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हिमाचल प्रदेश: CM सुक्खू ने लॉन्च की ₹2,688 करोड़ की HP-READY परियोजना, आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना पर जोर

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हिमाचल प्रदेश: CM सुक्खू ने लॉन्च की ₹2,688 करोड़ की HP-READY परियोजना, आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना पर जोर

सारांश

हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में 66 बादल फटने, 234 भूस्खलन और 121 फ्लैश फ्लड के बाद CM सुक्खू ने ₹2,688 करोड़ की HP-READY परियोजना लॉन्च की है — राहत से प्रतिरोध की ओर राज्य का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ₹2,688 करोड़ की HP-READY परियोजना का शुभारंभ किया।
परियोजना जनवरी 2026 से नवंबर 2030 तक लागू की जाएगी।
पिछले तीन वर्षों में राज्य में 66 बादल फटने , 234 भूस्खलन और 121 फ्लैश फ्लड दर्ज।
परिवहन, पेयजल, स्वच्छता और विद्युत अवसंरचना को पुनर्स्थापित व सुदृढ़ किया जाएगा।
पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्कूली बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होंगे।
एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई गठित की जाएगी और नियमित निगरानी सुनिश्चित होगी।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राज्य में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनज़र ₹2,688 करोड़ की 'हिमाचल प्रदेश रेजिलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी' (HP-READY) परियोजना का शुभारंभ किया है। यह परियोजना जनवरी 2026 से नवंबर 2030 तक क्रियान्वित की जाएगी और इसका मुख्य उद्देश्य राज्य को राहत-केंद्रित शासन से हटाकर आपदा-प्रतिरोधी प्रशासन की ओर ले जाना है।

क्यों पड़ी इस परियोजना की ज़रूरत

ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमाचल प्रदेश पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक जलवायु-संवेदनशील राज्यों में से एक बनता जा रहा है। आँकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में 66 से अधिक बादल फटने, 234 भूस्खलन और 121 फ्लैश फ्लड की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इन आपदाओं से बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है और सार्वजनिक अवसंरचना व निजी संपत्ति को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचा है। गौरतलब है कि यह आँकड़े हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव को रेखांकित करते हैं।

HP-READY परियोजना में क्या शामिल है

इस परियोजना के तहत आपदा-प्रभावित परिवहन नेटवर्क, पेयजल योजनाएँ, स्वच्छता प्रणालियाँ और विद्युत अवसंरचना को पुनर्स्थापित और सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मज़बूत करने, वैज्ञानिक भू-उपयोग योजना अपनाने तथा तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से सामुदायिक तैयारी को बेहतर बनाने पर विशेष बल दिया जाएगा।

परियोजना में आपदा जोखिम वित्तपोषण और बीमा तंत्र के लिए एक व्यापक प्रणाली विकसित करने की भी योजना है। आजीविका और रोज़गार के अवसर सृजित करना भी इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई गठित की जाएगी और नियमित निगरानी व मूल्यांकन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

सरकार पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्कूली बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगी, ताकि जमीनी स्तर पर आपदा तैयारी की संस्कृति विकसित हो सके। यह पहल सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करेगी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है।

मुख्यमंत्री सुक्खू का बयान

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, 'हिमाचल प्रदेश पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। पिछले तीन वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं ने हमें राहत-केंद्रित शासन से प्रतिरोधी-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।' उन्होंने यह भी कहा कि HP-READY जन सुरक्षा, आजीविका और विकास संबंधी परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक विस्तृत कार्य योजना है।

सुक्खू ने स्पष्ट किया कि इस पहल के तहत संवेदनशील ज़िलों और समुदायों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद जारी रह सके।

आगे की राह

HP-READY परियोजना हिमाचल के आपदा प्रबंधन ढाँचे में एक संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक है — यह केवल आपदा के बाद की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं, बल्कि पूर्व-तैयारी और दीर्घकालिक प्रतिरोध पर केंद्रित है। संस्थागत क्षमता निर्माण और मज़बूत वित्तीय तंत्र के साथ यह परियोजना 2030 तक राज्य की आपदा-सहनशीलता को नई दिशा देने का लक्ष्य रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

688 करोड़ की घोषणा नीतिगत भाषा में सही दिशा में है — 'राहत से प्रतिरोध' का बदलाव वही है जो पर्वतीय राज्यों को चाहिए। लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी: हिमाचल में अतीत में भी आपदा प्रबंधन के लिए बड़े बजट घोषित हुए, पर ज़मीनी स्तर पर संस्थागत क्षमता कमज़ोर रही। 66 बादल फटने और 234 भूस्खलन के बावजूद अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की पहुँच अभी भी सीमित है। जब तक संवेदनशील ज़िलों में वास्तविक अवसंरचना निर्माण और सामुदायिक प्रशिक्षण की जवाबदेही तय नहीं होती, यह परियोजना भी कागज़ी लक्ष्यों तक सिमट सकती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HP-READY परियोजना क्या है?
'हिमाचल प्रदेश रेजिलिएंट एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड डिजास्टर रिकवरी' (HP-READY) ₹2,688 करोड़ की राज्य सरकार की परियोजना है, जो जनवरी 2026 से नवंबर 2030 तक लागू होगी। इसका उद्देश्य आपदा-प्रतिरोधक अवसंरचना निर्माण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक तैयारी को मज़बूत करना है।
हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में कितनी आपदाएँ आई हैं?
आँकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश में 66 से अधिक बादल फटने, 234 भूस्खलन और 121 फ्लैश फ्लड की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इन आपदाओं से जनहानि के साथ-साथ सार्वजनिक अवसंरचना और निजी संपत्ति को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
HP-READY परियोजना से किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
इस परियोजना से परिवहन नेटवर्क, पेयजल योजनाएँ, स्वच्छता प्रणालियाँ और विद्युत अवसंरचना को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्कूली बच्चों को प्रशिक्षण के ज़रिये आपदा प्रबंधन में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने HP-READY के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों की आपदाओं ने राज्य को राहत-केंद्रित शासन से प्रतिरोधी-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने HP-READY को जन सुरक्षा, आजीविका और विकास परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बताया।
HP-READY परियोजना कब तक पूरी होगी और इसकी निगरानी कैसे होगी?
यह परियोजना नवंबर 2030 तक पूरी की जानी है। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई गठित की जाएगी और नियमित निगरानी व मूल्यांकन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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