सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हुई, राष्ट्रपति मुर्मु ने अध्यादेश को दी मंजूरी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़कर 37 हुई, राष्ट्रपति मुर्मु ने अध्यादेश को दी मंजूरी

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से 37 करने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। CJI सहित कुल स्वीकृत पद अब 38 होंगे। 2019 के बाद यह पहला विस्तार है और लंबित मामलों के बोझ को कम करना इसका मुख्य लक्ष्य है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 17 मई 2026 को 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' को मंजूरी दी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई; CJI सहित कुल पद 38 होंगे।
इससे पहले 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
पिछली बार 2019 में जजों की संख्या 30 से 33 की गई थी; यह सात वर्षों में पहला विस्तार है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर जानकारी साझा की; 1956 के मूल अधिनियम में यह संशोधन किया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 17 मई 2026 को 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी, जिससे देश की सर्वोच्च अदालत में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई है। यह संख्या भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से अलग है, अर्थात् CJI सहित कुल स्वीकृत पद अब 38 हो जाएंगे। लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को देखते हुए यह कदम न्यायिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अध्यादेश की पृष्ठभूमि

5 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026' को संसद में पेश करने की स्वीकृति दी गई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चार नए जजों के पद सृजित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी। राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने से यह निर्णय अब विधिक रूप से प्रभावी हो गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस निर्णय की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956' में संशोधन करते हुए इस अध्यादेश को अनुमति प्रदान की है। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते कार्यभार और लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए यह कदम अपरिहार्य हो गया था।

ऐतिहासिक संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से जुड़ा पहला कानून 1956 में अस्तित्व में आया था। तब से न्यायपालिका की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे हैं। सबसे हालिया बदलाव 2019 में हुआ था, जब जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब 2026 में यह संख्या 37 (CJI के अतिरिक्त) कर दी गई है — सात वर्षों में पहली बार इतना बड़ा विस्तार।

आम जनता पर असर

रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में इस समय लाखों मामले लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ने से अतिरिक्त पीठों का गठन संभव होगा, जिससे सुनवाई की गति तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विशेष रूप से उन नागरिकों को राहत मिलेगी जिनके मामले वर्षों से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।

क्या होगा आगे

अध्यादेश के लागू होने के बाद नए जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया कॉलेजियम प्रणाली के तहत आगे बढ़ेगी। संसद के अगले सत्र में इस अध्यादेश की जगह विधेयक पारित कराना होगा, अन्यथा यह छह सप्ताह के भीतर निष्प्रभावी हो जाएगा। न्यायिक सुधार के पैरोकार इसे सही दिशा में उठाया गया कदम मानते हैं, हालांकि उनका यह भी कहना है कि केवल संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं — नियुक्तियों में पारदर्शिता और विविधता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अकेले लंबित मामलों की समस्या का समाधान नहीं है — असली चुनौती नियुक्ति प्रक्रिया की गति और कॉलेजियम की पारदर्शिता है। 2019 में 30 से 33 की गई संख्या के बाद भी लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी नहीं आई, जो बताता है कि संरचनात्मक सुधार के बिना संख्या-वृद्धि सीमित असर ही दिखाती है। अध्यादेश का रास्ता चुनना यह भी संकेत देता है कि सरकार संसदीय बहस की प्रतीक्षा किए बिना त्वरित कार्रवाई करना चाहती थी — इस पर विपक्ष के सवाल उठना स्वाभाविक है। देखना होगा कि नई पीठें वास्तव में कितनी जल्दी गठित होती हैं और नागरिकों को न्याय मिलने की रफ्तार बदलती है या नहीं।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या कितनी हो गई है?
'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' के तहत जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को मिलाकर कुल स्वीकृत पद अब 38 होंगे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने यह अध्यादेश कब जारी किया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 17 मई 2026 को इस अध्यादेश को मंजूरी प्रदान की। इससे पहले 5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चार नए जजों के पद सृजित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कार्यभार अत्यधिक हो गया है। जजों की संख्या बढ़ने से अतिरिक्त पीठें गठित की जा सकेंगी, जिससे सुनवाई में तेजी आने और लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या कब बढ़ाई गई थी?
2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। उससे पहले 1956 में बने मूल अधिनियम के तहत समय-समय पर इसमें बदलाव होते रहे हैं। 2026 का यह संशोधन सात वर्षों में पहला विस्तार है।
अध्यादेश के बाद नए जजों की नियुक्ति कैसे होगी?
नए जजों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली के तहत होगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज सिफारिश करते हैं। अध्यादेश को संसद के अगले सत्र में विधेयक के रूप में पारित कराना होगा, अन्यथा यह छह सप्ताह में स्वतः निष्प्रभावी हो जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले