9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, महाभियोग कार्यवाही के बीच

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, महाभियोग कार्यवाही के बीच

सारांश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह घटनाक्रम महाभियोग कार्यवाही के चलते उनके कार्यकाल का अचानक अंत दर्शाता है। जानिए इस विवाद के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण कानूनी घटना है।
महाभियोग कार्यवाही ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया है, जिससे उनके कार्यकाल का अचानक अंत हो गया है। यह घटनाक्रम चल रही महाभियोग कार्यवाही के बीच हुआ है।

अपने पत्र में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने लिखा, "मैं आपके इस प्रतिष्ठित पद पर उन कारणों का बोझ नहीं डालना चाहता, जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया," और यह भी कहा कि गहरे दुख के साथ वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि "इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।" इस्तीफे की एक प्रति भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भी भेजी गई है।

न्यायमूर्ति वर्मा मार्च 14, 2025 को कथित तौर पर दिल्ली उच्च न्यायालय के कार्यकाल के दौरान आवंटित सरकारी आवास के परिसर में स्थित एक आउटहाउस में जली हुई नकदी मिलने के बाद से विवादों में रहे हैं।

जुलाई 2025 में लोकसभा के 145 और राज्यसभा के 63 सदस्यों के समर्थन से संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे।

इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष ने जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।

इस वर्ष की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष के इस निर्णय को चुनौती देने वाली न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया था।

शीर्ष अदालत की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे, ने अपने निर्णय में कहा: "हम मानते हैं कि याचिकाकर्ता इस मामले में किसी भी राहत के हकदार नहीं हैं।"

न्यायमूर्ति वर्मा ने जांच समिति के गठन को प्रक्रियात्मक आधार पर चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि दोनों सदनों में एक साथ लाए गए महाभियोग प्रस्तावों के लिए जांच समिति गठित करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के बीच संयुक्त परामर्श आवश्यक था।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति के निष्कर्षों को भी चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि कथित नकदी पर उनका "गुप्त या सक्रिय नियंत्रण" था।

शीर्ष अदालत ने इस चुनौती को भी खारिज करते हुए कहा कि आंतरिक जांच प्रक्रिया "निष्पक्ष और न्यायसंगत" थी और इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होती।

आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने उनके खिलाफ हटाने की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की थी, जिसके बाद एक संसदीय जांच समिति का गठन किया गया। मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनींदर मोहन श्रीवास्तव के सेवानिवृत्त होने के बाद इस समिति की संरचना में हाल ही में बदलाव किया गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देश के कानूनी ढांचे पर प्रभाव डाल सकती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का इस्तीफा क्यों दिया गया?
उन्होंने महाभियोग कार्यवाही के चलते अपना इस्तीफा दिया है।
महाभियोग कार्यवाही क्या है?
महाभियोग कार्यवाही एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी न्यायाधीश या सरकारी अधिकारी को हटाने के लिए आरोप लगाए जाते हैं।
न्यायमूर्ति वर्मा का कार्यकाल कब समाप्त हुआ?
उनका कार्यकाल महाभियोग कार्यवाही के बीच अचानक समाप्त हुआ।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा की याचिका खारिज कर दी थी?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
महाभियोग प्रस्ताव के समर्थन में कितने सांसद थे?
महाभियोग प्रस्ताव के समर्थन में लोकसभा के 145 और राज्यसभा के 63 सदस्य थे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 12 महीने पहले
  5. 12 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले