19 सितंबर 2026
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प्रमिला जयपाल: 'पढ़ना सबसे बड़ा अहिंसक प्रतिरोध', सिएटल जयपुर लिट फेस्ट में सेंसरशिप पर कड़ा रुख

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प्रमिला जयपाल: 'पढ़ना सबसे बड़ा अहिंसक प्रतिरोध', सिएटल जयपुर लिट फेस्ट में सेंसरशिप पर कड़ा रुख

सारांश

सिएटल में जयपुर लिट फेस्ट के मंच से प्रमिला जयपाल ने साहित्य को सेंसरशिप के खिलाफ सबसे धारदार हथियार बताया। टोनी मॉरिसन से लेकर अरुंधति रॉय तक — प्रतिबंधित किताबों की फेहरिस्त गिनाते हुए उन्होंने कहा: पढ़ना सबसे बड़ा अहिंसक प्रतिरोध है।

मुख्य बातें

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 19 सितंबर 2026 को सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे अमेरिकी संस्करण का उद्घाटन किया।
जयपाल ने कहा — 'पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा माध्यम है' और सेंसरशिप के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया।
अमेरिका में प्रतिबंधित किताबों में टोनी मॉरिसन की 'द ब्लूएस्ट आई', अरुंधति रॉय की 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स', 'द काइट रनर' और 'मिल्क एंड हनी' का उल्लेख किया।
जयपाल ने CNN , MSNBC और Politico को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की भी निंदा की।
जयपाल 16 वर्ष की उम्र में अकेले अमेरिका पहुँची थीं; 17 वर्ष बाद नागरिकता मिली — यह अनुभव उनकी पहली किताब का आधार बना।
जयपुर लिट फेस्ट अब अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, मालदीव और ऑस्ट्रेलिया तक पहुँच चुका है।

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 19 सितंबर 2026 को सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे अमेरिकी संस्करण के उद्घाटन समारोह में कहा कि पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे सशक्त माध्यम है। सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित इस साहित्यिक उत्सव में उन्होंने सेंसरशिप के खिलाफ खुलकर बोलते हुए लोगों से चुनौती दी गई किताबें पढ़ते रहने का आग्रह किया।

साहित्य और स्वतंत्रता का रिश्ता

जयपाल ने कहा, 'मेरे लिए पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा माध्यम है।' उन्होंने इस साहित्य महोत्सव को उस व्यापक परिप्रेक्ष्य से जोड़ा जिसमें अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में अभिव्यक्ति, असहमति और लोकतांत्रिक बहस पर पाबंदियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। उनका कहना था कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच विचारों का खुला आदान-प्रदान एक स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियादी ज़रूरत है।

उन्होंने साहित्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह शक्तिशाली संस्थानों से सवाल करने की हिम्मत देता है और सोच की सीमाओं को विस्तृत करता है। जयपाल ने कहा, 'यह किसी को हमारी कल्पना पर लगाम लगाने की अनुमति नहीं देता, ताकि हम अपने अनुभव और अपनी आगे की यात्रा एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें।'

प्रतिबंधित किताबों पर चिंता

जयपाल ने अमेरिका में कुछ किताबों पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने विशेष रूप से टोनी मॉरिसन की 'द ब्लूएस्ट आई', 'द काइट रनर', 'मिल्क एंड हनी' और अरुंधति रॉय की 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' का उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस तरह के कदम बुनियादी स्वतंत्रताओं के लिए खतरा हैं।

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा CNN, MSNBC और Politico को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित किए जाने की भी निंदा की। जयपाल ने कहा कि ये कदम प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

व्यक्तिगत सफर और लेखन

जयपाल ने इस अवसर पर भारत से अमेरिका तक की अपनी व्यक्तिगत यात्रा भी साझा की। उन्होंने बताया कि वह मात्र 16 वर्ष की उम्र में अकेली अमेरिका पहुँची थीं और अमेरिकी नागरिकता पाने में उन्हें 17 वर्ष का लंबा इंतज़ार करना पड़ा। अमेरिका में स्थायी होने के कई वर्षों बाद वह भारत लौटीं और करीब दो वर्ष गाँवों में रहकर अपनी जड़ों और पहचान को नए सिरे से समझने की कोशिश की।

