CJI जस्टिस सूर्यकांत ने बनाई ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी, 31 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने बनाई ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी, 31 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

सारांश

CJI जस्टिस सूर्यकांत ने देश की अदालतों के बुनियादी ढाँचे को दुरुस्त करने के लिए 5 सदस्यीय ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी बनाई है। अनुमानित ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ के सुधार कार्य का रोडमैप 31 अगस्त तक प्रस्तुत होगा — यह न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

CJI जस्टिस सूर्यकांत ने 12 मई 2025 को ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी का गठन किया।
कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के जज जस्टिस अरविंद कुमार करेंगे; इसमें 5 सदस्य हैं।
देशभर की अदालतों के बुनियादी ढाँचे को सुधारने पर ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान।
कमेटी को 31 अगस्त 2025 तक रिपोर्ट सौंपनी है, जो संजीव सान्याल (PM की आर्थिक सलाहकार परिषद) को दी जाएगी।
ई-कोर्ट डिजिटलीकरण, आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स और न्यायिक कर्मचारियों के कार्यस्थल सुधार कमेटी के प्रमुख एजेंडे में हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने 12 मई 2025 को देशभर की अदालतों में बुनियादी ढाँचे की कमियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी' का गठन किया है। इस कमेटी का प्राथमिक उद्देश्य देश की अदालतों में मौजूद बुनियादी ढाँचे की कमियों का व्यापक आकलन करना और उन्हें दूर करने के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है। अनुमान के अनुसार, इस सुधार कार्य पर ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक का खर्च आने की संभावना है।

कमेटी की संरचना और सदस्य

सर्वोच्च न्यायालय के जज जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता में गठित इस 5 सदस्यीय कमेटी में कलकत्ता उच्च न्यायालय के जज जस्टिस दिबांगशू बसाक, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जज जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा, बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज जस्टिस सोमशेखर सुंदरासन और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के महानिदेशक को शामिल किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल इस कमेटी के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएँगे।

रिपोर्ट की समयसीमा और दायरा

कमेटी को 31 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल को प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट में न्यायिक ढाँचे के विकास, पूंजीगत खर्च और दीर्घकालिक योजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।

मुख्य कार्यक्षेत्र

कमेटी अदालतों में जजों, वकीलों, वादकारियों और आम नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकताओं का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही मामलों के त्वरित निपटारे के लिए तकनीकी संसाधनों के उपयोग, ई-कोर्ट व्यवस्था के तहत डिजिटलीकरण और कंप्यूटरीकरण को सुदृढ़ करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश की अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं और न्यायिक बुनियादी ढाँचे की कमी को न्याय में देरी का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

डिजिटल और भौतिक सुधारों पर जोर

नागरिकों को न्यायिक सेवाएँ सुलभ रूप से उपलब्ध कराने, डिजिटल खाई को पाटने, आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित करने और न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालय कर्मचारियों के कार्यस्थलों को बेहतर बनाने जैसे सभी पहलुओं पर कमेटी विशेष ध्यान देगी। यह पहल न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की दिशा में एक दूरगामी प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

आगे की राह

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार और न्यायपालिका मिलकर न्यायिक ढाँचे के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने की स्थिति में होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रिपोर्ट की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो न्याय तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से ₹50,000 करोड़ का अनुमानित खर्च अपने आप में एक बड़ा आँकड़ा है, लेकिन असली सवाल यह है कि रिपोर्ट की सिफारिशें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बजट साझेदारी में कैसे तब्दील होंगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में करोड़ों मामले लंबित हैं और न्यायिक खाली पदों की समस्या भी अनसुलझी है — केवल भवन बनाने से न्याय में देरी नहीं रुकेगी। कमेटी का रिपोर्ट PM की आर्थिक सलाहकार परिषद को सौंपना संकेत देता है कि इस बार न्यायिक सुधार को आर्थिक उत्पादकता के नज़रिए से भी देखा जा रहा है — जो एक सकारात्मक बदलाव है। बिना क्रियान्वयन तंत्र और जवाबदेही ढाँचे के, यह रिपोर्ट भी पिछली कई समितियों की तरह केवल दस्तावेज़ बनकर न रह जाए, यह सुनिश्चित करना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी क्या है?
यह CJI जस्टिस सूर्यकांत द्वारा 12 मई 2025 को गठित 5 सदस्यीय समिति है, जिसका उद्देश्य देशभर की अदालतों के बुनियादी ढाँचे की कमियों का आकलन कर सुधार का रोडमैप तैयार करना है। इसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के जज जस्टिस अरविंद कुमार कर रहे हैं।
इस कमेटी की रिपोर्ट कब और किसे सौंपी जाएगी?
कमेटी को 31 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल को प्रस्तुत की जाएगी।
अदालतों के बुनियादी ढाँचे में सुधार पर कितना खर्च आने का अनुमान है?
अनुमान के अनुसार देशभर की अदालतों में बुनियादी ढाँचे की कमी को दूर करने पर ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक का खर्च आने की संभावना है। यही कारण है कि कमेटी पूंजीगत खर्च और दीर्घकालिक योजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार करेगी।
कमेटी में कौन-कौन से सदस्य शामिल हैं?
कमेटी में जस्टिस अरविंद कुमार (अध्यक्ष), जस्टिस दिबांगशू बसाक (कलकत्ता उच्च न्यायालय), जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय), जस्टिस सोमशेखर सुंदरासन (बॉम्बे उच्च न्यायालय) और CPWD के महानिदेशक शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल सदस्य सचिव हैं।
यह कमेटी न्यायिक सुधार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
देश में करोड़ों मामले लंबित हैं और बुनियादी ढाँचे की कमी न्याय में देरी का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। यह कमेटी ई-कोर्ट डिजिटलीकरण, आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स और न्यायिक कर्मचारियों की कार्यस्थल सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस रोडमैप तैयार करेगी।
राष्ट्र प्रेस