चार हाईकोर्ट में 30 जजों की नियुक्ति: मद्रास, कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश को मिले नए न्यायाधीश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 अगस्त 2026 को मद्रास, कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 30 वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को जज तथा अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। ये नियुक्तियाँ सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करके मंजूर की गई हैं।
मंत्री की घोषणा और संवैधानिक आधार
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इन नियुक्तियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'भारत के संविधान से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश से सलाह-मशविरा करके राष्ट्रपति इन वकीलों/न्यायिक अधिकारियों को हाई कोर्ट में जज/अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्त करते हुए खुशी महसूस कर रहे हैं।' यह नियुक्ति प्रक्रिया भारतीय न्यायपालिका में कॉलेजियम प्रणाली के तहत होती है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश सिफारिश करते हैं।
मद्रास हाईकोर्ट में नियुक्तियाँ
मद्रास हाईकोर्ट को सबसे अधिक 15 नए न्यायाधीश मिले हैं। पाँच वकीलों — गोविंदराजन कृष्णस्वामी, रजनीश पथियिल, रमेश नटराजन, जीके मुथुकुमार और रामकृष्णन राजेश विवेकानंदन — को स्थायी जज नियुक्त किया गया है। दस अन्य को अतिरिक्त जज बनाया गया है, जिनमें वकील रवीकुमार शंकरनारायणन, दिलीप कुमार नागराजन और एलप्पन मनोहरन तथा न्यायिक अधिकारी डॉ. पी. मुरुगन, एमडी सुमति, एस. एली, सी. तिरुमंगल, षणमुगम कार्तिकेयन, मुरुगेसन बालूचामी और एन. गुनासेकरन शामिल हैं।
कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्तियाँ
कलकत्ता हाईकोर्ट में आठ वकीलों — आर्यक दत्त, अतुरूप बनर्जी, संदीप कुमार डे, पार्थ प्रतिम रॉय, सुदीप देब, अनुज सिंह, अर्जुन रे मुखर्जी और ऋषद मेडोरा — को अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है। कर्नाटक हाईकोर्ट में छह वकीलों — राघवेंद्र सीताराम श्रीवत्सा, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगाराव, विवेकानंद थडागावाड़ी प्रकाश, प्रमोद बक्केश्वर और शांति भूषण होम्बे गौड़ा — को अतिरिक्त जज का दर्जा दिया गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वकील अमित लाहोटी को अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है।
कॉलेजियम प्रक्रिया और महत्व
गौरतलब है कि ये नियुक्तियाँ सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की उन सिफारिशों के आधार पर की गई हैं, जिनमें संबंधित हाईकोर्ट के वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को पदोन्नत करने का प्रस्ताव था। यह ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के हज़ारों पद रिक्त हैं और लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। न्यायिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ न्यायिक प्रक्रिया को गति देने में सहायक होती हैं।
आगे की राह
अधिसूचना जारी होने के बाद इन सभी नवनियुक्त जजों को शपथ ग्रहण करनी होगी, जिसके बाद वे अपने-अपने हाईकोर्ट में कार्यभार संभालेंगे। इन नियुक्तियों से चारों हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे वर्षों से लंबित पड़े मामलों के निपटारे में तेज़ी आ सकती है।