10 जुलाई 2026
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पटना उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति सुधीर सिंह बने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, 11 जुलाई से संभालेंगे कार्यभार

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पटना उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति सुधीर सिंह बने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, 11 जुलाई से संभालेंगे कार्यभार

सारांश

केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को पटना उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। यह नियुक्ति 11 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की सेवानिवृत्ति के बाद प्रभावी होगी। न्यायमूर्ति सिंह 1991 से कानूनी क्षेत्र में सक्रिय हैं।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को 10 जुलाई 2026 को पटना उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
नियुक्ति 11 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की सेवानिवृत्ति के बाद प्रभावी होगी।
नियुक्ति का आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 223 है, जो राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है।
न्यायमूर्ति सिंह 1991 से अधिवक्ता हैं; 15 अप्रैल 2015 को अतिरिक्त और 20 अप्रैल 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने।
न्यायमूर्ति मदन राय ने 4 जून को न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू की सेवानिवृत्ति के बाद पटना उच्च न्यायालय का प्रमुख पद संभाला था।

केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2026 को एक अधिसूचना जारी कर न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को पटना उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। यह नियुक्ति मौजूदा मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की 11 जुलाई 2026 को होने वाली सेवानिवृत्ति के बाद प्रभावी होगी। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी इस अधिसूचना का आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 223 है।

अधिसूचना में क्या कहा गया

विधि एवं न्याय मंत्रालय की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है: 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को श्रीमती न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की 11.07.2026 को सेवानिवृत्ति के बाद उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त करते हैं।' अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो या वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तब किसी न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सके।

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह का न्यायिक सफर

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह ने 1991 में अधिवक्ता के रूप में अपना कानूनी करियर शुरू किया और आपराधिक तथा रिट मामलों में विशेष दक्षता हासिल की। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया — जिनमें भारत सरकार के केंद्रीय सरकारी वकील, रेल मंत्रालय के रेलवे वकील, भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के अतिरिक्त स्थायी वकील तथा पटना उच्च न्यायालय में भारत के सहायक सॉलिसिटर जनरल शामिल हैं। 15 अप्रैल 2015 को उन्हें पटना उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 20 अप्रैल 2016 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा रांची के विकास विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के अंतर्गत पटना कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और पटना विधि कॉलेज से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की।

न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय का संक्षिप्त कार्यकाल

यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किए मात्र एक महीने से कुछ अधिक समय ही हुआ है। उनकी नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर हुई थी और पटना के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने उन्हें शपथ दिलाई थी। इससे पहले, 4 जून को मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की सेवानिवृत्ति के बाद न्यायमूर्ति राय ने पटना उच्च न्यायालय का प्रमुख पद संभाला था।

आगे की राह

11 जुलाई 2026 से न्यायमूर्ति सुधीर सिंह पटना उच्च न्यायालय की बागडोर संभालेंगे। गौरतलब है कि यह कार्यवाहक नियुक्ति है, और स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की सिफारिश की प्रतीक्षा रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उच्च न्यायालयों में नेतृत्व की निरंतरता पर सवाल उठाती है। स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में विलंब न्यायिक प्रशासन और लंबित मामलों के प्रबंधन पर असर डाल सकता है — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को पटना उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश क्यों नियुक्त किया गया?
न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की 11 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्ति के बाद पद रिक्त होने पर केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। यह प्रावधान राष्ट्रपति को पद रिक्त होने की स्थिति में किसी न्यायाधीश को यह दायित्व सौंपने का अधिकार देता है।
संविधान का अनुच्छेद 223 क्या है?
अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो या वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो उस न्यायालय के किसी न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सके। यह एक संवैधानिक प्रावधान है जो न्यायिक प्रशासन की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
न्यायमूर्ति सुधीर सिंह का न्यायिक अनुभव कितना है?
न्यायमूर्ति सुधीर सिंह 1991 से अधिवक्ता हैं और उन्होंने आपराधिक व रिट मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। 15 अप्रैल 2015 को वे पटना उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 20 अप्रैल 2016 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने पटना उच्च न्यायालय का कार्यभार कब संभाला था?
न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने 4 जून को न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू की सेवानिवृत्ति के बाद पटना उच्च न्यायालय का प्रमुख पद संभाला था। उनकी नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर हुई थी और पटना के लोक भवन में राज्यपाल ने शपथ दिलाई थी।
क्या न्यायमूर्ति सुधीर सिंह पटना उच्च न्यायालय के स्थायी मुख्य न्यायाधीश होंगे?
नहीं, यह एक कार्यवाहक नियुक्ति है। स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश आवश्यक होगी, जिसके बाद केंद्र सरकार औपचारिक नियुक्ति करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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