सीजेआई सूर्यकांत ने 5 नए जजों को दिलाई शपथ, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 37 हुई
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 3 जून 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में पाँच नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई, जिससे देश की शीर्ष अदालत में कार्यरत जजों की कुल संख्या 37 हो गई है। जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। यह नियुक्तियाँ सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद संभव हुईं।
नियुक्ति की प्रक्रिया
22 मई और 27 मई को हुई कॉलेजियम बैठकों में इन पाँचों नामों की सिफारिश की गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहना को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की औपचारिक स्वीकृति दी। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि राष्ट्रपति ने सीजेआई से परामर्श के उपरांत इन नियुक्तियों को अनुमोदित किया।
नए न्यायाधीशों का परिचय
जस्टिस शील नागू को मई 2011 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। जुलाई 2024 में वे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने।
जस्टिस श्री चंद्रशेखर जनवरी 2013 में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए और जनवरी 2025 में बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला।
जस्टिस संजीव सचदेवा को अप्रैल 2013 में दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया, मार्च 2015 में वे स्थायी न्यायाधीश बने और जुलाई 2025 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।
जस्टिस अरुण पल्ली दिसंबर 2013 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने और अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर आसीन हुए।
वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना सर्वोच्च न्यायालय में दीर्घकाल से वकालत कर रही हैं और उन्होंने संवैधानिक, दीवानी तथा सेवा कानून से जुड़े अनेक महत्त्वपूर्ण मामलों का संचालन किया है। बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय की न्यायपीठ पर उनकी नियुक्ति उल्लेखनीय है।
सर्वोच्च न्यायालय पर असर
इन पाँच नियुक्तियों के साथ सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृत क्षमता 34 न्यायाधीशों (मुख्य न्यायाधीश सहित) की तुलना में कार्यरत संख्या 37 हो गई है। गौरतलब है कि न्यायिक रिक्तियाँ लंबे समय से लंबित मामलों की बड़ी संख्या के लिए एक प्रमुख कारण मानी जाती रही हैं। यह नियुक्तियाँ ऐसे समय में आई हैं जब देशभर की अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं और न्यायिक क्षमता विस्तार की माँग लगातार उठती रही है।
आगे की राह
नए न्यायाधीशों के शामिल होने से सर्वोच्च न्यायालय की पीठों की संख्या और संविधान पीठों की बैठकों की आवृत्ति में वृद्धि की संभावना है। न्यायिक सुधार के पैरोकारों का मानना है कि यह कदम लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में सहायक होगा।