11 जुलाई 2026
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घटिया उर्वरक-कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों की बैंक गारंटी होगी जब्त, योगी सरकार का बड़ा फैसला

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घटिया उर्वरक-कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों की बैंक गारंटी होगी जब्त, योगी सरकार का बड़ा फैसला

सारांश

योगी सरकार ने चीनी मिलों पर शिकंजा कसा है — घटिया उर्वरक या कीटनाशक देने पर बैंक गारंटी जब्ती तक का प्रावधान। गन्ना आयुक्त के नए दिशा-निर्देशों में NABL लैब जाँच अनिवार्य और किसान की सहमति के बिना कोई उत्पाद देना पूरी तरह प्रतिबंधित।

मुख्य बातें

योगी आदित्यनाथ सरकार ने 10 जुलाई 2026 को गन्ना किसानों के लिए कृषि निवेश गुणवत्ता नीति लागू की।
सभी चीनी मिलों को प्रत्येक बैच की जाँच NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में करानी होगी।
नियम उल्लंघन पर संबंधित मिल की बैंक गारंटी जब्त की जा सकेगी और गन्ना मूल्य से वसूली समाप्त होगी।
किसान की स्पष्ट सहमति के बिना कोई भी कृषि निवेश देना पूर्णतः प्रतिबंधित।
भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कीटनाशकों का वितरण किसी भी स्थिति में नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने वालों पर कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 10 जुलाई 2026 को गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक कड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्ता-परीक्षित उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व एवं कीटनाशक ही वितरित कर सकेंगी — और नियम उल्लंघन पर संबंधित मिल की बैंक गारंटी जब्त तक की जा सकती है।

नई व्यवस्था की मुख्य शर्तें

उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने प्रदेश की समस्त चीनी मिलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार प्रत्येक बैच के कृषि निवेश की गुणवत्ता जाँच एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में अनिवार्य रूप से करानी होगी। केवल वही उत्पाद किसानों तक पहुँचेंगे जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और कीटनाशक अधिनियम 1968 के मानकों पर खरे उतरते हों।

भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किसी भी कीटनाशक का वितरण किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित उत्पादों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

किसान की सहमति अनिवार्य

नए दिशा-निर्देशों में किसानों के अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। किसी भी किसान को उसकी स्पष्ट माँग और सहमति के बिना कोई कृषि निवेश उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। व्यावसायिक लाभ के लिए लक्ष्य निर्धारित कर अनावश्यक उत्पाद थोपने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कृषि निवेश केवल किसान की वास्तविक आवश्यकता और उसके गन्ना क्षेत्रफल के अनुपात में ही दिया जाएगा।

मिलों पर पूरी जवाबदेही

सरकार ने कृषि निवेश की गुणवत्ता की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिलों पर तय की है — चाहे वितरण स्वयं मिल करे या किसी एजेंसी के माध्यम से। जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त नियमित निरीक्षण एवं निगरानी करेंगे। यदि कोई मिल किसानों की सहमति के बिना या घटिया कृषि निवेश वितरित करती पाई गई, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।

ऐसे मामलों में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि की वसूली या समायोजन की व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी जब्त भी की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के विरुद्ध भी कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

गन्ना खेती पर अपेक्षित असर

गन्ना एवं कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाज़ार में उपलब्ध कीटनाशकों की नियमित सैंपलिंग और गुणवत्ता जाँच करेंगे। सरकार का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था से गन्ना खेती अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनेगी। गुणवत्तापूर्ण कृषि निवेश उचित मूल्य पर मिलने से खेती की लागत नियंत्रित होगी, मृदा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, और गन्ने की उत्पादकता के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और चीनी मिलों द्वारा किसानों को घटिया कृषि उत्पाद बेचे जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निरीक्षण तंत्र कितनी प्रभावशीलता से ज़मीन पर लागू होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। उत्तर प्रदेश में हज़ारों गन्ना किसानों और सैकड़ों मिलों के बीच NABL जाँच और नियमित निरीक्षण का ढाँचा खड़ा करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। बैंक गारंटी जब्ती का प्रावधान कागज़ पर कठोर दिखता है, पर अतीत में ऐसे दंडात्मक उपाय अक्सर राजनीतिक दबाव में शिथिल पड़ जाते हैं। जिला गन्ना अधिकारियों की क्षमता और स्वायत्तता पर यह नीति टिकी है — जो खुद एक कमज़ोर कड़ी रही है। बिना स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट और पारदर्शी शिकायत निवारण के, यह व्यवस्था महज़ एक और अधिसूचना बनकर रह सकती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार के नए आदेश में चीनी मिलों पर क्या पाबंदियाँ लगाई गई हैं?
नए दिशा-निर्देशों के तहत चीनी मिलें केवल NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जाँचे गए प्रमाणित उर्वरक और कीटनाशक ही किसानों को दे सकेंगी। भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कीटनाशकों का वितरण पूरी तरह वर्जित है और किसान की लिखित सहमति के बिना कोई भी उत्पाद देना मना है।
बैंक गारंटी जब्त कब और कैसे होगी?
यदि कोई चीनी मिल घटिया कृषि निवेश वितरित करती पाई गई या किसान की सहमति के बिना उत्पाद दिए, तो गन्ना मूल्य से वसूली की व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मिल की बैंक गारंटी जब्त की जा सकेगी। निरीक्षण जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त करेंगे।
NABL प्रयोगशाला जाँच क्यों अनिवार्य की गई है?
NABL (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज़) मान्यता प्राप्त लैब राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत गुणवत्ता मानकों पर परीक्षण करती हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों तक पहुँचने वाले उर्वरक और कीटनाशक उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 और कीटनाशक अधिनियम 1968 के मानकों पर खरे हों।
इस फैसले से गन्ना किसानों को क्या फायदा होगा?
किसानों को नकली और घटिया कृषि उत्पादों से राहत मिलेगी, खेती की लागत नियंत्रित होगी और गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी। साथ ही व्यावसायिक दबाव में अनावश्यक उत्पाद थोपे जाने की प्रथा पर भी रोक लगेगी।
कौन से कृषि उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी?
ICAR, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित उर्वरकों और फसल सुरक्षा उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। वितरण किसान की वास्तविक आवश्यकता और उसके गन्ना क्षेत्रफल के अनुपात में ही होगा।
राष्ट्र प्रेस
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