6 अगस्त 2026
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जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती बने कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, 20 जून से संभालेंगे कार्यभार

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जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती बने कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, 20 जून से संभालेंगे कार्यभार

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट में नेतृत्व परिवर्तन तय हो गया है। जस्टिस सुजॉय पॉल की 20 जून 2026 को सेवानिवृत्ति के साथ ही संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कमान संभालेंगे — एक ऐसी नियुक्ति जो अनुच्छेद 223 के तहत राष्ट्रपति की शक्ति का प्रयोग करते हुए की गई है।

मुख्य बातें

जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती को 19 जून 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
यह नियुक्ति 20 जून 2026 से प्रभावी होगी, जब जस्टिस सुजॉय पॉल सेवानिवृत्त होंगे।
नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत राष्ट्रपति द्वारा की गई है।
जस्टिस चक्रवर्ती ने 29 जनवरी 1991 को वकालत शुरू की और 30 अक्टूबर 2013 को अतिरिक्त न्यायाधीश बने।
उन्हें 14 मार्च 2016 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया; संवैधानिक कानून में विशेष दक्षता।

केंद्र सरकार ने 19 जून 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती को हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की। यह नियुक्ति 20 जून 2026 से प्रभावी होगी, जब मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल सेवानिवृत्त होंगे।

नियुक्ति का संवैधानिक आधार

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 223 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने यह नियुक्ति की है। अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो या वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो उस न्यायालय के किसी वरिष्ठ न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है।

जस्टिस चक्रवर्ती की न्यायिक पृष्ठभूमि

जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती का जन्म 27 नवंबर 1966 को एक विधिक परिवार में हुआ था। उन्होंने 29 जनवरी 1991 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और दो दशकों से अधिक समय तक कलकत्ता हाईकोर्ट में विधि-व्यवसाय किया। उनकी विशेषज्ञता मुख्यतः सेवा कानून, शिक्षण कानून, सिविल तथा संवैधानिक मामलों में रही।

उन्हें 30 अक्टूबर 2013 को कलकत्ता हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 14 मार्च 2016 को स्थायी न्यायाधीश के पद पर आसीन किया गया। इस प्रकार उनका न्यायिक अनुभव एक दशक से भी अधिक का है।

जस्टिस सुजॉय पॉल की विदाई

वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल 20 जून 2026 को सेवानिवृत्ति की आयु पूर्ण होने पर पद छोड़ेंगे। यह अधिसूचना उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पूर्व जारी की गई, जो न्यायपालिका की निरंतरता सुनिश्चित करने की प्रशासनिक परंपरा के अनुरूप है। गौरतलब है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तब तक प्रभावी रहती है जब तक नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हो जाती।

कलकत्ता हाईकोर्ट और न्यायिक प्रशासन पर असर

कलकत्ता हाईकोर्ट देश के प्राचीनतम उच्च न्यायालयों में से एक है और पश्चिम बंगाल तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर इसका क्षेत्राधिकार है। जस्टिस चक्रवर्ती की संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता को देखते हुए विधि जगत में इस नियुक्ति को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तक न्यायालय का प्रशासनिक और न्यायिक संचालन उनके नेतृत्व में जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक प्रश्न को रेखांकित करती है कि उच्च न्यायालयों में स्थायी नियुक्तियों में विलंब न्यायिक प्रशासन को किस हद तक प्रभावित करता है। कलकत्ता हाईकोर्ट जैसे ऐतिहासिक और व्यस्त न्यायालय में 'कार्यवाहक' व्यवस्था लंबे समय तक चलना न्यायिक स्थिरता के लिए आदर्श नहीं माना जाता। जस्टिस चक्रवर्ती की संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाती है, परंतु असली परीक्षा यह होगी कि केंद्र सरकार और कॉलेजियम मिलकर स्थायी नियुक्ति कितनी शीघ्रता से सुनिश्चित करते हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती को कलकत्ता हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश क्यों नियुक्त किया गया?
मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल के 20 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने के कारण पद रिक्त होने की स्थिति में यह नियुक्ति की गई है। संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत राष्ट्रपति ने जस्टिस चक्रवर्ती को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
संविधान का अनुच्छेद 223 क्या है?
अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो या वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो उस न्यायालय के किसी न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है। यह एक नियमित संवैधानिक प्रावधान है जो न्यायालय की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती का न्यायिक अनुभव क्या है?
जस्टिस चक्रवर्ती ने 29 जनवरी 1991 को वकालत शुरू की और दो दशकों से अधिक समय तक कलकत्ता हाईकोर्ट में सेवा, शिक्षण एवं संवैधानिक कानून के मामलों में प्रैक्टिस की। वे 30 अक्टूबर 2013 को अतिरिक्त न्यायाधीश और 14 मार्च 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने।
जस्टिस चक्रवर्ती का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल कब से शुरू होगा?
उनका कार्यकाल 20 जून 2026 से प्रभावी होगा, जब जस्टिस सुजॉय पॉल सेवानिवृत्त होंगे। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हो जाती।
कलकत्ता हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार कहाँ तक है?
कलकत्ता हाईकोर्ट देश के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में से एक है और इसका क्षेत्राधिकार पश्चिम बंगाल तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर है। यह न्यायालय नागरिक, आपराधिक और संवैधानिक मामलों की सुनवाई करता है।
राष्ट्र प्रेस
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