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दिल्ली हाईकोर्ट में 6 नए जजों की नियुक्ति, क्या हैं उनके कार्य अनुभव?

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दिल्ली हाईकोर्ट में 6 नए जजों की नियुक्ति, क्या हैं उनके कार्य अनुभव?

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट में 6 नए न्यायाधीशों ने शपथ ली है, जिसमें उनके कार्य अनुभव और उनकी यात्रा का विवरण है। आइए जानते हैं इन न्यायाधीशों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें और उनके योगदान के बारे में।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट में 6 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई है।
कामेश्वर राव का लौटना दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है।
न्यायपालिका में नए जजों की संख्या 40 हो गई है।
सभी नए जज सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित हैं।
नए जजों का अनुभव न्यायिक प्रक्रिया को और भी सशक्त बनाएगा।

नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएयस)। दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को 6 नए न्यायाधीशों ने शपथ ली। इनमें न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे, न्यायमूर्ति विवेक चौधरी, न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल, न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला शामिल हैं। शपथ समारोह में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने सभी नए जजों को शपथ दिलाई।

इस नियुक्ति के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है, जबकि स्वीकृत पदों की कुल संख्या 60 है। ये सभी जज सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अन्य हाईकोर्टों से दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए गए हैं।

न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव का नाम सबसे खास है, जो मई 2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट गए थे और अब अपने मूल कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट, में लौट आए हैं। उन्हें अप्रैल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज और मार्च 2015 में स्थायी जज बनाया गया था।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से आए हैं। उन्होंने 1988 में चंडीगढ़ में वकालत शुरू की थी और 2014 में सीनियर एडवोकेट बने। जुलाई 2017 में उन्हें अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था।

न्यायमूर्ति अरुण मोंगा राजस्थान हाईकोर्ट से स्थानांतरित हुए हैं। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली और 1991 में वकालत शुरू की। 1997-98 में दिल्ली आए और अक्टूबर 2018 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जज बने। नवंबर 2023 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट भेजा गया था।

न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला इलाहाबाद हाईकोर्ट से आए हैं। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की और 2003 में यूपी बार काउंसिल में नामांकन कराया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, इलाहाबाद और दिल्ली हाईकोर्ट में कई तरह के मामलों में वकालत की। अगस्त 2022 में वे अतिरिक्त जज और मार्च 2024 में स्थायी जज बने।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से आए हैं। उन्होंने 1988 में मेरठ यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और उसी साल एडवोकेट के रूप में नामांकन कराया। फरवरी 2017 में वे अतिरिक्त जज और मार्च 2018 में स्थायी जज बने।

न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव साम्ब्रे बॉम्बे हाईकोर्ट से आए हैं। उन्होंने 1992 में नागपुर यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और उसी साल वकालत शुरू की। जनवरी 2014 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का जज बनाया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे आम जनता को न्याय मिल सके।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट में नए न्यायाधीशों की संख्या कितनी है?
नई नियुक्तियों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 40 हो गई है।
न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव कब से न्यायपालिका में हैं?
न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव ने अप्रैल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में कार्यभार संभाला।
नए न्यायाधीशों का चयन कैसे किया गया?
नए न्यायाधीशों का चयन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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