सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब-हरियाणा और आंध्र प्रदेश HC में 13 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 मई 2026 को हुई अपनी बैठक में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में कुल 13 न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। इनमें वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी दोनों शामिल हैं। यह सिफारिश 5 मई 2026 को जारी आधिकारिक बयान के माध्यम से सार्वजनिक की गई।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए सिफारिशें
कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए कुल 10 अधिवक्ताओं के नाम अनुशंसित किए हैं। पहले बयान में तीन नाम — प्रविंद्र सिंह चौहान, राजेश गौड़ और मिंदरजीत यादव — शामिल हैं।
दूसरे बयान में सात और अधिवक्ताओं के नाम सम्मिलित हैं: मोनिका छिब्बर शर्मा, हरमीत सिंह देओल, पूजा चोपड़ा, सुनीश बिंदलिश, नवदीप सिंह, दिव्या शर्मा और रविंदर मलिक। इस प्रकार पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए कुल 10 नियुक्तियाँ प्रस्तावित हैं।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के लिए सिफारिशें
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के लिए कॉलेजियम ने तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इनमें सुनीता गंधम, अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतलपुडी के नाम शामिल हैं। ये तीनों न्यायिक सेवा से आते हैं, जो कॉलेजियम की न्यायिक अनुभव को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है।
नियुक्ति प्रक्रिया कैसे होती है
उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया ज्ञापन (MOP) के अनुसार, प्रस्ताव संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा आरंभ किया जाता है। यदि मुख्यमंत्री किसी नाम की अनुशंसा करना चाहते हैं, तो उसे विचारार्थ मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाना आवश्यक है।
राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर, प्रस्ताव प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित अनुशंसा केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री को भेजते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार प्रासंगिक पृष्ठभूमि जानकारी के साथ प्रस्ताव की जाँच करती है और इसे भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजती है।
मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय के दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों से परामर्श के बाद सिफारिश को अंतिम रूप देते हैं और आमतौर पर चार सप्ताह के भीतर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री को अपनी अनुशंसा भेजते हैं। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर के बाद नियुक्ति भारत के राजपत्र में अधिसूचित की जाती है।
न्यायपालिका में रिक्तियों का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की रिक्तियाँ न्यायिक लंबितता की एक प्रमुख वजह बनी हुई हैं। गौरतलब है कि कॉलेजियम प्रणाली के तहत की जाने वाली ऐसी सिफारिशें न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कार्यकुशलता दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन नियुक्तियों के अंतिम रूप लेने के बाद संबंधित उच्च न्यायालयों की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।