इस अनुभव ने उनकी पहली किताब 'पिलग्रिमेज टू इंडिया: अ वुमन रिविजिट्स हर होमलैंड' को जन्म दिया, जो सिएटल के सील प्रेस से प्रकाशित हुई और बाद में पेंगुइन इंडिया ने भी इसे प्रकाशित किया। उन्होंने अपनी दूसरी किताब 'यूज़ द पावर यू हैव: अ ब्राउन वुमन्स गाइड टू पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल चेंज' का भी ज़िक्र किया और उम्मीद जताई कि यह अन्य महिलाओं को अपनी ताकत पहचानने में मदद करेगी।

जयपुर लिट फेस्ट की वैश्विक पहुँच

जयपाल ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के भारत से निकलकर अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, मालदीव और ऑस्ट्रेलिया तक विस्तार का स्वागत किया। उनका मानना है कि इस मंच ने भारतीय और दक्षिण एशियाई लेखकों, फिल्मकारों और कलाकारों को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचने का दुर्लभ अवसर दिया है।

गौरतलब है कि जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। यह महोत्सव ऐसे समय में आया है जब एशियाई मूल के अमेरिकियों के प्रति शत्रुता और नागरिक स्वतंत्रताओं पर दबाव की खबरें बढ़ रही हैं।

लोकतंत्र और प्रतिरोध का आह्वान

जयपाल ने लोगों से केवल मतदान और सामुदायिक भागीदारी तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि लोग लगातार पढ़ें, अपने अनुभव साझा करें और उन लेखकों की कहानियों से जुड़ें जिनकी आवाज़ें दबाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'हम अपने लोकतंत्र को फिर से मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि हमारे मौलिक अधिकारों को बंद न किया जा सके।' यह संकल्प उनके राजनीतिक और साहित्यिक दोनों सफरों का सार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे वक्त में जब अमेरिका में प्रेस स्वतंत्रता और पुस्तक-प्रतिबंध की बहस चरम पर है। किताबों के नाम गिनाना — मॉरिसन, रॉय, 'द काइट रनर' — महज सांस्कृतिक संदर्भ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संकेत है कि ये प्रतिबंध नस्ल, पहचान और असहमति को निशाना बनाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इसे 'साहित्य प्रेम' की कहानी बना देती है, जबकि असली मुद्दा यह है कि एक अप्रवासी महिला जनप्रतिनिधि उस व्यवस्था को चुनौती दे रही है जिसने उसे लंबे समय तक बाहरी माना।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रमिला जयपाल ने सिएटल में क्या कहा?
जयपाल ने 19 सितंबर 2026 को सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन पर कहा कि 'पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा माध्यम है।' उन्होंने सेंसरशिप का विरोध किया और लोगों से प्रतिबंधित किताबें पढ़ते रहने का आग्रह किया।
अमेरिका में किन किताबों पर प्रतिबंध का जयपाल ने ज़िक्र किया?
जयपाल ने टोनी मॉरिसन की 'द ब्लूएस्ट आई', 'द काइट रनर', 'मिल्क एंड हनी' और अरुंधति रॉय की 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' का उल्लेख किया। उन्होंने इन प्रतिबंधों को बुनियादी स्वतंत्रताओं के लिए खतरा बताया।
सिएटल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का यह कौन सा संस्करण था?
यह जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का सिएटल में तीसरा संस्करण था, जो सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित हुआ। फेस्टिवल अब भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, मालदीव और ऑस्ट्रेलिया में भी आयोजित होता है।
प्रमिला जयपाल कौन हैं और उनकी किताबें कौन सी हैं?
प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। उनकी पहली किताब 'पिलग्रिमेज टू इंडिया: अ वुमन रिविजिट्स हर होमलैंड' सील प्रेस और पेंगुइन इंडिया से प्रकाशित है, और दूसरी किताब 'यूज़ द पावर यू हैव: अ ब्राउन वुमन्स गाइड टू पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल चेंज' महिलाओं को राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए प्रेरित करती है।
जयपाल ने मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर क्या कहा?
जयपाल ने CNN, MSNBC और Politico को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित किए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
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