26 जून 2026
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यूपी में गन्ना किसानों का जीपीएस सर्वे 1 मई से, CM योगी के आदेश पर नई नीति लागू

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यूपी में गन्ना किसानों का जीपीएस सर्वे 1 मई से, CM योगी के आदेश पर नई नीति लागू

सारांश

उत्तर प्रदेश में CM योगी के आदेश पर गन्ना किसानों की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से 30 जून 2026 तक होगा। दो सदस्यीय टीम खेत पर पहुंचकर डेटा सर्वर पर फीड करेगी। 30 सितंबर तक पंजीकृत किसानों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा।

मुख्य बातें

1 मई 2026 से 30 जून 2026 तक यूपी में गन्ना किसानों की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण होगा।
CM योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने नई सर्वेक्षण नीति जारी की।
सर्वेक्षण दल में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी होंगे, जिन्हें पहले प्रशिक्षित किया जाएगा।
सर्वेक्षण से 3 दिन पहले किसानों को मोबाइल SMS से सूचना दी जाएगी और सर्वे के बाद खेत की जानकारी भी SMS पर मिलेगी।
30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत किसानों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
पंजीकरण शुल्क: SC/ST किसान ₹10 , लघु किसान ₹100 , अन्य किसान ₹200 ।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए नई गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी है। इस नीति के तहत प्रदेश के सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों की फसल का जीपीएस आधारित सर्वेक्षण कराया जाएगा, जो 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक पूरा किया जाएगा। यह पहल गन्ना उत्पादन के डेटा को पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली और टीम संरचना

गन्ना सर्वेक्षण दल में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी को शामिल किया जाएगा। सर्वेक्षण से पूर्व इन दोनों सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि डेटा संग्रह में कोई त्रुटि न हो।

सर्वेक्षण टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस तकनीक के माध्यम से उत्पादन का संपूर्ण डेटा सीधे विभाग के केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करेगी। सर्वेक्षण के दौरान किसान की उपस्थिति अनिवार्य होगी। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म एवं अन्य विवरण एसएमएस के माध्यम से संबंधित किसान को भेजे जाएंगे।

किसानों को तीन दिन पहले मिलेगी सूचना

सर्वेक्षण की तारीख से तीन दिन पूर्व सभी पंजीकृत गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए सूचित किया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसान समय पर खेत पर उपस्थित रह सकें और सर्वेक्षण बाधित न हो।

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारंभ होकर 30 जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी गन्ना कृषक की सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट यूपी भूलेख पर जाकर किया जा सकता है।

डेटा पारदर्शिता और ऑनलाइन पोर्टल

चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करेंगी और अपनी स्वयं की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करेंगी। इससे गन्ना उत्पादन के आंकड़ों में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।

यह व्यवस्था उस पुरानी समस्या का समाधान करने की कोशिश है जिसमें गन्ने के वास्तविक उत्पादन और दर्ज उत्पादन के बीच अंतर के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। जीपीएस आधारित सर्वेक्षण से अब खेत की सटीक माप और उत्पादन क्षमता का आकलन संभव होगा।

नए पंजीकरण और शुल्क संरचना

गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिल सकेगा। उपज वृद्धि के लिए सर्वेक्षण प्रारंभ से 30 सितंबर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

पंजीकरण शुल्क की बात करें तो अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों से मात्र ₹10, लघु कृषकों से ₹100 और अन्य कृषकों से ₹200 प्रति कृषक शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क संरचना छोटे और वंचित वर्ग के किसानों को राहत देने की दृष्टि से तय की गई है।

व्यापक संदर्भ और प्रभाव विश्लेषण

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां लाखों किसान परिवारों की आजीविका गन्ने की फसल पर निर्भर है। पहले गन्ना सर्वेक्षण मैन्युअल रूप से होता था जिसमें गड़बड़ी की शिकायतें आम थीं। जीपीएस तकनीक के उपयोग से अब डेटा में हेरफेर की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

गौरतलब है कि योगी सरकार पिछले कुछ वर्षों से कृषि क्षेत्र में डिजिटल सुधारों पर जोर दे रही है। यूपी भूलेख से लेकर गन्ना पर्ची कैलेंडर तक, सरकार ने किसानों को ऑनलाइन सेवाएं देने की कोशिश की है। यह जीपीएस सर्वेक्षण नीति उसी कड़ी का अगला और महत्वपूर्ण चरण है।

आने वाले दिनों में सर्वेक्षण दलों का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 1 मई 2026 से पूरे प्रदेश में एक साथ यह अभियान शुरू होगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपना मोबाइल नंबर विभाग में अपडेट रखें ताकि एसएमएस सूचना समय पर मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा जमीनी क्रियान्वयन में होगी। दशकों से मैन्युअल सर्वेक्षण में होने वाली गड़बड़ियों से किसान त्रस्त रहे हैं — जीपीएस डेटा इस समस्या का तकनीकी समाधान है, पर यह तभी सफल होगा जब सर्वेक्षण दल प्रशिक्षित हों और किसानों तक SMS समय पर पहुंचे। यह भी ध्यान देने योग्य है कि यूपी में गन्ना बकाया भुगतान की समस्या अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुई है — डेटा पारदर्शिता के साथ-साथ भुगतान पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। यह नीति सही दिशा में है, लेकिन किसानों को राहत तभी मिलेगी जब डिजिटल डेटा का उपयोग उनके हक में हो, न केवल सरकारी रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में गन्ना जीपीएस सर्वेक्षण कब से शुरू होगा?
उत्तर प्रदेश में गन्ना जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। यह सर्वेक्षण पेराई सत्र 2026-27 के लिए किया जाएगा।
गन्ना सर्वेक्षण के दौरान किसान को क्या करना होगा?
सर्वेक्षण के दौरान किसान का खेत पर मौजूद रहना अनिवार्य है। सर्वेक्षण से तीन दिन पहले मोबाइल SMS के जरिए सूचना दी जाएगी।
गन्ना सर्वेक्षण नीति किसने जारी की और क्यों?
यह नीति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने जारी की है। इसका उद्देश्य गन्ना उत्पादन डेटा को पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है।
नए गन्ना किसान पंजीकरण की अंतिम तारीख क्या है?
नए गन्ना किसान 30 सितंबर 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं। इसी तारीख तक पंजीकृत कृषकों को गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
गन्ना सर्वेक्षण में पंजीकरण शुल्क कितना है?
अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों से ₹10, लघु कृषकों से ₹100 और अन्य कृषकों से ₹200 प्रति कृषक शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क उपज बढ़ोत्तरी आवेदन के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
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