CJI जस्टिस सूर्यकांत ने बनाई ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी, 31 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने 12 मई 2025 को देशभर की अदालतों में बुनियादी ढाँचे की कमियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी' का गठन किया है। इस कमेटी का प्राथमिक उद्देश्य देश की अदालतों में मौजूद बुनियादी ढाँचे की कमियों का व्यापक आकलन करना और उन्हें दूर करने के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है। अनुमान के अनुसार, इस सुधार कार्य पर ₹40,000 से ₹50,000 करोड़ तक का खर्च आने की संभावना है।
कमेटी की संरचना और सदस्य
सर्वोच्च न्यायालय के जज जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता में गठित इस 5 सदस्यीय कमेटी में कलकत्ता उच्च न्यायालय के जज जस्टिस दिबांगशू बसाक, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जज जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा, बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज जस्टिस सोमशेखर सुंदरासन और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के महानिदेशक को शामिल किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल इस कमेटी के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएँगे।
रिपोर्ट की समयसीमा और दायरा
कमेटी को 31 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल को प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट में न्यायिक ढाँचे के विकास, पूंजीगत खर्च और दीर्घकालिक योजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
मुख्य कार्यक्षेत्र
कमेटी अदालतों में जजों, वकीलों, वादकारियों और आम नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकताओं का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही मामलों के त्वरित निपटारे के लिए तकनीकी संसाधनों के उपयोग, ई-कोर्ट व्यवस्था के तहत डिजिटलीकरण और कंप्यूटरीकरण को सुदृढ़ करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश की अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं और न्यायिक बुनियादी ढाँचे की कमी को न्याय में देरी का एक प्रमुख कारण माना जाता है।
डिजिटल और भौतिक सुधारों पर जोर
नागरिकों को न्यायिक सेवाएँ सुलभ रूप से उपलब्ध कराने, डिजिटल खाई को पाटने, आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स विकसित करने और न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालय कर्मचारियों के कार्यस्थलों को बेहतर बनाने जैसे सभी पहलुओं पर कमेटी विशेष ध्यान देगी। यह पहल न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की दिशा में एक दूरगामी प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
आगे की राह
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार और न्यायपालिका मिलकर न्यायिक ढाँचे के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने की स्थिति में होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रिपोर्ट की सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो न्याय तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार संभव है।