पांगी बना हिमाचल का पहला प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल, ₹5 करोड़ रिवॉल्विंग फंड और जौ का MSP तय
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पांगी घाटी राज्य का पहला प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल घोषित हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने 19 जुलाई 2026 को यह जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम सतत विकास, रसायन मुक्त कृषि और जलवायु अनुकूल खेती को प्रोत्साहन देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस पहल के साथ सरकार ने ₹5 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड और प्राकृतिक तरीके से उगाई गई जौ (बार्ले) के लिए ₹60 प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी तय किया है।
मुख्य घटनाक्रम
पांगी को मॉडल उपमंडल का दर्जा देने के साथ सरकार ने किसानों को रासायनिक खाद छोड़ने के लिए ठोस आर्थिक प्रोत्साहन दिया है। ₹60 प्रति किलोग्राम का MSP बाज़ार दर से ऊपर रखा गया है, ताकि प्राकृतिक खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे ऊँचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में कम जनसंख्या, दुर्गम भूगोल और लंबी सर्दियाँ रासायनिक खेती को वैसे भी सीमित करती हैं — इसलिए इन्हें प्राकृतिक खेती के लिए आदर्श माना जा रहा है।
जनजातीय क्षेत्रों की विशेष स्थिति
सरकार के आँकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र हिमाचल के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत हैं, जबकि यहाँ केवल 3.92 लाख लोग निवास करते हैं — राज्य की कुल आबादी का मात्र 5.71 प्रतिशत। जनसंख्या घनत्व महज 7 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जबकि राज्य का औसत 123 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। यह असमानता ही इन इलाकों में विशेष नीतिगत ध्यान की ज़रूरत को रेखांकित करती है।
बजट और विकास निवेश
जनजातीय उपयोजना (STP) के तहत हर वर्ष कुल विकास बजट का 9 प्रतिशत इन क्षेत्रों के लिए आरक्षित किया जाता है। वर्ष 2024-25 में इस मद में ₹890.28 करोड़ और 2025-26 के लिए अनुसूचित जनजाति घटक के तहत ₹638.73 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में 2025-26 के दौरान 3,361 छात्रों को प्री-मैट्रिक, 5,693 को पोस्ट-मैट्रिक और 304 को मेधावी छात्रवृत्ति दी गई है।
स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सेवाएँ
जनजातीय क्षेत्रों में 2 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। 568 आंगनबाड़ी केंद्रों के ज़रिए 5,084 अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों को पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ दी जा रही हैं। महिला सशक्तिकरण के मोर्चे पर 3,234 महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों और आजीविका कार्यक्रमों के ज़रिए 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत पात्र महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार के अनुसार, जनजातीय क्षेत्रों में लिंगानुपात 1,000 पुरुषों पर 1,018 महिलाएँ है — राज्य के औसत 972 से बेहतर।
आगे की राह
सरकार ने होमस्टे स्थापित करने, विस्तार और उन्नयन के लिए ₹5 करोड़ तक के निवेश पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने की घोषणा की है, जिससे पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के 75 वर्षों के इतिहास में पहली बार काजा में हिमाचल दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसे समावेशी शासन की दिशा में प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।