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न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल एनसीएलटी के नए अध्यक्ष नियुक्त, 5 वर्ष का कार्यकाल

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न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल एनसीएलटी के नए अध्यक्ष नियुक्त, 5 वर्ष का कार्यकाल

सारांश

केंद्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल को एनसीएलटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। पाँच वर्षीय कार्यकाल के साथ यह नियुक्ति उस संस्था को स्थायी नेतृत्व देती है जो देश के कॉरपोरेट विवादों और आईबीसी मामलों की सुनवाई करती है।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
नियुक्ति पाँच वर्ष की अवधि के लिए या 67 वर्ष की आयु तक — जो भी पहले हो।
वे न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर का स्थान लेंगे, जिन्होंने 1 नवंबर 2021 से कार्यभार संभाला था।
डीओपीटी की अधिसूचना 30 अप्रैल 2026 को जारी; मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने प्रस्ताव मंजूर किया।
न्यायमूर्ति ग्रेवाल का विधिक करियर 1992 से शुरू; पंजाब एवं हरियाणा व राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहे।

केंद्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। 30 अप्रैल 2026 को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यह नियुक्ति स्वीकृत की। यह नियुक्ति पदभार ग्रहण की तिथि से प्रभावी होगी या 67 वर्ष की आयु पूरी होने तक — जो भी पहले हो।

नियुक्ति की शर्तें और कार्यकाल

अधिसूचना के अनुसार, न्यायमूर्ति ग्रेवाल को एनसीएलटी अध्यक्ष पद पर पाँच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया गया है। वे न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर का स्थान लेंगे, जिन्होंने 1 नवंबर 2021 से एनसीएलटी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था और इस वर्ष पद छोड़ा। गौरतलब है कि एनसीएलटी अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया कई महीनों से चल रही थी, और इस नियुक्ति से संस्था को दीर्घकालिक नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।

एनसीएलटी की भूमिका और महत्व

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) भारत में कॉरपोरेट विवादों के निपटारे के लिए एक प्रमुख न्यायिक संस्था है। यह कंपनी अधिनियम से जुड़े मामलों और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दर्ज प्रकरणों की सुनवाई करती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आईबीसी मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और न्यायाधिकरण पर लंबित मामलों का बोझ बढ़ता जा रहा है।

न्यायमूर्ति ग्रेवाल की शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति ग्रेवाल का जन्म 10 मार्च 1964 को पंजाब के लुधियाना जिले के एक कृषक परिवार में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में बीए ऑनर्स (1985) और एमए (1987) किया। इसके बाद 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।

उन्होंने 1992 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की और पंजाब सरकार के लिए सहायक महाधिवक्ता, उप महाधिवक्ता, वरिष्ठ उप महाधिवक्ता तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। नवंबर 2009 में उन्हें केंद्र सरकार के मामलों की पैरवी के लिए वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता नियुक्त किया गया।

न्यायिक यात्रा: हाईकोर्ट से एनसीएलटी तक

25 सितंबर 2014 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। दिसंबर 2014 में उनका तबादला राजस्थान हाईकोर्ट हुआ, जहाँ मई 2016 में उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। अक्टूबर 2016 में उन्हें पुनः पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भेजा गया, जहाँ से वे सेवानिवृत्त हुए। तीन दशकों से अधिक की विधिक और न्यायिक सेवा के साथ, न्यायमूर्ति ग्रेवाल का अनुभव एनसीएलटी को नई दिशा देने में सहायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा यह होगी कि नया नेतृत्व आईबीसी मामलों के बढ़ते बोझ और निपटारे में देरी की पुरानी समस्या से कैसे निपटता है। तीन दशकों का विधिक अनुभव एक मज़बूत आधार देता है, लेकिन कॉरपोरेट जगत की नज़र इस बात पर रहेगी कि क्या नया नेतृत्व न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली में गति और पारदर्शिता ला पाता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल को एनसीएलटी अध्यक्ष क्यों नियुक्त किया गया?
मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए न्यायमूर्ति ग्रेवाल को एनसीएलटी अध्यक्ष नियुक्त किया। पंजाब एवं हरियाणा और राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उनका व्यापक अनुभव इस नियुक्ति का आधार माना जा रहा है।
एनसीएलटी अध्यक्ष का कार्यकाल कितना होता है?
एनसीएलटी अध्यक्ष का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है या 67 वर्ष की आयु पूरी होने तक — जो भी पहले हो। न्यायमूर्ति ग्रेवाल की नियुक्ति भी इन्हीं शर्तों पर की गई है।
एनसीएलटी क्या काम करता है?
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) भारत में कॉरपोरेट विवादों के निपटारे की प्रमुख न्यायिक संस्था है। यह कंपनी अधिनियम से जुड़े मामलों और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दर्ज प्रकरणों की सुनवाई करती है।
न्यायमूर्ति ग्रेवाल से पहले एनसीएलटी के अध्यक्ष कौन थे?
न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर ने 1 नवंबर 2021 से एनसीएलटी अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था और इस वर्ष पद छोड़ा। न्यायमूर्ति ग्रेवाल उनका स्थान लेंगे।
न्यायमूर्ति ग्रेवाल की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास में बीए ऑनर्स (1985) और एमए (1987) किया। इसके बाद 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।
राष्ट्र प्रेस
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