क्या कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर साबित होगा? - चीफ जस्टिस सूर्यकांत

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क्या कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर साबित होगा? - चीफ जस्टिस सूर्यकांत

सारांश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने चंदौली में छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर बनेंगे। जानिए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के बारे में।

Key Takeaways

  • चंदौली में छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास हुआ।
  • मुख्य न्यायाधीश ने इसे न्याय का मंदिर बताया।
  • यह कॉम्प्लेक्स आने वाले 50 वर्षों तक न्याय की आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
  • महिलाओं के लिए अलग बार रूम बनाने की आवश्यकता बताई गई।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की मांग की गई।

चंदौली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में शनिवार को चंदौली में छह एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास और भूमि पूजन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय को बधाई देते हुए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री ने 10 कोर्ट कॉम्प्लेक्स की घोषणा की है। इनमें से छह का निर्माण कार्य शनिवार से प्रारंभ हुआ है। इन कॉम्प्लेक्स के निर्माण से यूपी पूरे भारत में एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। ये कॉम्प्लेक्स देश के लिए बेंचमार्क बनेंगे। मैं जिस भी प्रदेश में जाऊंगा, वहां यूपी सरकार का उदाहरण दूंगा। मैं राज्य सरकारों और हाईकोर्ट से अपील करूंगा कि वहां भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह क्षेत्र कई ऐतिहासिक धार्मिक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ने उसी इतिहास में एक नई कड़ी जोड़ी है, जब यहां न्यायिक मंदिरों की स्थापना की जा रही है। इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स अगले 50 वर्षों तक न्याय परिसर की आवश्यकताओं को प्रभावशाली ढंग से पूरा करेगा। इस कॉम्प्लेक्स में अधिवक्ताओं और आम जनता के लिए उपलब्ध सुविधाएं अत्यंत सराहनीय हैं।

उन्होंने कहा कि यह कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर साबित होगा। यहां न्यायिक अधिकारी मानवीय मूल्यों का ध्यान रखते हुए फरियादियों को न्याय प्रदान करेंगे। इसमें बार के सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान में डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशरी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसमें एक अनुच्छेद है कि प्रत्येक राज्य के पास एक अपना हाईकोर्ट होना चाहिए और उस हाईकोर्ट को मौलिक, मानवीय और अन्य अधिकारों को लागू करने की क्षमता होगी। संविधान निर्माताओं की सोच यही थी कि डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशरी स्थापित करने से लोगों को अपने क्षेत्र में कोर्ट की सुविधाएं मिलेंगी।

मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि जनपद न्यायालयों में प्रैक्टिस करने वाली महिलाओं के लिए अलग से बार रूम बनाए जाएं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यह भी निवेदन किया कि कॉम्प्लेक्स में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित किया जाए। इससे बुजुर्गों और वादकारियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी।

शिलान्यास और भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी सहित अन्य उपस्थित थे।

Point of View

यह कार्यक्रम न्यायिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। न्याय का मंदिर बनने का यह विचार न केवल न्यायिक प्रणाली को मजबूती देगा, बल्कि लोगों को अपने क्षेत्र में न्याय की सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी कार्य करेगा।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

कोर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य क्या है?
कोर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य न्याय की सुविधाएं जन सामान्य तक पहुँचाना और न्यायिक प्रक्रिया को सशक्त बनाना है।
मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह कॉम्प्लेक्स न्याय का मंदिर साबित होगा और मानवीय मूल्यों का ध्यान रखकर न्याय प्रदान करेगा।
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