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सुप्रीम कोर्ट में 5 नए न्यायाधीश नियुक्त, राष्ट्रपति मुर्मु ने दी मंजूरी; वी. सुब्रमणि मोहना बार से सीधे बेंच तक

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सुप्रीम कोर्ट में 5 नए न्यायाधीश नियुक्त, राष्ट्रपति मुर्मु ने दी मंजूरी; वी. सुब्रमणि मोहना बार से सीधे बेंच तक

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सर्वोच्च न्यायालय में पाँच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी। CJI सूर्यकांत के कॉलेजियम की सिफारिश पर चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना को नियुक्त किया गया — यह नियुक्तियाँ न्यायाधीशों की संख्या 37 करने के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में हुई हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 जून 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में 5 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी।
नियुक्त न्यायाधीश: न्यायमूर्ति शील नागू , न्यायमूर्ति चंद्रशेखर , न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा , न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी.
CJI न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने ये नाम राष्ट्रपति को भेजे थे।
सुब्रमणि मोहना बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय की पीठ तक पहुँचने वाली विरली उदाहरण हैं; उन्होंने 1983 में कोयंबटूर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के पहले बैच में प्रवेश लिया था।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2025 को न्यायाधीशों की संख्या 33 से 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी; संसद के अगले सत्र में विधेयक पेश होगा।

सर्वोच्च न्यायालय को 1 जून 2025 को पाँच नए न्यायाधीश मिले, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिशों पर अपनी मुहर लगाई। नव-नियुक्त न्यायाधीशों में चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, जो बार से सीधे शीर्ष अदालत की पीठ तक पहुँचने वाले विरले उदाहरणों में से एक हैं।

नियुक्त न्यायाधीशों के नाम

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद निम्नलिखित को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया है: न्यायमूर्ति शील नागू (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति चंद्रशेखर (बॉम्बे उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय) तथा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना

वी. सुब्रमणि मोहना: एक असाधारण सफर

वी. सुब्रमणि मोहना उन चुनिंदा विधिवेत्ताओं में शामिल हैं जिन्होंने वकालत से सीधे सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनने तक का सफर तय किया — एक ऐसी नियुक्ति जो न्यायपालिका में दुर्लभ मानी जाती है। वह एक ऐसे परिवार में जन्मीं जिसका कानून के पेशे से कोई संबंध नहीं था। वर्ष 1983 में जब भारत में पहली बार पाँच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम शुरू हुआ, तब उन्होंने कोयंबटूर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के उस ऐतिहासिक पहले बैच में प्रवेश लिया था।

न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की पृष्ठभूमि

यह नियुक्तियाँ ऐसे समय में आई हैं जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अनुसार यह अधिकार संसद के पास है। सरकार संसद के अगले सत्र में संबंधित विधेयक पेश करेगी, जिसके बाद 1956 के कानून में संशोधन किया जाएगा।

आगे क्या होगा

कानून लागू होने के बाद नव-सृजित रिक्त पदों को भरने के लिए कॉलेजियम अतिरिक्त नामों की सिफारिश कर सकेगा। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या में यह वृद्धि न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन पाँच नई नियुक्तियों के साथ शीर्ष अदालत की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्वपूर्ण है — यह उसी सप्ताह हुआ जब मंत्रिमंडल ने न्यायाधीशों की संख्या 37 करने को हरी झंडी दी। असली सवाल यह है कि क्या संख्या बढ़ाने से लंबित मामलों का बोझ कम होगा, जबकि मूल समस्या — पदों का लंबे समय तक रिक्त रहना — संरचनात्मक है। वी. सुब्रमणि मोहना की बार-से-बेंच नियुक्ति एक सकारात्मक संकेत है, जो न्यायपालिका में विविध पृष्ठभूमि के विधिवेत्ताओं को स्थान देने की दिशा में एक कदम है। लेकिन जब तक कॉलेजियम और सरकार के बीच सिफारिशों पर सहमति की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आती, तब तक ये नियुक्तियाँ व्यापक न्यायिक सुधार की कहानी नहीं बन सकतीं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट में नव-नियुक्त पाँच न्यायाधीश कौन हैं?
नव-नियुक्त पाँच न्यायाधीश हैं — न्यायमूर्ति शील नागू (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति चंद्रशेखर (बॉम्बे उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय), न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय) तथा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 जून 2025 को मंजूर की।
वी. सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति को विशेष क्यों माना जा रहा है?
वी. सुब्रमणि मोहना वकालत से सीधे सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनी हैं, जो न्यायपालिका में एक दुर्लभ उदाहरण है। उनका परिवार कानून के पेशे से नहीं जुड़ा था और उन्होंने 1983 में कोयंबटूर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के पाँच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम के पहले बैच में प्रवेश लिया था।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 37 कब तक होगी?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2025 को न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार संसद के अगले सत्र में संबंधित विधेयक पेश करेगी, जिसके बाद 1956 के कानून में संशोधन होगा और कॉलेजियम नए पदों के लिए नाम सुझा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति कैसे होती है?
संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं। व्यवहार में CJI की अध्यक्षता वाला कॉलेजियम नामों की सिफारिश सरकार को भेजता है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी से अंतिम रूप दिया जाता है।
इन नियुक्तियों का न्यायिक प्रणाली पर क्या असर पड़ेगा?
इन पाँच नई नियुक्तियों से सर्वोच्च न्यायालय की पीठों की संख्या बढ़ेगी और लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। जब न्यायाधीशों की संख्या 33 से 37 करने का कानून पारित होगा, तब कॉलेजियम और अधिक नियुक्तियों की सिफारिश कर सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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