19 सितंबर 2026
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केंद्र सरकार ने 14 नए हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति मंजूर की, दिल्ली हाईकोर्ट को मिले 7 जज

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केंद्र सरकार ने 14 नए हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति मंजूर की, दिल्ली हाईकोर्ट को मिले 7 जज

सारांश

केंद्र सरकार ने एक साथ दिल्ली, झारखंड, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में 14 जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी। दिल्ली हाईकोर्ट को 7 जज मिले, फिर भी 16 पद खाली हैं और कॉलेजियम की एक सिफारिश अब भी लंबित है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 19 सितंबर 2026 को चार उच्च न्यायालयों में 14 जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी।
दिल्ली उच्च न्यायालय में 7 जज नियुक्त; कॉलेजियम की 8 में से 1 सिफारिश अभी लंबित।
दिल्ली हाईकोर्ट में स्वीकृत 60 पदों के मुकाबले अभी भी 16 पद रिक्त हैं।
झारखंड हाईकोर्ट में 3 नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत जजों की संख्या 13 से 16 हुई; 12 में से 9 पद अब भी खाली।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में यश पॉल बोर्नी को जज नियुक्त किया गया।
कर्नाटक हाईकोर्ट में 3 अतिरिक्त जज नियुक्त; कार्यरत जजों की संख्या 54 से 57 हुई।

केंद्र सरकार ने 19 सितंबर 2026 को देश के चार उच्च न्यायालयों में 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस निर्णय की जानकारी केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। इन नियुक्तियों से दिल्ली, झारखंड, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख तथा कर्नाटक उच्च न्यायालयों में रिक्त पड़े पदों की संख्या में कमी आएगी।

मंत्री की घोषणा और संवैधानिक प्रक्रिया

मंत्री मेघवाल ने एक्स पर सूची प्रकाशित करते हुए लिखा, 'भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद, राष्ट्रपति न्यायिक अधिकारियों को उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश/अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करते हैं।' यह नियुक्ति-प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर होती है, जो न्यायपालिका की स्वायत्तता का आधार मानी जाती है।

दिल्ली हाईकोर्ट: 7 नियुक्तियाँ, एक नाम लंबित

दिल्ली उच्च न्यायालय को सर्वाधिक 7 नए जज मिले हैं। निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं, संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि अरुण भारद्वाज अभी दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत हैं।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 10 सितंबर 2026 को हुई बैठक में दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए 8 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए थे। केंद्र सरकार ने उनमें से 7 नामों पर मुहर लगाई है और एक नाम अभी लंबित है। दिल्ली उच्च न्यायालय में जजों की स्वीकृत संख्या 60 है, किंतु वर्तमान में केवल 44 जज कार्यरत हैं, यानी अभी भी 16 पद रिक्त हैं।

झारखंड और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट में नई नियुक्तियाँ

झारखंड उच्च न्यायालय में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को नए जज नियुक्त किया गया है। यहाँ जजों की स्वीकृत संख्या 25 है, जबकि पहले केवल 13 जज कार्यरत थे और 12 पद खाली थे। इन तीन नियुक्तियों के बाद कार्यरत जजों की संख्या 16 हो जाएगी।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के लिए यश पॉल बोर्नी की नियुक्ति की घोषणा की गई। कॉलेजियम ने 10 सितंबर की बैठक में उनके नाम की सिफारिश की थी और केंद्र ने उसे मंजूरी दे दी।

कर्नाटक हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त जज

कर्नाटक उच्च न्यायालय में उषा रानी, के.एस. भरत कुमार और नेराले वीरभद्रैया भवानी को अतिरिक्त जज के रूप में पदोन्नत किया गया है। यहाँ 62 जजों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले पहले 54 जज ही कार्यरत थे। नई नियुक्तियों के बाद यह संख्या 57 हो जाएगी।

न्यायिक रिक्तियों की बड़ी चुनौती

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के उच्च न्यायालयों में रिक्त पदों की संख्या न्यायिक विलंब की एक प्रमुख वजह मानी जाती रही है। आलोचकों का कहना है कि कॉलेजियम की सिफारिशों में से एक नाम को लंबित रखना सरकार और न्यायपालिका के बीच सतत तनाव का प्रतीक है। इन नियुक्तियों के बाद भी देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में सैकड़ों पद रिक्त बने रहेंगे, जो लंबित मामलों के बोझ को पूरी तरह कम नहीं कर पाएंगे। आगे और सिफारिशें और नियुक्तियाँ अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय में कॉलेजियम की एक सिफारिश को रोककर रखना उस पुरानी रस्साकशी की याद दिलाता है जो सरकार और न्यायपालिका के बीच वर्षों से चली आ रही है। इन नियुक्तियों के बाद भी दिल्ली हाईकोर्ट में 16 पद रिक्त रहेंगे — और यह महज एक अदालत की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे देश के उच्च न्यायालयों में लंबित करोड़ों मामलों की जड़ में यही संरचनात्मक कमी है। जब तक नियुक्ति-प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता नहीं आती, तब तक न्यायिक विलंब का संकट कागज़ी घोषणाओं से हल नहीं होगा।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने किन हाई कोर्ट में 14 नए जज नियुक्त किए हैं?
केंद्र सरकार ने 19 सितंबर 2026 को दिल्ली (7 जज), झारखंड (3 जज), जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख (1 जज) और कर्नाटक (3 जज) — कुल चार उच्च न्यायालयों में 14 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी।
दिल्ली हाईकोर्ट में अभी कितने जज कार्यरत हैं और कितने पद खाली हैं?
दिल्ली उच्च न्यायालय में जजों की स्वीकृत संख्या 60 है। 7 नई नियुक्तियों के बाद भी यहाँ केवल 44 जज कार्यरत हैं और 16 पद अभी भी रिक्त हैं।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के लिए कितने नाम सुझाए थे?
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 10 सितंबर 2026 की बैठक में दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए 8 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए थे। केंद्र सरकार ने उनमें से 7 नामों को मंजूरी दी है और एक नाम अभी लंबित है।
झारखंड हाईकोर्ट में नई नियुक्तियों के बाद जजों की क्या स्थिति होगी?
झारखंड उच्च न्यायालय में स्वीकृत 25 पदों में से पहले 13 पर जज कार्यरत थे। मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा की नियुक्ति के बाद कार्यरत जजों की संख्या 16 हो जाएगी और 9 पद अभी भी रिक्त रहेंगे।
इन नियुक्तियों की घोषणा किसने और कैसे की?
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 19 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सभी नियुक्त जजों की सूची जारी करके इसकी जानकारी दी।
राष्ट्र प्रेस
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