समर्पित औषधीय वन के रूप में विकसित किया जाए।

दिल्ली के वन-रोपण अभियान की रूपरेखा

दिल्ली सरकार ने दिल्ली रिज इकोसिस्टम के संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत 70 लाख से अधिक स्वदेशी एवं जलवायु-अनुकूल पेड़ लगाने, 70 से अधिक जल निकाय विकसित करने और लगभग 6,000 हेक्टेयर भूमि को वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। जाधव ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

विशेष रूप से, अभियान में दिल्ली रिज क्षेत्र से विलायती किकर और बाबूल जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियों को हटाकर पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन और जामुन जैसी देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है — जिसका केंद्रीय मंत्री ने स्वागत किया।

औषधीय पौधों को शामिल करने का सुझाव

जाधव ने दिल्ली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए औषधीय पौधों की एक विशिष्ट सूची भी साझा की। इसमें अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, ब्राह्मी, शतावरी, आंवला, अर्जुन, अशोक, नीम, बेल और जामुन शामिल हैं। उनका तर्क है कि ये पौधे आयुष क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का स्थायी स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार आयुष चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। औषधीय वन न केवल जैव विविधता संरक्षण में सहायक होंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में भी भूमिका निभा सकते हैं।

रिज क्षेत्र का पारिस्थितिक महत्व

दिल्ली रिज को प्रायः राजधानी के 'फेफड़े' की संज्ञा दी जाती है। गौरतलब है कि दशकों से आक्रामक विदेशी वृक्ष प्रजातियों के फैलाव ने इस क्षेत्र की मूल जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। जाधव ने कहा कि स्वदेशी वृक्ष प्रजातियों का विस्तार रिज के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगा और शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने में भी सहायक होगा।

आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता

केंद्रीय मंत्री जाधव ने स्पष्ट किया कि आयुष मंत्रालय औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का यह अभियान शहरी वनीकरण, पारंपरिक चिकित्सा और पर्यावरण प्रबंधन को एक साथ जोड़ने वाला देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।

अब यह देखना होगा कि दिल्ली सरकार इस सुझाव को अपने वन-रोपण अभियान की कार्ययोजना में किस हद तक समाहित करती है और औषधीय वनों की स्थापना की समयसीमा क्या निर्धारित की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — दिल्ली के वन-रोपण अभियान की पिछली घोषणाएँ अक्सर भूमि-अधिग्रहण और रखरखाव की चुनौतियों में उलझ जाती हैं। औषधीय वनों की सफलता के लिए केवल रोपण नहीं, बल्कि प्रशिक्षित जनशक्ति, नियमित निगरानी और आयुष उद्योग के साथ आपूर्ति-श्रृंखला का ठोस ढाँचा चाहिए — जिसका उल्लेख पत्र में नहीं है। यह प्रस्ताव दिल्ली को एक अनूठा शहरी-आयुष मॉडल दे सकता है, बशर्ते दोनों सरकारें इसे केवल कागज़ी पहल से आगे ले जाएँ।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने दिल्ली CM को पत्र में क्या माँगा है?
जाधव ने दिल्ली के प्रस्तावित 8 वनों में कम से कम 20% क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए आरक्षित करने का आग्रह किया है। यदि यह संभव न हो, तो कम से कम 2 वनों को पूरी तरह समर्पित औषधीय वन के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया है।
दिल्ली के वन-रोपण अभियान में कितने पेड़ लगाने का लक्ष्य है?
दिल्ली सरकार की योजना के तहत 70 लाख से अधिक स्वदेशी एवं जलवायु-अनुकूल पेड़ लगाने, 70 से अधिक जल निकाय विकसित करने और लगभग 6,000 हेक्टेयर भूमि को वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।
दिल्ली के वनों में कौन-से औषधीय पौधे लगाने की सिफारिश की गई है?
जाधव ने दिल्ली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, ब्राह्मी, शतावरी, आंवला, अर्जुन, अशोक, नीम, बेल और जामुन जैसी 11 प्रजातियों की सूची साझा की है।
दिल्ली रिज से कौन-सी प्रजातियाँ हटाई जाएंगी और उनकी जगह क्या लगेगा?
दिल्ली रिज से विलायती किकर और बाबूल जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ हटाई जाएंगी। उनकी जगह पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन और जामुन जैसी देशी प्रजातियाँ लगाई जाएंगी, जो रिज के मूल पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करेंगी।
औषधीय वनों से आयुष क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
औषधीय वन आयुष क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का स्थायी और स्थानीय स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं। साथ ही, ये जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक बहाली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में भी सहायक होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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