डिंपल यादव का केंद्र पर हमला: '20 जुलाई का छात्र आंदोलन दबाया, युवाओं के सवालों का जवाब दे सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने 13 अगस्त 2026 को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र में हुए हंगामे को 'बर्बादी' नहीं, बल्कि युवाओं और छात्रों के अनसुने सवालों की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। लोकसभा की कार्यवाही इसी सत्र में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है।
सत्र पर डिंपल यादव का रुख
डिंपल यादव ने स्पष्ट किया कि संसद सत्र का बाधित होना विपक्ष की विफलता नहीं है। उनके अनुसार, इस सत्र के दौरान देश के सामने युवाओं और छात्रों से जुड़े वे अहम सवाल उठे जिन्हें सरकार लंबे समय से नज़रअंदाज़ कर रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का ठोस जवाब देना होगा।
20 जुलाई के छात्र आंदोलन पर आरोप
सपा सांसद ने 20 जुलाई को हुए व्यापक छात्र प्रदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन हजारों-लाखों युवा सड़कों पर उतरे थे और प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ सरकार ने जिस तरह की कार्रवाई की, वह चौंकाने वाली थी। डिंपल यादव ने कहा, 'ये बच्चे हम सबके हैं — सरकार के परिवारों के नहीं तो क्या, पूरे देश ने सोशल मीडिया के ज़रिये उनका दर्द महसूस किया।' उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन में युवाओं की एकजुटता स्पष्ट दिखी और विपक्षी दलों ने उनके मुद्दों का समर्थन किया।
सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर गंभीर आरोप
डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ी रील्स और सामग्री सोशल मीडिया पर अब दिखाई नहीं दे रहीं। उन्होंने दावा किया कि एल्गोरिदम में बदलाव के ज़रिये इस आंदोलन की याद को जानबूझकर धुंधला किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह सरकार की उस मंशा को उजागर करता है जो नहीं चाहती कि लोग याद रखें कि देश में इतना बड़ा छात्र आंदोलन हुआ था। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
BJP पर अहंकार और आस्था से खिलवाड़ का आरोप
सपा सांसद ने कहा कि इस मानसून सत्र से यह संदेश गया है कि BJP सरकार अहंकारी है — न तो उसने आस्था से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया और न ही युवाओं के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने मंदिर के नाम पर जुटाई गई राशि के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। डिंपल यादव ने कहा कि जिन श्रद्धालुओं ने भावनाओं के साथ दान और समर्पण किया, उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है — और इसे उन्होंने 'आस्था के साथ चोरी' करार दिया।
मंदिर ट्रस्ट को राष्ट्रीय ट्रस्ट बनाने की माँग
डिंपल यादव ने माँग की कि मंदिर के प्रबंधन के लिए बनाए गए ट्रस्ट को राष्ट्रीय ट्रस्ट का दर्जा दिया जाए ताकि आने वाले हर पैसे का पारदर्शी हिसाब-किताब सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के धन का उपयोग किसी संगठन विशेष के हित में नहीं होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की माँग उठाता रहा है। आगे देखना होगा कि सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है और संसद के अगले सत्र में ये मुद्दे किस रूप में उठते हैं।