10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बादल फटने की घटनाएँ बढ़ीं: CM सुक्खू ने जलाशयों के वाष्पीकरण और जलवायु परिवर्तन को बताया जिम्मेदार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बादल फटने की घटनाएँ बढ़ीं: CM सुक्खू ने जलाशयों के वाष्पीकरण और जलवायु परिवर्तन को बताया जिम्मेदार

सारांश

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने बादल फटने की बढ़ती घटनाओं के लिए जलाशयों के वाष्पीकरण और जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया है। 2023 में 51 मौतें, 23,000 घर तबाह — और अब ₹3,500 करोड़ की आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना योजना। पहाड़ी राज्य का यह संघर्ष आने वाले दशकों में पूरे देश की चुनौती बन सकता है।

मुख्य बातें

CM सुखविंदर सुक्खू ने 10 जुलाई को कहा कि बादल फटने की घटनाएँ जलाशयों के वाष्पीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही हैं।
राज्य सरकार ने ₹3,500 करोड़ की लागत से आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना विकसित करने का निर्णय लिया।
2023 की आपदा में 51 लोगों की मौत, 23,000 घर क्षतिग्रस्त और 75,000 पर्यटक फंसे थे।
क्षतिग्रस्त घरों का मुआवजा ₹1.30 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख किया गया।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी ने चंद्रताल झील से 300 पर्यटकों को बचाया।
2025 की आपदा में 2023 के अनुभव से बेहतर प्रतिक्रिया, अपेक्षाकृत कम नुकसान।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने शुक्रवार, 10 जुलाई को शिमला में कहा कि राज्य में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन और बड़े बांधों द्वारा निर्मित जलाशयों से बढ़ते वाष्पीकरण को प्रमुख कारण माना जा सकता है। उन्होंने यह बात पश्चिमी हिमालय में आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना योजना पर आयोजित कार्यशाला के समापन सत्र में कही।

आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना की योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए राज्य सरकार ने ₹3,500 करोड़ के अनुमानित व्यय से आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना विकसित करने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार इस निवेश से राज्य की आपदा-सहन क्षमता मजबूत होगी और भविष्य में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय राज्य होने के कारण कठिन भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अन्य पहाड़ी राज्य भी मानसून से जुड़ी आपदाओं की तीव्रता में वृद्धि दर्ज कर रहे हैं।

2023 की विनाशकारी आपदा का स्मरण

सुक्खू ने 2023 की आपदा को याद करते हुए बताया कि उस दौरान राज्य भर में लगभग 75,000 पर्यटक फंस गए थे। सरकार ने समन्वित प्रयासों से फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित निकाला और युद्धस्तर पर आवश्यक सेवाएं बहाल कीं।

उन्होंने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी के प्रयासों की विशेष सराहना की, जिन्होंने स्वयं चंद्रताल झील से लगभग 300 फंसे पर्यटकों को निकालने के बचाव अभियान का नेतृत्व किया था।

नुकसान का आकलन और राहत नीति में बदलाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2023 की आपदा में लगभग 23,000 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए और 51 लोगों की जान गई। प्रभावित परिवारों को राहत देते हुए सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवजे को ₹1.30 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख कर दिया — जिसे उन्होंने राहत नीति में ऐतिहासिक बदलाव बताया।

गौरतलब है कि यह मुआवजा वृद्धि छह गुने से अधिक है, जो राज्य की बदलती आपदा-प्रबंधन प्राथमिकताओं को दर्शाती है।

2025 की आपदा में बेहतर प्रतिक्रिया

सुक्खू ने कहा कि 2023 की आपदा से मिले सबक ने सरकार को 2025 की आपदा के दौरान कहीं अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया। उनके अनुसार स्थिति की गंभीरता के बावजूद इस बार अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ।

मुख्य सचिव केके पंत ने भी कार्यशाला में कहा कि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी और बढ़ती चुनौती के रूप में सामने आया है, और इससे निपटने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत दृष्टिकोण अपरिहार्य है।

आगे की राह: साहसिक नीतिगत निर्णय जरूरी

मुख्यमंत्री ने चेताया कि हिमाचल प्रदेश जो चुनौतियाँ आज झेल रहा है, वैसी ही परिस्थितियाँ आने वाले वर्षों में अन्य राज्यों को भी झेलनी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए साहसिक नीतिगत निर्णय और विकास पद्धतियों में आमूल बदलाव की आवश्यकता होगी। सरकार व्यापक जनहित में नुकसान को न्यूनतम करने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके लिए अभी व्यापक शोध-समर्थन की आवश्यकता है — इसे केवल राजनीतिक बयान की तरह नहीं, बल्कि नीति-निर्माण के लिए गंभीरता से जाँचा जाना चाहिए। ₹3,500 करोड़ की आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना योजना सही दिशा में कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह राशि पहाड़ी भूगोल की जटिलताओं के अनुरूप खर्च होगी या महज सड़क-पुल पुनर्निर्माण में सिमट जाएगी। 2023 के बाद मुआवजे में छह गुना वृद्धि सराहनीय है, किंतु दीर्घकालिक पुनर्वास और भू-उपयोग नीति पर चुप्पी चिंताजनक है। जब तक विकास परियोजनाओं की पर्यावरणीय समीक्षा और आपदा-जोखिम मानचित्रण को अनिवार्य नहीं बनाया जाता, तब तक हर मानसून एक नई आपदा की पूर्वसूचना बनता रहेगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM सुक्खू ने बादल फटने की घटनाओं के लिए क्या कारण बताए?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि बादल फटने की बढ़ती घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन और बड़े बांधों द्वारा निर्मित जलाशयों से बढ़ते वाष्पीकरण को प्रमुख कारण माना जा सकता है। उन्होंने यह बात 10 जुलाई को शिमला में आयोजित एक कार्यशाला के समापन सत्र में कही।
हिमाचल प्रदेश की ₹3,500 करोड़ की आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना योजना क्या है?
यह राज्य सरकार की एक योजना है जिसमें ₹3,500 करोड़ के अनुमानित व्यय से आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचा विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करना और राज्य की आपदा-सहन क्षमता को मजबूत करना है।
2023 की हिमाचल प्रदेश आपदा में कितना नुकसान हुआ था?
2023 की आपदा में 51 लोगों की जान गई, लगभग 23,000 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए और राज्य भर में करीब 75,000 पर्यटक फंस गए थे। सरकार ने समन्वित प्रयासों से पर्यटकों को सुरक्षित निकाला और आवश्यक सेवाएं बहाल कीं।
2023 की आपदा के बाद मुआवजे में क्या बदलाव हुआ?
सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवजे की राशि ₹1.30 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख कर दी — यानी छह गुने से अधिक की वृद्धि। मुख्यमंत्री ने इसे राहत नीति में ऐतिहासिक बदलाव बताया।
क्या 2025 की आपदा में नुकसान 2023 से कम रहा?
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार 2023 के अनुभव से मिले सबक ने सरकार को 2025 की आपदा के दौरान अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया, जिससे स्थिति की गंभीरता के बावजूद अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ। हालाँकि 2023 और 2025 दोनों आपदाओं ने बुनियादी ढाँचे को व्यापक क्षति पहुँचाई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले