मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के महत्व को बताया

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मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के महत्व को बताया

सारांश

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस वर्ष एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार इस क्षेत्र में अनेक पहल कर रही है, जिससे किसानों को लाभ मिल सके।

Key Takeaways

  • हिमाचल प्रदेश में एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य।
  • 222,893 किसान और बागवानी परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।
  • प्राकृतिक खेती योजना के तहत रासायनिक पदार्थों का कम उपयोग।
  • उच्चतम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की पेशकश।
  • पांगी उपमंडल प्राकृतिक कृषि उपमंडल के रूप में जाना जाता है।

शिमला, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को जानकारी दी कि कृषि विभाग ने इस वर्ष प्राकृतिक खेती से एक लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। इससे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ मिल रहा है।

अब तक 222,893 किसान और बागवानी परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती में लगे दो लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें से 198,000 किसानों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं।

प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत रासायनिक पदार्थों के उपयोग को कम करने पर जोर दिया जाता है, जबकि स्थानीय गोबर, गोमूत्र और वनस्पति संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।

इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों में पर्यावरण संरक्षण, फसल विविधता को बढ़ाना और खेती की लागत को कम करना शामिल है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को उचित प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक उपज के लिए देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की पेशकश कर रही है।

इस वर्ष प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्का का 40 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए, पांगी घाटी से प्राप्त जौ का 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए और प्राकृतिक हल्दी का 90 रुपए से बढ़ाकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।

पांगी उपमंडल को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक कृषि उपमंडल घोषित किया गया है।

अदरक को भी पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में लाया गया है और इसका मूल्य 30 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, गाय के दूध का क्रय मूल्य बढ़ाकर 61 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध का क्रय मूल्य 71 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, क्योंकि लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। इनमें से 53.95 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 14.70 प्रतिशत का योगदान देता है।

Point of View

NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

प्राकृतिक खेती का क्या महत्व है?
प्राकृतिक खेती से किसानों को कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त होता है और यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।
राज्य सरकार किसानों को किस प्रकार का समर्थन देती है?
राज्य सरकार प्राकृतिक उपज के लिए उच्चतम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान कर रही है।
कितने किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई है?
अब तक 222,893 किसान और बागवानी परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।
पांगी उपमंडल का विशेष महत्व क्या है?
पांगी उपमंडल को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक कृषि उपमंडल घोषित किया गया है।
प्राकृतिक खेती योजना के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
इस योजना के मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, फसल विविधता को बढ़ावा देना और खेती की लागत को कम करना हैं।
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