जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती बने कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, 20 जून से संभालेंगे कार्यभार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 19 जून 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती को हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की। यह नियुक्ति 20 जून 2026 से प्रभावी होगी, जब मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल सेवानिवृत्त होंगे।
नियुक्ति का संवैधानिक आधार
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 223 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने यह नियुक्ति की है। अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो या वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो उस न्यायालय के किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है।
जस्टिस चक्रवर्ती की न्यायिक पृष्ठभूमि
जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती का जन्म 27 नवंबर 1966 को एक विधिक परिवार में हुआ था। उन्होंने 29 जनवरी 1991 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और दो दशकों से अधिक समय तक कलकत्ता हाईकोर्ट में विधि-व्यवसाय किया। उनकी विशेषज्ञता मुख्यतः सेवा कानून, शिक्षण कानून, सिविल तथा संवैधानिक मामलों में रही।
उन्हें 30 अक्टूबर 2013 को कलकत्ता हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 14 मार्च 2016 को स्थायी न्यायाधीश के पद पर आसीन किया गया। इस प्रकार उनका न्यायिक अनुभव एक दशक से भी अधिक का है।
जस्टिस सुजॉय पॉल की विदाई
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल 20 जून 2026 को सेवानिवृत्ति की आयु पूर्ण होने पर पद छोड़ेंगे। यह अधिसूचना उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पूर्व जारी की गई, जो न्यायपालिका की निरंतरता सुनिश्चित करने की प्रशासनिक परंपरा के अनुरूप है। गौरतलब है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तब तक प्रभावी रहती है जब तक नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हो जाती।
कलकत्ता हाईकोर्ट और न्यायिक प्रशासन पर असर
कलकत्ता हाईकोर्ट देश के प्राचीनतम उच्च न्यायालयों में से एक है और पश्चिम बंगाल तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर इसका क्षेत्राधिकार है। जस्टिस चक्रवर्ती की संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता को देखते हुए विधि जगत में इस नियुक्ति को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तक न्यायालय का प्रशासनिक और न्यायिक संचालन उनके नेतृत्व में जारी रहेगा।