घटिया उर्वरक-कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों की बैंक गारंटी होगी जब्त, योगी सरकार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 10 जुलाई 2026 को गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक कड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्ता-परीक्षित उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व एवं कीटनाशक ही वितरित कर सकेंगी — और नियम उल्लंघन पर संबंधित मिल की बैंक गारंटी जब्त तक की जा सकती है।
नई व्यवस्था की मुख्य शर्तें
उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने प्रदेश की समस्त चीनी मिलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार प्रत्येक बैच के कृषि निवेश की गुणवत्ता जाँच एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में अनिवार्य रूप से करानी होगी। केवल वही उत्पाद किसानों तक पहुँचेंगे जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और कीटनाशक अधिनियम 1968 के मानकों पर खरे उतरते हों।
भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किसी भी कीटनाशक का वितरण किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित उत्पादों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
किसान की सहमति अनिवार्य
नए दिशा-निर्देशों में किसानों के अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। किसी भी किसान को उसकी स्पष्ट माँग और सहमति के बिना कोई कृषि निवेश उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। व्यावसायिक लाभ के लिए लक्ष्य निर्धारित कर अनावश्यक उत्पाद थोपने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कृषि निवेश केवल किसान की वास्तविक आवश्यकता और उसके गन्ना क्षेत्रफल के अनुपात में ही दिया जाएगा।
मिलों पर पूरी जवाबदेही
सरकार ने कृषि निवेश की गुणवत्ता की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिलों पर तय की है — चाहे वितरण स्वयं मिल करे या किसी एजेंसी के माध्यम से। जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त नियमित निरीक्षण एवं निगरानी करेंगे। यदि कोई मिल किसानों की सहमति के बिना या घटिया कृषि निवेश वितरित करती पाई गई, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।
ऐसे मामलों में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि की वसूली या समायोजन की व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी जब्त भी की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के विरुद्ध भी कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
गन्ना खेती पर अपेक्षित असर
गन्ना एवं कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाज़ार में उपलब्ध कीटनाशकों की नियमित सैंपलिंग और गुणवत्ता जाँच करेंगे। सरकार का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से गन्ना खेती अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनेगी। गुणवत्तापूर्ण कृषि निवेश उचित मूल्य पर मिलने से खेती की लागत नियंत्रित होगी, मृदा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, और गन्ने की उत्पादकता के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और चीनी मिलों द्वारा किसानों को घटिया कृषि उत्पाद बेचे जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निरीक्षण तंत्र कितनी प्रभावशीलता से ज़मीन पर लागू होता है।