रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सारांश
Key Takeaways
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है।
- 26 भारतीय नागरिक रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हुए हैं।
- परिवारों ने मानव तस्करी और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
- भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की मांग की गई है।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जवाब मांगा गया है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे 26 भारतीय नागरिकों के परिवारों द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और विस्तृत उत्तर की मांग की है।
याचिका में यह बताया गया है कि ये सभी भारतीय नागरिक देश में सक्रिय कुछ एजेंटों के माध्यम से रूस गए थे, जिन्होंने उन्हें वहां बेहतर नौकरी का आश्वासन दिया था। परिवारों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद इन लोगों को जबरन रूसी सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया, जहां उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
याचिका में कहा गया है कि इनमें से अधिकांश लोग पंजाब और हरियाणा से हैं, जिन्होंने विदेश जाकर सुरक्षित रोजगार की उम्मीद में यह कदम उठाया था। परिजनों का कहना है कि एजेंटों ने उनसे मोटी रकम लेकर उन्हें गलत जानकारी दी और सुरक्षित नौकरी का वादा किया। वास्तविकता में उन्हें खतरनाक युद्ध परिस्थितियों में धकेल दिया गया।
परिवारों ने अदालत से अनुरोध किया है कि भारत सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और इन सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि कई लोगों से लंबे समय से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और यह भी पूछा है कि इन नागरिकों की सुरक्षा और वापसी के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
इस बीच, परिजनों का यह भी कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं मानव तस्करी और धोखाधड़ी के गंभीर मामलों की ओर इशारा करती हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकार से उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द से जल्द इन भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी कदम उठाएगी।