ऐतिहासिक नियुक्ति: जस्टिस लिसा गिल बनीं आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश, चंद्रबाबू ने दी बधाई

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ऐतिहासिक नियुक्ति: जस्टिस लिसा गिल बनीं आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश, चंद्रबाबू ने दी बधाई

सारांश

जस्टिस लिसा गिल 25 अप्रैल से आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। 36 वर्षों के कानूनी अनुभव वाली जस्टिस गिल की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर हुई। CM चंद्रबाबू नायडू ने इसे न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

Key Takeaways

  • जस्टिस लिसा गिल आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त की गई हैं।
  • वे 25 अप्रैल 2026 से पदभार संभालेंगी, जब वर्तमान CJ जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर सेवानिवृत्त होंगे।
  • जस्टिस गिल के पास कानूनी क्षेत्र में लगभग 36 वर्षों का अनुभव है, जिसमें पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में 11 वर्ष न्यायाधीश के रूप में सेवा शामिल है।
  • सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 फरवरी को उनके नाम की सिफारिश की थी।
  • केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 22 अप्रैल को संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत नियुक्ति की अधिसूचना जारी की।
  • मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

अमरावती, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को पहली बार एक महिला मुख्य न्यायाधीश मिलने जा रही हैं। जस्टिस लिसा गिल को 25 अप्रैल 2026 से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका में महिला नेतृत्व की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने किया अभिनंदन

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जस्टिस लिसा गिल को बधाई संदेश पोस्ट किया। उन्होंने इस नियुक्ति को उच्च न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "वर्षों की अटूट लगन और समर्पण से जस्टिस गिल ने सिविल, आपराधिक और संवैधानिक कानूनों के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और उत्कृष्ट कानूनी करियर का निर्माण किया है।" उन्होंने जस्टिस गिल को एक सफल, प्रेरणादायक और प्रभावशाली कार्यकाल की शुभकामनाएं भी दीं।

केंद्र सरकार की आधिकारिक अधिसूचना

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने बुधवार, 22 अप्रैल को जस्टिस लिसा गिल की नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपनी पोस्ट में बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने यह नियुक्ति की है।

अधिसूचना के अनुसार, जस्टिस लिसा गिल 25 अप्रैल 2026 से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करेंगी। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर 24 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे यह पद रिक्त होगा।

जस्टिस लिसा गिल का कानूनी सफर

जस्टिस गिल के पास कानूनी क्षेत्र में लगभग 36 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। इसमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में 11 वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में दिया गया योगदान भी शामिल है।

उन्होंने सिविल, आपराधिक और संवैधानिक कानूनों से जुड़े जटिल मामलों को दक्षता और निष्पक्षता के साथ निपटाया है। न्याय के प्रति उनकी अडिग प्रतिबद्धता ने उन्हें कानूनी जगत में गहरी प्रतिष्ठा दिलाई है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और स्थानांतरण

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 फरवरी को जस्टिस गिल को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। उस समय वे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं।

इसके बाद, पिछले महीने जस्टिस गिल को एक नई नीति के अंतर्गत पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया। यह नीति संभावित मुख्य न्यायाधीशों के समयपूर्व स्थानांतरण से संबंधित है, जो उन्हें नए उच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराती है।

ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक महत्व

यह नियुक्ति इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की स्थापना के दशकों बाद पहली बार किसी महिला को इसका नेतृत्व सौंपा जा रहा है। भारत के उच्च न्यायालयों में महिला मुख्य न्यायाधीशों की संख्या अब भी अपेक्षाकृत कम है, जो इस नियुक्ति को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।

गौरतलब है कि देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति को बढ़ावा देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। जस्टिस लिसा गिल की यह नियुक्ति न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे देश में महिला न्यायाधीशों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

25 अप्रैल 2026 को जस्टिस लिसा गिल के शपथ ग्रहण के साथ आंध्र प्रदेश की न्यायपालिका एक नए और ऐतिहासिक अध्याय में प्रवेश करेगी। उनके कार्यकाल से न्यायिक सुधारों और महिला सशक्तिकरण की दिशा में नई उम्मीदें जुड़ी हैं।

Point of View

बल्कि भारतीय न्यायपालिका में लैंगिक असंतुलन की उस गहरी खाई को पाटने की दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन ठोस कदम है। देश के 25 उच्च न्यायालयों में महिला मुख्य न्यायाधीशों की संख्या अभी भी नगण्य रही है — यह नियुक्ति उस चुप्पी को तोड़ती है। हालांकि असली कसौटी यह होगी कि क्या यह प्रतीकात्मकता व्यवस्थागत बदलाव में तब्दील होती है — महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति और कार्यस्थल परिस्थितियों में सुधार के रूप में। चंद्रबाबू का बधाई संदेश स्वागतयोग्य है, लेकिन राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह न्यायपालिका को हर स्तर पर अधिक समावेशी बनाने में सहयोग करे।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

जस्टिस लिसा गिल कौन हैं और उन्हें क्यों नियुक्त किया गया?
जस्टिस लिसा गिल एक वरिष्ठ न्यायाधीश हैं जिनके पास कानूनी क्षेत्र में लगभग 36 वर्षों का अनुभव है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने उन्हें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।
जस्टिस लिसा गिल कब से आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनेंगी?
जस्टिस लिसा गिल 25 अप्रैल 2026 से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालेंगी। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर 24 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
क्या जस्टिस लिसा गिल आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं?
हां, जस्टिस लिसा गिल आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की इतिहास में पहली महिला मुख्य न्यायाधीश हैं। यह नियुक्ति न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस लिसा गिल की सिफारिश कब की थी?
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 फरवरी को जस्टिस गिल के नाम की सिफारिश की थी। उस समय वे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं।
चंद्रबाबू नायडू ने जस्टिस लिसा गिल की नियुक्ति पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस नियुक्ति को उच्च न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने जस्टिस गिल को एक सफल, प्रेरणादायक और प्रभावशाली कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।
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