सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में 19 जजों की नियुक्ति को दी हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 मई 2026 को हुई बैठक में मद्रास उच्च न्यायालय में 19 वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश नियुक्त करने के चार अलग-अलग प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान कर दी। यह निर्णय न्यायपालिका में रिक्त पदों को भरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
कॉलेजियम ने मंगलवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि 4 नवंबर 2025 के प्रस्ताव के अंतर्गत छह न्यायिक अधिकारियों को मद्रास उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश को अनुमोदित किया गया है। इनमें डॉ. पी. मुरुगन, एम.डी. सुमति, एस. अल्ली, सी. थिरुमगल चंद्रशेखर, धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और कार्तिकेयन बालाथंडायुथम के नाम शामिल हैं।
इसके साथ ही 21 नवंबर 2025 के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई, जिसमें छह वकीलों — नटराजन रमेश, जी.के. मुथुकुमार, रामकृष्णन राजेश विवेकानंथन, शंकरनारायणन रवीकुमार, नागराजन दिलीप कुमार और एलप्पन मनोहरन — को उच्च न्यायालय की पीठ में शामिल करने की सिफारिश की गई थी।
दिसंबर 2025 के प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
7 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव के तहत कॉलेजियम ने वकीलों कृष्णास्वामी गोविंदराजन, रजनीश पथियिल, के. अप्पादुरई उर्फ कंदावेल अप्पादुरई और रामासामी अनीता के नामों को मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त करने की स्वीकृति दी। 10 दिसंबर 2025 के एक अन्य प्रस्ताव में न्यायिक अधिकारियों शन्मुगम कार्तिकेयन, बालूचामी मुरुगेशन और एन. गुणशेखरन को भी न्यायाधीश पद के लिए अनुशंसित किया गया था, जिसे कॉलेजियम ने अनुमोदित कर दिया।
नियुक्ति प्रक्रिया: कैसे होती है जजों की नियुक्ति
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति एक बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत होती है। संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अपने दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श लेकर नामों का प्रस्ताव तैयार करते हैं। यह सिफारिश राज्य के मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल तक पहुँचती है, जो इसे आवश्यक दस्तावेजों सहित केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजते हैं।
इसके पश्चात केंद्र सरकार प्रस्ताव को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजती है, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम सिफारिश तय करते हैं। कॉलेजियम की मंजूरी के उपरांत सिफारिश पुनः केंद्र सरकार को भेजी जाती है। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर और न्याय विभाग द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ही नियुक्तियाँ प्रभावी होती हैं।
आम जनता और न्यायपालिका पर असर
मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए यह नियुक्तियाँ न्यायिक दक्षता बढ़ाने में सहायक मानी जा रही हैं। गौरतलब है कि देशभर के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों की समस्या लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इन 19 नई नियुक्तियों से मद्रास उच्च न्यायालय की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।
क्या होगा आगे
कॉलेजियम की सिफारिश अब केंद्र सरकार के पास जाएगी, जहाँ से राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और राजपत्र अधिसूचना के बाद नियुक्तियाँ औपचारिक रूप से लागू होंगी। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया में कुछ सप्ताह का समय लग सकता है।